देहरादून: उत्तराखंड में हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन करने के साथ थानों में तहरीर देने का अभियान शुरू किया। देहरादून में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल पुलिस मुख्यालय के बाहर उपवास पर बैठने की तैयारी में हैं। कांग्रेस का आरोप है कि जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण कराया जाना दलित समाज और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान है।
मामला 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण यज्ञ से जुड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि खड़गे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर शुद्धिकरण की प्रक्रिया कराई गई। पार्टी ने इसे जातिगत भेदभाव और दलित विरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए भाजपा से जवाब मांगा है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने शुद्धिकरण को खड़गे से जोड़ने से इनकार करते हुए कहा था कि सभा के दौरान आपत्तिजनक नारे और गंदगी फैलने के कारण मैदान का शुद्धिकरण कराया गया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद कांग्रेस का विरोध और तेज हो गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किसी कार्यक्रम स्थल की सफाई या धार्मिक अनुष्ठान सामान्य प्रक्रिया के तहत हुआ था तो उसके पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि जिस तरह से इस घटना को उचित ठहराने का प्रयास किया गया, उससे सामाजिक स्तर पर गलत संदेश गया है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार भाजपा नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
शनिवार को भी देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के यमुना कॉलोनी स्थित आवास का घेराव करने का प्रयास किया था। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने उत्तराखंड कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
कांग्रेस अब इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी की ओर से अलग-अलग थानों में तहरीर देकर कथित शुद्धिकरण मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। सोमवार को देवप्रयाग थाने में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहरीर दी और घटना को सामाजिक एकता तथा संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए जांच की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि कार्यक्रम स्थल पर शुद्धिकरण किसके निर्देश पर कराया गया। पार्टी यह भी मांग कर रही है कि यदि जांच में किसी तरह का जातिगत भेदभाव या आपत्तिजनक आचरण सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसी क्रम में कांग्रेस ने प्रदेश के छह जिलों में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करने के साथ संबंधित पुलिस थानों में तहरीर देंगे। कांग्रेस का उद्देश्य इस मामले को प्रदेशभर में उठाना और सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाना है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा केवल कांग्रेस का नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है।
देहरादून में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रस्तावित उपवास को भी इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल ने कहा है कि वह पुलिस मुख्यालय के बाहर उपवास करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि जब तक मामले में कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
विवाद के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। राष्ट्रीय स्तर पर मामला उठने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में यह विवाद और बड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे सामाजिक बराबरी और दलित सम्मान से जोड़कर भाजपा को घेर रही है, जबकि भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की बात कही जा रही है।
भाजपा का पक्ष है कि रामलीला मैदान में कांग्रेस की जनसभा के दौरान आपत्तिजनक नारे लगाए गए और कार्यक्रम के बाद वहां गंदगी फैल गई थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा था कि इसी कारण मैदान का शुद्धिकरण कराया गया और इसका किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति से संबंध नहीं है। उनके इसी बयान को कांग्रेस ने आपत्तिजनक बताते हुए विरोध तेज कर दिया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी शुद्धिकरण और उसे उचित ठहराने को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने मामले की जांच और अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस विवाद ने उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। पिछले कुछ दिनों से दोनों दलों के नेता लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव का मामला बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी के साथ अब सड़क पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का दौर भी शुरू हो गया है।
कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पुलिस को भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग करनी पड़ रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आवास की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी की स्थिति बनी थी। कुछ कार्यकर्ताओं के बैरिकेडिंग पर चढ़ने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस घटना के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस अब थानों में तहरीर देकर इस मामले को कानूनी प्रक्रिया में ले जाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से मामले का समाधान नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति या संगठन ने जानबूझकर ऐसा कृत्य किया है तो उसकी जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा के लिए भी यह विवाद असहज स्थिति पैदा कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान अब कांग्रेस के आंदोलन का प्रमुख आधार बन गया है। कांग्रेस लगातार उनके बयान को लेकर सवाल उठा रही है और उनके खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग कर रही है। भाजपा की ओर से अब तक इस मामले में यही कहा गया है कि शुद्धिकरण को खड़गे की जाति से जोड़ना सही नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने एक सितंबर को सचिवालय घेराव का भी ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा से जुड़े लोगों ने कांग्रेस नेताओं और अनुसूचित जाति समाज का अपमान किया है और मामले में कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आंदोलन के विस्तार के साथ पुलिस प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ सकती है। कांग्रेस यदि अलग-अलग जिलों में थानों और सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करती है तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है। देहरादून में पुलिस मुख्यालय के बाहर उपवास और आगे सचिवालय घेराव की घोषणा से आने वाले दिनों में राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस का कहना है कि वह इस मामले को तब तक नहीं छोड़ेगी जब तक कथित शुद्धिकरण की घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। पार्टी नेताओं के अनुसार, किसी भी नागरिक के साथ जाति के आधार पर भेदभाव संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। इसलिए इस घटना को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष जारी रहेगा।
इस विवाद का असर उत्तराखंड की राजनीति पर आने वाले दिनों में और दिखाई दे सकता है। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा अपने बचाव में शुद्धिकरण की वजह को कार्यक्रम स्थल की स्थिति और कथित आपत्तिजनक नारों से जोड़ रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक तथ्य सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से छह जिलों में प्रदर्शन और थानों में तहरीर देने का अभियान चलाया जा रहा है। देहरादून में पुलिस मुख्यालय के बाहर उपवास के जरिए भी पार्टी अपना विरोध दर्ज कराने वाली है। इसके बाद एक सितंबर को सचिवालय घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस तरह हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ शुद्धिकरण विवाद अब पूरे उत्तराखंड में राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, कांग्रेस के आंदोलन और भाजपा की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।










