UPSC Success Story: किसान की बेटी प्राची चौहान ने AIR 260 हासिल कर IAS बनने का सपना किया पूरा

UPSC CSE 2025 में प्राची चौहान ने AIR 260 हासिल किया। किसान परिवार से आने वाली प्राची ने सीमित संसाधनों और असफलताओं के बावजूद सफलता पाई।

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के छोटे गांव से आने वाली प्राची चौहान ने UPSC CSE 2025 में AIR 260 हासिल की। सीमित संसाधनों और असफलताओं के बावजूद सही दिशा, मेहनत और self-study से उन्होंने सफलता पाई।

UPSC Success Story: प्राची चौहान की कहानी उन उम्मीदवारों के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के छोटे गांव जौहद से आने वाली प्राची किसान परिवार से हैं। सरकारी स्कूल में पेड़ के नीचे पढ़ाई से शुरू हुआ उनका सफर कई चुनौतियों और असफल प्रयासों से गुजरते हुए UPSC CSE 2025 में AIR 260 तक पहुंचा।

सरकारी स्कूल से शुरू हुआ IAS बनने का सफर

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के छोटे से गांव जौहद की रहने वाली प्राची चौहान ने बेहद सामान्य परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई शुरू की। उनके पिता चंद्रभान सिंह चौहान किसान हैं, जबकि मां साधना सिंह चौहान गृहिणी हैं। परिवार में पांच भाई-बहनों में प्राची सबसे बड़ी हैं।

प्राची ने शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से हासिल की। उनके मुताबिक, स्कूल में पक्की बिल्डिंग तक नहीं थी और कई बार पेड़ के नीचे बेंच लगाकर कक्षाएं चलती थीं। स्कूल की लैब भी बेहद सीमित संसाधनों वाली थी।

इन परिस्थितियों के बावजूद प्राची ने पढ़ाई जारी रखी। कॉलेज पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उन्हें देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की ओर बढ़ा दिया।

कॉलेज में पहली बार UPSC के बारे में मिली जानकारी

प्राची को कॉलेज के दौरान UPSC और सिविल सेवा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। BSc के दूसरे साल में उन्होंने इस परीक्षा के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया।

सरकारी दफ्तरों में काम के दौरान उन्होंने कलेक्टर की भूमिका को करीब से देखा। यहीं से उनके मन में IAS अधिकारी बनने की इच्छा पैदा हुई। शुरुआत में उनके लिए UPSC का मतलब सिर्फ कलेक्टर बनने की परीक्षा था। उन्हें यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि परीक्षा कितने चरणों में होती है और इसकी पूरी चयन प्रक्रिया क्या है।

ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में उन्होंने IAS बनने का लक्ष्य तय किया और इसकी तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, आर्थिक स्थिति और सही मार्गदर्शन की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती बनी रही।

तीन असफलताओं के बाद बदली तैयारी की रणनीति

प्राची के लिए UPSC का सफर आसान नहीं रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे लंबे समय तक महंगी कोचिंग ले सकें। इसलिए उन्होंने मुख्य रूप से self-study और online courses की मदद से तैयारी की।

पहले प्रयास के दौरान परीक्षा का दबाव इतना ज्यादा था कि उनसे OMR शीट भरने में भी गलती हो गई। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को जारी रखा और दूसरे तथा तीसरे प्रयास में Prelims पास करने में सफलता हासिल की।

हालांकि, दोनों बार वे Mains के स्तर पर आगे नहीं बढ़ सकीं। प्राची के अनुसार, मेहनत करने के बावजूद सही guidance की कमी उनके लिए बड़ी समस्या थी। इसके साथ ही परिवार की जिम्मेदारियां और समाज की सोच भी उनके रास्ते की चुनौतियों में शामिल थीं।

वे ऐसे सामाजिक माहौल से आती हैं, जहां लड़कियों को पढ़ाई के लिए बाहर भेजने को लेकर परिवारों पर दबाव रहता है। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

सही दिशा और मेहनत को बनाया सफलता का आधार

लगातार असफलताओं के बाद प्राची ने अपनी तैयारी की रणनीति पर दोबारा काम किया। तीन प्रयासों के बाद वे UPSC की बेहतर तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्हें मार्गदर्शन मिला।

उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और तैयारी में जरूरी बदलाव किए। प्राची के अनुसार, सिर्फ मेहनत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस मेहनत को सही दिशा देना भी जरूरी है।

इसी रणनीति के साथ उन्होंने UPSC Civil Services Examination 2025 में शानदार प्रदर्शन किया और AIR 260 हासिल की। उनकी सफलता ने यह दिखाया कि सीमित संसाधन, छोटे शहर या गांव से आने वाला बैकग्राउंड और शुरुआती असफलताएं किसी उम्मीदवार के अंतिम लक्ष्य की राह नहीं रोक सकतीं।

प्राची चौहान की कहानी खास तौर पर उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक या सामाजिक चुनौतियों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि लगातार प्रयास के साथ सही guidance और अपनी गलतियों को सुधारने की क्षमता सफलता की दिशा बदल सकती है।

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