उत्तर प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें नाम, जन्मतिथि और पते में मामूली बदलाव कर दोबारा पासपोर्ट बनवाए गए। जांच में एजेंटों और प्लेसमेंट एजेंसियों की भूमिका बड़ी चुनौती बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश: फर्जी पासपोर्ट: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और देवरिया समेत कई जिलों में जाली दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने के मामले सामने आए हैं। आरोप है कि विदेश भेजने वाले कुछ एजेंट और प्लेसमेंट एजेंसियां ऐसे नेटवर्क से जुड़ी हैं। नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि या पता बदलकर तैयार दस्तावेजों के सहारे दूसरा पासपोर्ट बनवाने के मामले जांच में सामने आए हैं।
एजेंटों के नेटवर्क से बन रहे फर्जी दस्तावेज
उत्तर प्रदेश में विदेश भेजने के नाम पर काम करने वाले कुछ कथित एजेंटों और प्लेसमेंट एजेंसियों पर फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ये एजेंट मोटी रकम लेकर आवेदकों के लिए जाली दस्तावेज तैयार कराते हैं और उनके आधार पर पासपोर्ट बनवाने में मदद करते हैं।

ऐसे मामलों में अक्सर कार्रवाई उस व्यक्ति तक सीमित रह जाती है, जिसके नाम पर फर्जी पासपोर्ट तैयार हुआ। जाली दस्तावेज किसने बनाए, आवेदन प्रक्रिया में किस स्तर पर मदद की गई और संबंधित एजेंट या प्लेसमेंट एजेंसी की क्या भूमिका थी, इसकी जांच कई मामलों में चुनौती बनी रहती है।
गोरखपुर में 2024 से 78 पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मुकदमे
गोरखपुर में 2024 से अगस्त 2026 के बीच पासपोर्ट फर्जीवाड़े से जुड़े 78 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की बताई गई है, जहां कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।
एक चर्चित मामले में पंजाब के रहने वाले गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला ने गोरखपुर के लच्छीपुर, गोरखनाथ थाना क्षेत्र के पते पर कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। बाद में वह इंडोनेशिया चला गया। वहां गिरफ्तारी के बाद गोरखपुर पुलिस उसे भारत वापस लाने में सफल रही।
गोरखपुर पुलिस के अनुसार, कई वांछित अपराधियों के विदेश में रहने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे मामलों में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल से जांच एजेंसियों के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा होती है।
देवरिया में एक परिवार के पांच लोगों का मामला
देवरिया के एकौना थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच लोगों के फर्जी तरीके से दूसरा पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया। आरोप है कि पहले से पासपोर्ट होने के बावजूद नाम या पिता के नाम में मामूली बदलाव किए गए और नए दस्तावेज तैयार कर दूसरा पासपोर्ट बनवाया गया।
अप्रैल 2025 में की गई शिकायत के बाद मामले की जांच हुई। जांच में कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर पांचों लोगों के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की विवेचना अभी जारी है।
शिकायत के बाद सामने आया दूसरा पासपोर्ट
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में भी एक व्यक्ति के दो पासपोर्ट का मामला शिकायत के बाद सामने आया। आरोप के मुताबिक, उमेश यादव ने पहले अपने नाम से पासपोर्ट बनवाया था। विदेश में अवैध गतिविधि के मामले में पकड़े जाने के बाद उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया।
इसके बाद कथित तौर पर उसने नाम और जन्मतिथि में बदलाव कर दूसरा पासपोर्ट बनवा लिया। पिता का नाम और पता पहले जैसा ही रहने के बावजूद अलग पहचान के दस्तावेज इस्तेमाल किए गए। गुमनाम शिकायत के बाद पुलिस जांच में कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई और मई 2026 में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस सत्यापन प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
इन मामलों से पासपोर्ट जारी होने से पहले होने वाली पुलिस जांच की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध मामलों में कई फर्जीवाड़े शिकायत मिलने के बाद जांच के दौरान सामने आए।
फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए केवल पासपोर्ट धारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जाली दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों, बिचौलियों, एजेंटों और उनकी मदद करने वाले नेटवर्क की पहचान करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विदेश रोजगार के नाम पर युवाओं से होने वाली धोखाधड़ी के साथ फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में एजेंटों की भूमिका की गहराई से जांच और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी हो जाता है।











