उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन के दिन बुधवार को उत्तराखंड किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर देहरादून कूच किया। मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का कार्यक्रम रखा गया है। इसके लिए रुड़की से करीब दो हजार किसानों को देहरादून ले जाने की तैयारी की गई और किसानों का वाहनों का काफिला अब्दुल कलाम चौक से रवाना हुआ। किसान संगठन का कहना है कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरना दिया जा रहा है, लेकिन बातचीत के बावजूद अभी तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड किसान मोर्चा के कार्यकर्ता बुधवार को रुड़की के अब्दुल कलाम चौक पर एकत्र हुए। यहां से किसानों ने जुलूस के रूप में देहरादून की ओर प्रस्थान किया। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड ने बताया कि करीब दो हजार किसानों को देहरादून ले जाने की तैयारी की गई है। इसके लिए बड़ी संख्या में वाहनों का इंतजाम किया गया और किसानों को काफिले के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर ले जाने की योजना बनाई गई।
किसान मोर्चा की ओर से मुख्यमंत्री आवास के घेराव का यह कार्यक्रम अचानक नहीं बनाया गया है। संगठन का कहना है कि उसकी ओर से 19 अगस्त से रुड़की कचहरी में धरना दिया जा रहा है। किसानों की कई मांगें हैं, जिनमें इकबालपुर चीनी मिल से किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी शामिल है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और तहसीलों में किसानों के कथित उत्पीड़न को रोकने जैसी मांगें भी संगठन की ओर से उठाई जा रही हैं।
किसान संगठन का कहना है कि पिछले कई दिनों से धरना चलने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार प्रशासन के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है। बातचीत के दौरान किसानों की समस्याओं और मांगों को अधिकारियों के सामने रखा गया, लेकिन संगठन के मुताबिक अभी तक ऐसा कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ जिससे आंदोलन समाप्त किया जा सके। इसी वजह से किसानों ने अब रुड़की से देहरादून कूच करने का निर्णय लिया है।
इकबालपुर चीनी मिल से जुड़े बकाया भुगतान का मुद्दा किसानों के आंदोलन में प्रमुखता से उठाया जा रहा है। गन्ना किसानों के लिए चीनी मिल से समय पर भुगतान महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि खेती की लागत, मजदूरी, खाद-बीज और अगली फसल की तैयारी जैसे खर्च इसी आय पर निर्भर करते हैं। किसान मोर्चा इसी भुगतान को लेकर सरकार और प्रशासन से समाधान की मांग कर रहा है। हालांकि, बकाया राशि की सटीक रकम और उसके भुगतान की समयसीमा के संबंध में उपलब्ध रिपोर्ट में विस्तृत आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
किसानों की दूसरी प्रमुख मांग स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया से जुड़ी है। किसान मोर्चा चाहता है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। संगठन की ओर से इस मुद्दे को लेकर भी सरकार के सामने अपनी आपत्ति रखी गई है। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं पर स्पष्ट निर्णय होने तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर संगठन ने अपने आंदोलन में स्मार्ट मीटर का मुद्दा भी शामिल किया है।
तहसीलों में किसानों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा भी मोर्चा की मांगों में शामिल है। किसान संगठन का आरोप है कि तहसील स्तर पर किसानों को विभिन्न कामों के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। संगठन चाहता है कि किसानों की शिकायतों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाए और उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। इसी मुद्दे को लेकर भी मोर्चा की ओर से सरकार के सामने अपनी बात रखी जा रही है।
19 अगस्त से चल रहे धरने के बाद अब किसानों का देहरादून कूच आंदोलन का अगला चरण है। संगठन का कहना है कि जब स्थानीय स्तर पर बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकला तो अब सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जा रहा है। किसान मोर्चा ने बड़ी संख्या में किसानों को देहरादून ले जाने की तैयारी की है। करीब दो हजार किसानों के काफिले की बात संगठन की ओर से कही गई है।
बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जन्मदिन भी है। इसी दिन किसान मोर्चा ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम रखा है। मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर शुभकामनाओं और कार्यक्रमों का सिलसिला भी चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई केंद्रीय नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।
किसान मोर्चा के कार्यक्रम और मुख्यमंत्री के जन्मदिन का एक ही दिन पड़ना राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है, हालांकि किसान संगठन की ओर से कार्यक्रम का आधार उसकी लंबित मांगें और 19 अगस्त से चल रहा धरना बताया गया है। संगठन का कहना है कि सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से देहरादून कूच किया जा रहा है।
रुड़की से देहरादून जाने वाले किसानों के काफिले को देखते हुए प्रशासन के सामने यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। बड़ी संख्या में किसानों और वाहनों के एक साथ देहरादून पहुंचने से रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस की ओर से यातायात व्यवस्था के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल इतना ही स्पष्ट है कि किसान संगठन ने बड़ी संख्या में किसानों को देहरादून ले जाने की तैयारी की है।
किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड ने कहा कि संगठन की ओर से प्रशासन के साथ कई बार वार्ता की गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। संगठन अब सरकार को अपनी मांगों पर निर्णय लेने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से देहरादून जा रहा है। उनके मुताबिक किसानों को अलग-अलग वाहनों के जरिए देहरादून ले जाने की व्यवस्था की गई है।
किसानों का यह आंदोलन उत्तराखंड में खेती से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ सामने ला रहा है। गन्ना भुगतान, बिजली से संबंधित स्मार्ट मीटर, तहसील स्तर की शिकायतें और प्रशासनिक व्यवहार जैसे विषय किसानों के लिए महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। संगठन की ओर से इन सभी मुद्दों को एक साथ रखकर सरकार से समाधान की मांग की जा रही है।
इकबालपुर चीनी मिल का मामला खास तौर पर किसानों की आय और भुगतान से जुड़ा है। गन्ना बेचने के बाद भुगतान में देरी होने पर किसानों के सामने नकदी की समस्या खड़ी हो सकती है। किसान संगठन का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को ठोस कदम उठाना चाहिए। दूसरी ओर स्मार्ट मीटर को लेकर भी संगठन ने अपनी असहमति जाहिर की है। दोनों मुद्दों को लेकर किसानों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
रुड़की कचहरी में धरना शुरू होने के बाद से किसान मोर्चा की गतिविधियां लगातार जारी हैं। संगठन के अनुसार कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई ऐसा समाधान सामने नहीं आया जिसे स्वीकार करके आंदोलन खत्म किया जा सके। इसी वजह से अब धरने को देहरादून कूच और मुख्यमंत्री आवास घेराव के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
देहरादून पहुंचने के बाद किसान किस स्थान पर प्रदर्शन करेंगे और प्रशासन की ओर से उन्हें किस तरह की अनुमति या व्यवस्था दी जाएगी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। संगठन ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की है। ऐसे में आगे की स्थिति प्रशासन और किसान नेताओं के बीच होने वाली बातचीत पर भी निर्भर कर सकती है।
इस बीच मुख्यमंत्री धामी के जन्मदिन पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से उन्हें शुभकामनाएं दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी पत्र भेजकर मुख्यमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की है। केंद्रीय मंत्रियों, विधायकों और अन्य नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री की शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए प्रधानमंत्री के सहयोग और मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर सरकारी और राजनीतिक स्तर पर कार्यक्रम हो रहे हैं, उसी दिन किसान मोर्चा का आंदोलन भी राज्य की राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बन गया है।
किसान मोर्चा की ओर से कहा गया है कि उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। संगठन ने साफ किया है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलने की स्थिति में आंदोलन के अगले चरण को लेकर निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल किसानों का काफिला रुड़की से देहरादून के लिए रवाना हो चुका है और संगठन मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी में है।
अब पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकार और किसान संगठन के बीच आगे किस स्तर पर बातचीत होती है और किसानों की ओर से उठाई गई मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल उत्तराखंड किसान मोर्चा की ओर से करीब दो हजार किसानों के साथ देहरादून कूच किया गया है। संगठन का धरना 19 अगस्त से चल रहा है और अब मुख्यमंत्री आवास घेराव के जरिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।










