अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। उन्होंने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर अमेरिका के साथ बेहतर व्यापार समझौता ठुकराने का आरोप लगाया, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव सामने आया।
वाशिंगटन: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तीखे बयानों के कारण चर्चा में है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कनाडा की तुलना एक ऐसे छोटे कुत्ते से की, जो बड़े कुत्ते को लगातार भौंककर परेशान करता रहता है। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर अमेरिका की ओर से दिए गए बेहतर व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप लगाया।
बेसेंट ने यह टिप्पणी फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर तनाव बना हुआ है।
बेसेंट ने जर्मन शेफर्ड का उदाहरण दिया
बेसेंट ने कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार विवाद को समझाने के लिए अपने पुराने जर्मन शेफर्ड कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि पार्क में एक छोटा कुत्ता उनके जर्मन शेफर्ड पर लगातार भौंकता था।
उनके मुताबिक, उनका जर्मन शेफर्ड काफी समय तक उस छोटे कुत्ते को नजरअंदाज करता रहा, लेकिन आखिरकार एक दिन उसका धैर्य खत्म हो गया। बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ मौजूदा स्थिति उन्हें इसी घटना की याद दिलाती है।
इस टिप्पणी को कनाडा के प्रति अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्नी पर बेहतर ट्रेड डील ठुकराने का आरोप
अमेरिकी वित्त मंत्री ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर एक बेहतर व्यापार समझौते को अस्वीकार करने का आरोप भी लगाया। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच 19 से 21 अगस्त तक तीन दिन की व्यापार वार्ता हुई थी, लेकिन बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी।
कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने बातचीत के अंतिम चरण में समझौते की शर्तों में बदलाव कर दिया था। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का कहना था कि कनाडा को एक अच्छा प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन वह उस पर सहमत नहीं हुआ।
इसी असहमति के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद और गहरा गया।
कनाडाई टैरिफ से अमेरिकी कीमतों पर मामूली असर: बेसेंट
बेसेंट ने यह भी दावा किया कि कनाडा के साथ मौजूदा व्यापार युद्ध का अमेरिकी कीमतों पर प्रभाव बहुत मामूली होगा। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर लगातार बयानबाजी हो रही है।
बेसेंट पहले भी कार्नी पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कनाडाई प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बेहतर है, इस पर ध्यान देने के बजाय अपनी राजनीतिक छवि को लेकर ज्यादा चिंतित हैं।
ट्रम्प ने कनाडाई सामान पर लगाया 50% टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता नहीं होने के बाद 22 अगस्त से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपए के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया था।
बताया गया कि यह टैरिफ अमेरिका को भेजे जाने वाले कनाडाई सामान के कुल मूल्य का करीब 5% है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम को कनाडा पर हमला बताया था।
उन्होंने दोनों देशों के बढ़ते व्यापार विवाद पर कहा था कि कनाडा युद्ध जैसी स्थिति में है, क्योंकि उस पर हमला हुआ है।
आखिर किन मुद्दों पर अटका अमेरिका-कनाडा व्यापार समझौता?
अमेरिका और कनाडा लंबे समय से कई व्यापारिक मुद्दों पर मतभेद रखते हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी उत्पाद, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं।
अमेरिका का आरोप है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए समान अवसर पैदा नहीं करतीं। दूसरी ओर, कनाडा अमेरिका की ओर से लगाए गए विभिन्न टैरिफ में राहत की मांग करता रहा है।
1. अमेरिकी कारों को लेकर विवाद
अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की व्यापार नीतियां अमेरिकी वाहन कंपनियों को कनाडाई बाजार में बराबर अवसर नहीं देतीं।
अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था में अमेरिकी कारों और अन्य अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार को अधिक खोले। इसके जवाब में कनाडा ने अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत की मांग की थी।
हालांकि, अमेरिका इन टैरिफ को हटाने के लिए तैयार नहीं हुआ।
2. कनाडा का डेयरी बाजार
कनाडा अपने डेयरी उद्योग को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम और प्रतिबंध लागू करता रहा है।
अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों को कनाडाई बाजार में ज्यादा आसानी से पहुंच मिले। कनाडा ने हालांकि अपने घरेलू डेयरी क्षेत्र को लेकर बड़ी रियायत देने से परहेज किया।
यह मुद्दा भी दोनों देशों की बातचीत में प्रमुख विवाद बना रहा।
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3. अमेरिकी शराब और कनाडाई लकड़ी
कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर भी अमेरिका नाराज है। अमेरिकी पक्ष इसे अपने उत्पादों के साथ भेदभाव मानता है और चाहता है कि उसकी शराब को कनाडाई बाजार में अधिक आसानी से बेचा जा सके।
इसके अलावा सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी दोनों देशों में लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आयात होने वाली लकड़ी पर अलग-अलग व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है।
कनाडा ने भी जवाबी टैरिफ की घोषणा की
अमेरिका के 50% टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा।
इस कदम के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। ऐसे में लंबे समय तक टैरिफ जारी रहने से दोनों देशों के कारोबार और उपभोक्ता कीमतों पर असर पड़ सकता है।
व्यापार के अलावा इन मुद्दों पर भी तनाव
अमेरिका-कनाडा संबंधों में विवाद सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सीमा सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे भी तनाव का कारण रहे हैं।
कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने की ट्रम्प की बात
डोनाल्ड ट्रम्प कई मौकों पर कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का तर्क रहा है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को भारी आर्थिक लाभ देता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाए, तो दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन और टैरिफ से जुड़े कई विवाद खत्म हो सकते हैं।
कनाडा ने इस विचार को स्वीकार नहीं किया है और कनाडाई नेतृत्व ने देश की संप्रभुता पर जोर दिया है।
ट्रूडो को ‘गवर्नर’ कहने पर विवाद
ट्रम्प ने कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को कई बार तंज के तौर पर ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडा में इस टिप्पणी को देश की संप्रभुता के प्रति अपमानजनक माना गया था।
सीमा सुरक्षा और फेंटानिल का मुद्दा
अमेरिका और कनाडा के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर भी मतभेद हैं। ट्रम्प प्रशासन कनाडा की सीमा से अवैध प्रवासियों की आवाजाही और फेंटानिल जैसी खतरनाक नशीली दवाओं की तस्करी को लेकर चिंता जताता रहा है।
अमेरिका ने कनाडा से सीमा निगरानी मजबूत करने और अवैध प्रवास तथा नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
अमेरिका और कनाडा के बीच मौजूदा विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश गहरे आर्थिक और कारोबारी संबंध साझा करते हैं। टैरिफ, बाजार पहुंच और सीमा सुरक्षा को लेकर बढ़ते मतभेद आने वाले समय में दोनों देशों के राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।









