उत्तराखंड में मानसून की बारिश ने एक बार फिर जनजीवन प्रभावित कर दिया है। देहरादून समेत चार जिलों में बारिश का दौर जारी है, जबकि कई नदियों का जलस्तर बढ़कर चेतावनी स्तर के ऊपर पहुंच गया है। राज्य में बारिश, भूस्खलन और मलबा आने के कारण बड़ी संख्या में सड़कें प्रभावित हुई हैं। कई मार्गों पर यातायात रोकना पड़ा है। हालात को देखते हुए देहरादून में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।
मौसम विभाग के ताजा अलर्ट के मुताबिक देहरादून में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली और बारिश के बेहद तेज दौर की संभावना जताई गई है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने 18 अगस्त को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, निजी और गैर-सरकारी स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने इसे आपदा जोखिम को देखते हुए एहतियाती कदम बताया है।
देहरादून में बारिश के साथ नदी के जलस्तर को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर सामान्य से ऊपर चल रहा है और चेतावनी स्तर पार कर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे गंगा 339.65 मीटर पर बह रही थी, जो चेतावनी स्तर 339.50 मीटर से 15 सेंटीमीटर ऊपर है। हालांकि यह खतरे के स्तर 340.50 मीटर से नीचे है, लेकिन जलस्तर में बढ़ोतरी का रुख प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बारिश का असर केवल देहरादून तक सीमित नहीं है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से नदियों और गदेरों में पानी बढ़ रहा है। पहले भी भारी बारिश के दौरान हरिद्वार में गंगा चेतावनी निशान के ऊपर पहुंच चुकी है और रुद्रप्रयाग, चमोली तथा पिथौरागढ़ में कई नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब दर्ज किया गया था। सरयू और गोरी नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी की सूचना सामने आई थी।
बारिश के कारण सबसे बड़ी परेशानी सड़क यातायात को लेकर है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भूस्खलन और पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण सड़कें बंद हो रही हैं। इससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित होने के साथ-साथ यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई संवेदनशील मार्गों पर प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मलबा हटाने में जुटी रहती हैं।
पहाड़ी जिलों में सड़क बंद होने का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरी सामान, दूध, सब्जियां और दवाइयों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वहीं मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और स्कूली बच्चों तथा कर्मचारियों के आवागमन में भी परेशानी बढ़ जाती है।
लगातार बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। पहाड़ी ढलानों से अचानक पत्थर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों और यात्रियों से संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। नदी-नालों के किनारे जाने और तेज बहाव वाले पानी को पार करने से भी बचने को कहा गया है।
देहरादून में स्कूल बंद करने का फैसला भी इसी मौसम की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है। जिला प्रशासन ने मौसम विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन से मिले इनपुट के आधार पर यह निर्णय लिया। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए लोगों से घरों में सुरक्षित रहने की अपील की गई है। विशेष रूप से खुले मैदान, नदी किनारे और पहाड़ी ढलानों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम की स्थिति बिगड़ने पर स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को गंभीरता से लेने को कहा गया है।
उत्तराखंड में बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की समस्या पहले भी सामने आती रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में हुई तेज बारिश का पानी कुछ समय बाद मैदानी क्षेत्रों की नदियों में पहुंचता है। इस वजह से नदी किनारे बसे इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर होने के कारण नदी किनारे के इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। त्रिवेणी घाट और आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी बढ़ने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।
बारिश के कारण पर्यटन और धार्मिक यात्राओं पर भी असर पड़ सकता है। उत्तराखंड में इस समय बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु अलग-अलग पर्वतीय और धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं। सड़कें बंद होने या भूस्खलन की स्थिति में यात्रियों को रास्ते में फंसने का खतरा रहता है। इसलिए प्रशासन मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दे रहा है।
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। 16 अगस्त को जारी पूर्वानुमान में देहरादून समेत पांच जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था, जबकि बाकी जिलों के लिए येलो अलर्ट बताया गया था। विभाग ने भारी बारिश के साथ भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी थी।
प्रशासन के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ भारी बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखनी है, वहीं दूसरी तरफ बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलना भी जरूरी है। संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया जाता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण कई जगह दोबारा मलबा आने से सड़क खोलने में समय लग सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। छोटे नाले और गदेरे अचानक उफान पर आ सकते हैं। कई बार सामान्य दिखाई देने वाला पानी कुछ ही मिनटों में तेज बहाव में बदल जाता है। ऐसे में बच्चों को नदी, नाले और जलभराव वाले इलाकों से दूर रखना जरूरी है।
बिजली गिरने की आशंका वाले मौसम में भी लोगों को सावधानी बरतनी होगी। खुले स्थानों पर खड़े होने से बचने और मौसम खराब होने पर सुरक्षित भवन में जाने की सलाह दी जाती है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने की अपील की है।
बारिश के कारण शहरों में जलभराव की समस्या भी बढ़ सकती है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन को नालियों और जल निकासी व्यवस्था पर भी नजर रखनी पड़ रही है।
राज्य में लगातार बारिश के कारण आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस, एसडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू टीमों को तुरंत सक्रिय करने की तैयारी रखी जा रही है।
फिलहाल लोगों के लिए सबसे जरूरी सावधानी यही है कि मौसम साफ दिखाई देने पर भी पहाड़ी क्षेत्रों में जोखिम न लें। बारिश के बाद सड़क पर अचानक मलबा आने या चट्टान गिरने का खतरा बना रह सकता है। इसी तरह नदी का जलस्तर कम दिखाई देने पर भी उसके किनारे जाने से बचना चाहिए।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में भारी बारिश ने एक बार फिर जनजीवन को प्रभावित किया है। देहरादून समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी है, नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर के ऊपर पहुंच रहा है और सड़कें बंद होने से आवाजाही प्रभावित हुई है। देहरादून में भारी बारिश के खतरे को देखते हुए 18 अगस्त को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें अलर्ट पर हैं, जबकि लोगों से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।












