यूपी सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाई, जिला से सुप्रीम कोर्ट तक मिलेगा लाभ

यूपी सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ा दी है। नई दरों का लाभ जिला अदालतों, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत अधिवक्ताओं को मिलेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी अधिवक्ताओं की फीस में संशोधन करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। यह फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया गया है, जिससे जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कार्यरत वकीलों को लाभ मिलेगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी संबंधी आदेश जारी कर दिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किए गए इस फैसले के तहत जिला अदालतों, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस और बहस फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सरकार का मानना है कि इससे विधिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को मजबूती मिलेगी।

सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया?

कुछ वर्षों से सरकारी अधिवक्ताओं की फीस में संशोधन की मांग लगातार उठ रही थी। बदलती न्यायिक प्रक्रियाओं, मुकदमों की बढ़ती संख्या और कानूनी कार्यों की जटिलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अब फीस संरचना में बड़ा बदलाव किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी आदेश के तहत विभिन्न स्तरों पर कार्यरत सरकारी वकीलों की रिटेनर फीस और बहस फीस में वृद्धि की गई है।

सरकार का मानना है कि इससे अनुभवी अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा और सरकारी मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। नई व्यवस्था का लाभ जिला न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार का पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं को मिलेगा।

जिला और हाईकोर्ट स्तर के अधिवक्ताओं को राहत

जारी आदेश के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस अब 14,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई है। इसके अलावा उन्हें प्रत्येक कार्य दिवस पर 2,500 रुपये बहस फीस भी मिलेगी। वहीं अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं को 11,000 रुपये मासिक रिटेनर फीस तथा 2,300 रुपये प्रतिदिन बहस फीस दी जाएगी।

सरकार ने सहायक और उप जिला शासकीय अधिवक्ताओं की फीस में भी संशोधन किया है। हालांकि विभिन्न श्रेणियों के अनुसार भुगतान अलग-अलग होगा, लेकिन संशोधित दरों से जिला स्तर पर सरकारी मुकदमों की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से फीस बढ़ोतरी की मांग कर रहे अधिवक्ताओं के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाईकोर्ट में कार्यरत मुख्य स्थायी अधिवक्ता और लोक अभियोजकों के लिए भी नई फीस संरचना लागू की गई है। अब उन्हें 35,000 रुपये प्रतिमाह रिटेनर फीस मिलेगी, जबकि बहस के लिए प्रति कार्य दिवस 12,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसी तरह अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं को 20,000 रुपये मासिक रिटेनर फीस और 8,000 रुपये प्रतिदिन बहस फीस मिलेगी। सरकार ने अन्य श्रेणियों के सरकारी वकीलों के पारिश्रमिक में भी संशोधन किया है, जिससे उच्च न्यायालय में सरकारी पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं की आय में बढ़ोतरी होगी।

महाधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट पैनल के लिए नई दरें

राज्य के सर्वोच्च विधिक अधिकारी महाधिवक्ता के लिए रिटेनर फीस 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह तय की गई है। इसके अतिरिक्त उन्हें प्रत्येक कार्य दिवस पर 60,000 रुपये बहस फीस प्रदान की जाएगी। यह संशोधन राज्य के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों के दायित्व और कार्यभार को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

अपर महाधिवक्ताओं के लिए भी फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। हाईकोर्ट में पैरवी करने पर उन्हें 40,000 रुपये प्रति कार्य दिवस तथा सुप्रीम कोर्ट में पेश होने पर 50,000 रुपये प्रति कार्य दिवस बहस फीस मिलेगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को 30,000 रुपये प्रतिमाह रिटेनर फीस और 15,000 रुपये प्रतिदिन बहस फीस दी जाएगी।

सरकार ने विशेष और वरिष्ठ पैनल अधिवक्ताओं के लिए भी अधिकतम फीस सीमा निर्धारित की है। माना जा रहा है कि नई फीस व्यवस्था से सरकारी मुकदमों की गुणवत्ता बेहतर होगी, अनुभवी वकीलों को सरकारी मामलों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और न्यायालयों में राज्य का पक्ष अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा।

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