विश्व शिक्षक दिवस 2026 पर शिक्षकों की कमी का बड़ा आंकड़ा सामने आया है। भारत में 11.16 लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली हैं, जबकि 1,00,843 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है। हालांकि शिक्षकों की कुल संख्या लगातार बढ़ी है।
नई दिल्ली: हर साल 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस मनाया जाता है। 1994 में यूनेस्को की पहल से शुरू हुए इस दिवस का उद्देश्य शिक्षकों के योगदान और शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका को सम्मान देना है। World Teachers Day 2026 के मौके पर भारत में शिक्षकों की उपलब्धता और कमी से जुड़े आंकड़े शिक्षा व्यवस्था की चुनौती को सामने रखते हैं।
भारत में 11.16 लाख से ज्यादा शिक्षक पद खाली
यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार भारत के स्कूलों में 11 लाख से अधिक यानी 11.16 लाख शिक्षक पद खाली हैं। कुल स्वीकृत रिक्तियों में से 69 प्रतिशत पद ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में हैं। केंद्रीय विद्यालयों में करीब साढ़े 8 हजार पद खाली हैं, जबकि नवोदय विद्यालयों में 24.8 प्रतिशत पद रिक्त हैं।

जिन राज्यों में शिक्षकों की कमी सबसे ज्यादा बताई गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और कर्नाटक शामिल हैं। हालांकि, शिक्षकों की कुल संख्या में लगातार बढ़ोतरी भी हुई है।
चार साल में शिक्षकों की संख्या 8.3 प्रतिशत बढ़ी
'यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस' यानी UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार देश में शिक्षकों की संख्या 2022-23 से लगातार बढ़ी है। 2022-23 में देश में 94,83,294 शिक्षक थे, जो 2023-24 में बढ़कर 98,07,600 हो गए।
2024-25 में शिक्षकों की संख्या 1,01,22,420 पहुंची और 2025-26 में यह बढ़कर 1,02,73,020 हो गई। इस तरह 2022-23 की तुलना में 2025-26 तक शिक्षकों की संख्या में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में पहली बार देश में शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ से अधिक हुई है।
1,00,843 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक
UDISE+ 2025-26 के अनुसार देश में सभी तरह के स्कूल मैनेजमेंट के तहत 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 3 प्रतिशत कम हुई है, लेकिन देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में यह अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 16,357 सिंगल-टीचर स्कूल हैं। इसके बाद झारखंड में 9,827, महाराष्ट्र में 9,269, कर्नाटक में 8,042, उत्तर प्रदेश में 7,874, राजस्थान में 7,200 और पश्चिम बंगाल में 6,769 ऐसे स्कूल हैं।
तेलंगाना में 4,793, तमिलनाडु में 3,957, असम में 3,159, हिमाचल प्रदेश में 3,128, उत्तराखंड में 2,655, छत्तीसगढ़ में 2,461, गुजरात में 2,335 और मध्य प्रदेश में 2,269 सिंगल-टीचर स्कूल हैं। बिहार में 2,006, पंजाब में 1,749, जम्मू-कश्मीर में 1,544, ओडिशा में 1,458 और हरियाणा में 1,278 ऐसे स्कूल हैं।
चार साल में 17,347 सिंगल-टीचर स्कूल घटे
UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार 2022-23 में देश में 1,18,190 सिंगल-टीचर स्कूल थे। 2023-24 में इनकी संख्या घटकर 1,10,971 हो गई। 2024-25 में यह आंकड़ा 1,04,125 और 2025-26 में 1,00,843 रह गया।
इस तरह चार वर्षों में ऐसे स्कूलों की संख्या में 17,347 की कमी आई है, जो करीब 15 प्रतिशत की गिरावट है। नवीनतम आंकड़ों में छात्र-शिक्षक अनुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है। 2025-26 में राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात बुनियादी स्तर पर 10, प्रारंभिक स्तर पर 12, मध्य स्तर पर 17 और माध्यमिक स्तर पर 21 रहा।
IIT, NIT और IIIT में भी शिक्षकों के पद खाली
शिक्षकों की कमी केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। संसदीय आंकड़ों पर आधारित एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय संस्थानों में शिक्षकों के 34 प्रतिशत पद खाली हैं। इनमें प्रोफेसर स्तर के 56.2 प्रतिशत स्वीकृत पद भी शामिल हैं।
IIT में शिक्षकों के 39 प्रतिशत, IIIT में 54 प्रतिशत, NIT में 29 प्रतिशत और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 33 प्रतिशत पद खाली हैं।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार शिक्षकों की भर्ती और तैनाती मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकारी स्कूलों में स्वीकृत पदों, कार्यरत शिक्षकों और रिक्तियों का प्रबंधन संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि शिक्षकों की कुल संख्या बढ़ने और सिंगल-टीचर स्कूलों में कमी आने के बावजूद देश में शिक्षकों की उपलब्धता और रिक्त पद अब भी शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती हैं।
World Teachers’ Day 2026 की जानकारी के लिए उम्मीदवार/पाठक UNESCO की आधिकारिक वेबसाइट unesco.org पर विजिट कर सकते हैं।











