ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने युवा मतदाताओं से जुड़ने के लिए TikTok, Instagram और पॉडकास्ट पर अपना फोकस बढ़ाया है। उनके सहज वीडियो और लोकप्रिय क्रिएटर्स के साथ बातचीत को सराहना मिल रही है, लेकिन पारंपरिक मीडिया में इसकी आलोचना भी हुई है।
लंदन: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने पारंपरिक राजनीतिक संचार से अलग सोशल मीडिया को अपनी सरकार और जनता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनाना शुरू कर दिया है। बर्नहैम TikTok, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। साथ ही वह लोकप्रिय पॉडकास्ट और बड़े सोशल मीडिया क्रिएटर्स के कार्यक्रमों में शामिल होकर युवा दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उनकी यह रणनीति पूर्व प्रधानमंत्री की तुलना में काफी अलग मानी जा रही है। राजनीतिक और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, बर्नहैम की टीम सोशल मीडिया के मौजूदा माहौल को समझते हुए ऐसे कंटेंट पर जोर दे रही है, जो पारंपरिक राजनीतिक भाषणों की बजाय छोटे वीडियो, मनोरंजन और व्यक्तिगत संवाद के जरिए लोगों तक पहुंचता है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद बदला राजनीतिक संवाद का अंदाज
बर्नहैम ने प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद अपने सार्वजनिक संचार में अपेक्षाकृत अनौपचारिक शैली अपनाई है। कभी वह पब में बीयर का गिलास भरते नजर आते हैं, तो कभी निर्माण क्षेत्र से जुड़े हेलमेट के साथ वीडियो बनाते दिखाई देते हैं। एक अन्य वीडियो में वह ओलंपिक पदक विजेता मो फराह के साथ दौड़ते हुए नजर आए।
इन गतिविधियों को केवल प्रचार सामग्री के बजाय युवा दर्शकों से जुड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बर्नहैम का उद्देश्य ऐसे लोगों तक पहुंचना है, जो राजनीतिक खबरों के लिए सीधे अखबार, टीवी या पारंपरिक समाचार वेबसाइटों पर निर्भर नहीं रहते।
TikTok और पॉडकास्ट को बनाया प्रमुख माध्यम
बर्नहैम अपने आधिकारिक और व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट्स पर वीडियो पोस्ट करने के अलावा ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स के कार्यक्रमों में भी शामिल हो रहे हैं, जिनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
प्रधानमंत्री बनने के दिन ही वह यूक्रेनी मूल के ब्रिटेन स्थित कंटेंट क्रिएटर मैक्स क्लाइमेनको के TikTok कार्यक्रम Career Ladder में दिखाई दिए। क्लाइमेनको के TikTok पर करीब 9.8 मिलियन फॉलोअर्स बताए जाते हैं। कार्यक्रम का अनोखा फॉर्मेट भी लोगों का ध्यान खींचता है, जिसमें मेहमान और होस्ट सीढ़ी पर खड़े होकर नौकरियों और करियर से जुड़े सवालों पर बातचीत करते हैं।
बर्नहैम ने लेखिका एलिजाबेथ डे के लोकप्रिय पॉडकास्ट How to Fail में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में आमतौर पर चर्चित हस्तियां अपनी गलतियों और जीवन के मुश्किल अनुभवों के बारे में बात करती हैं।
कैमरे के सामने सहज अंदाज को मिल रही तारीफ
बर्नहैम की सोशल मीडिया रणनीति का सबसे बड़ा फायदा उनका कैमरे के सामने सहज नजर आना माना जा रहा है। राजनीतिक संचार विशेषज्ञों ने उनकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री की अपेक्षाकृत औपचारिक और कठोर शैली से करते हुए कहा है कि बर्नहैम जनता के सामने अधिक स्वाभाविक तरीके से संवाद करते दिखाई देते हैं।
डिजिटल मीडिया समाजशास्त्र के विशेषज्ञ स्टीवन बकली के अनुसार, बर्नहैम के आसपास संचार टीम का मीडिया वातावरण पर बेहतर नियंत्रण दिखाई देता है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री की टीम यह समझ रही है कि आज के समय में राजनीतिक संदेश केवल अखबारों या टीवी चैनलों के माध्यम से नहीं पहुंचता।
वीडियो में गंभीर मुद्दों को बनाया जा रहा है आसान
बर्नहैम की टीम राजनीतिक और नीतिगत मुद्दों को भी मनोरंजक वीडियो के जरिए पेश करने की कोशिश कर रही है। एक TikTok वीडियो में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बर्नहैम को पहले अकादमिक टोपी उछालते और फिर निर्माण श्रमिकों द्वारा पहना जाने वाला हेलमेट पकड़ते हुए दिखाया गया।
वीडियो को एडिटिंग के जरिए काफी आकर्षक बनाया गया, लेकिन अंत में एक ऐसा दृश्य भी रखा गया जिसमें बर्नहैम हेलमेट पकड़ने में असफल हो जाते हैं और खुद हंसने लगते हैं।
इस तरह की छोटी-छोटी गलतियों को छिपाने की बजाय वीडियो में शामिल करना उनके कंटेंट को अधिक मानवीय और कम औपचारिक बनाता है।
पब में बीयर परोसी, सार्वजनिक जीवन से जोड़ा संदेश
एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में बर्नहैम को पब में बीयर परोसते हुए देखा गया। वीडियो का इस्तेमाल पब मालिकों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के लिए सरकार की प्रस्तावित सहायता या नीतिगत कदमों को बताने के लिए किया गया।
ऐसे वीडियो में प्रधानमंत्री का सीधे लोगों के बीच दिखाई देना संदेश को पारंपरिक सरकारी बयान की तुलना में अधिक व्यक्तिगत बना सकता है। यही वजह है कि बर्नहैम की डिजिटल रणनीति को ब्रिटिश राजनीति में एक नए संचार मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है।
युवाओं के बीच बढ़ रही डिजिटल पहुंच
एक सर्वेक्षण संस्था के अनुसार, युवा वर्ग के बीच बर्नहैम सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित करने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं। 18 से 24 वर्ष की आयु के आधे से अधिक लोगों ने उनके कंटेंट को देखने की बात कही है।
ब्रिटिश राजनीति की विशेषज्ञ लॉरा कून्सबर्ग ने भी बर्नहैम को स्वाभाविक रूप से अच्छा संवादकर्ता बताया है। सोशल मीडिया पर उनकी बढ़ती मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि नई पीढ़ी के मतदाताओं तक पहुंचने के लिए राजनीतिक नेताओं को अपनी संचार शैली में बदलाव करना पड़ सकता है।
TikTok पर राजनीतिक विज्ञापन की चुनौती
हालांकि TikTok पर राजनीतिक विज्ञापनों की अनुमति नहीं है। ऐसे में राजनीतिक नेताओं के वीडियो को दूसरे मनोरंजन और क्रिएटर कंटेंट के साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।
बर्नहैम की रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके वीडियो को सीधे राजनीतिक विज्ञापन के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत और मनोरंजक कंटेंट के तौर पर देखा जाता है।
उनके कुछ वीडियो पर दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि प्रधानमंत्री का नया अंदाज उसे प्रभावित कर रहा है।
आलोचकों ने बताया ‘सस्ती नौटंकी’
बर्नहैम की डिजिटल रणनीति को लेकर सभी प्रतिक्रियाएं सकारात्मक नहीं हैं। कुछ पारंपरिक मीडिया और राजनीतिक आलोचकों ने प्रधानमंत्री के इस अंदाज पर सवाल उठाए हैं।
आलोचकों का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री का काम गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर नेतृत्व करना है और अत्यधिक सोशल मीडिया केंद्रित गतिविधियां राजनीतिक संचार को सतही बना सकती हैं। कुछ टिप्पणीकारों ने उनके वीडियो को ‘सस्ती नौटंकी’ और केवल छवि बनाने की कोशिश बताया है।
कुछ आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या प्रधानमंत्री के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पारंपरिक मीडिया के जरिए नीतियों और फैसलों पर जवाब देना।

पारंपरिक मीडिया और सरकार के बीच दूरी
बर्नहैम की डिजिटल रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू पारंपरिक मीडिया के साथ उनके संबंध भी हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने BBC को इंटरव्यू दिया है, लेकिन कई प्रमुख राष्ट्रीय अखबारों को अब तक उनके साथ विस्तृत बातचीत का अवसर नहीं मिला है।
इससे पारंपरिक मीडिया में असंतोष बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री का कार्यालय लगातार सीधे सोशल मीडिया के जरिए जनता तक संदेश पहुंचाता रहा, तो समाचार संस्थानों की भूमिका और पहुंच को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।
विपक्षी दल भी सोशल मीडिया पर मजबूत
ब्रिटेन की राजनीति में सोशल मीडिया का महत्व केवल बर्नहैम तक सीमित नहीं है। दक्षिणपंथी और आव्रजन-विरोधी रिफॉर्म यूके के नेता नाइजल फराज भी सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में समर्थक रखते हैं।
TikTok और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी मजबूत मौजूदगी बताती है कि राजनीतिक दल और नेता युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए डिजिटल माध्यमों को तेजी से अपना रहे हैं।
ऐसे माहौल में बर्नहैम की टीम भी सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी मजबूत करके राजनीतिक विमर्श में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना चाहती है।
क्या प्रधानमंत्री बनना अब कंटेंट क्रिएटर बनने जैसा है?
डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दौर में प्रधानमंत्री की भूमिका केवल संसद, प्रेस कॉन्फ्रेंस और टेलीविजन इंटरव्यू तक सीमित नहीं रह गई है। नेताओं को अब सोशल मीडिया के लिए भी ऐसी सामग्री तैयार करनी पड़ती है, जो कुछ ही सेकंड में लोगों का ध्यान खींच सके।
बर्नहैम को ब्रिटेन का पहला ‘TikTok PM’ कहे जाने के पीछे यही बदलाव है। हालांकि उन्होंने TikTok अकाउंट काफी बाद में शुरू किया। पूर्व प्रधानमंत्री की तुलना में उनके वीडियो ज्यादा व्यक्तिगत और मनोरंजन आधारित दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बर्नहैम को पारंपरिक मीडिया की जरूरत पहले के प्रधानमंत्रियों की तुलना में कम महसूस हो सकती है, क्योंकि वह सीधे अपने दर्शकों तक पहुंच सकते हैं।
डिजिटल रणनीति का भविष्य क्या होगा?
बर्नहैम की सोशल मीडिया रणनीति आने वाले समय में ब्रिटिश राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोग साबित हो सकती है। यदि उनके वीडियो युवा मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाते हैं और सरकारी नीतियों को सरल तरीके से समझाने में सफल रहते हैं, तो दूसरे राजनीतिक नेता भी इसी मॉडल को अपना सकते हैं।
लेकिन इसके साथ एक जोखिम भी है। यदि सोशल मीडिया कंटेंट सरकार की गंभीर नीतियों और फैसलों पर हावी हो गया, तो आलोचक इसे केवल लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश बता सकते हैं।
इसलिए बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मनोरंजक डिजिटल कंटेंट और प्रधानमंत्री पद की गंभीर जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना होगी। फिलहाल उनका डिजिटल-first मॉडल ब्रिटेन की राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रणनीति लंबे समय में उनकी राजनीतिक लोकप्रियता और सरकार की विश्वसनीयता को कितना प्रभावित करती है।










