यूपी में लक्षणविहीन टीबी जीवाणु का बढ़ता खतरा: रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते ही हो सकता है सक्रिय

यूपी में लक्षणविहीन टीबी संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने पर यह सक्रिय हो सकता हैजानें मुफ्त जांच और उपचार की पूरी प्रक्रिया
यूपी में लक्षणविहीन टीबी जीवाणु का बढ़ता खतरा: रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते ही हो सकता है सक्रिय
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उत्तर प्रदेश में लक्षणविहीन टीबी (Latent Tuberculosis Infection - LTBI) को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोगों के शरीर में टीबी के जीवाणु मौजूद होते हैं, लेकिन वे लंबे समय तक निष्क्रिय (Inactive) रहते हैं। ऐसे लोगों में बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते और वे सामान्य जीवन जीते हैं। हालांकि, यदि किसी कारण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो जाती है, तो यही जीवाणु सक्रिय होकर टीबी का कारण बन सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लक्षणविहीन टीबी से संक्रमित व्यक्ति को आमतौर पर खांसी, बुखार, वजन घटना या रात में पसीना आने जैसी समस्याएं नहीं होतीं। यही वजह है कि अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं चल पाता कि उनके शरीर में टीबी के जीवाणु मौजूद हैं। लेकिन मधुमेह, कुपोषण, एचआईवी संक्रमण, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन या अन्य कारणों से इम्यूनिटी कमजोर होने पर संक्रमण सक्रिय होकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में लक्षणविहीन टीबी के सक्रिय होने की संभावना अधिक रहती है। इनमें शामिल हैं—

  • टीबी मरीज के परिवार या करीबी संपर्क में रहने वाले लोग।
  • मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज।
  • एचआईवी संक्रमित व्यक्ति।
  • कुपोषित बच्चे और बुजुर्ग।
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले लोग।
  • लंबे समय तक इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेने वाले मरीज।

स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों को समय-समय पर जांच कराने की सलाह देता है, ताकि संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सके।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), जिला अस्पतालों और चिन्हित स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच और उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

यदि किसी व्यक्ति का टीबी मरीज से संपर्क रहा है या डॉक्टर को लक्षणविहीन संक्रमण की आशंका है, तो आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श के बाद जांच कराई जाती है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, बलगम की जांच, मॉलिक्यूलर टेस्ट या अन्य जांचें कराई जाती हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक आगे की दवा और उपचार की योजना तय करते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और उपचार शुरू होने से सक्रिय टीबी होने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे न केवल मरीज की सेहत सुरक्षित रहती है, बल्कि समाज में संक्रमण फैलने का खतरा भी घटता है। इसलिए टीबी मरीज के संपर्क में आए लोगों को जांच कराने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि परिवार या आसपास किसी व्यक्ति को टीबी है, तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लें और आवश्यक जांच कराएं। टीबी पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसकी जांच तथा दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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