देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और पहाड़ से लेकर मैदान तक बारिश का दौर जारी है। ऊधम सिंह नगर समेत राज्य के सात जिलों में बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश का असर नदी-नालों के जलस्तर और पहाड़ी सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंचने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। वहीं पिथौरागढ़ जिले में बारिश के दौरान हुए भूस्खलन से कई मार्ग बाधित हुए हैं और 23 सड़कों पर आवाजाही प्रभावित बताई जा रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण जगह-जगह मलबा और पत्थर सड़कों पर आने की स्थिति बनी हुई है। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है और कई इलाकों में लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
पिथौरागढ़ में स्थिति खास तौर पर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा सड़क पर आ गया। इसके चलते जिले की 23 सड़कें बंद हो गईं। सड़कें बंद होने से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का संपर्क प्रभावित हुआ है। जरूरी सामान की आवाजाही और स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी जिले में मानसून के दौरान भूस्खलन कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन लगातार बारिश होने पर इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी कमजोर होने के बाद अचानक मलबा सड़क पर आ सकता है। कई बार सड़क खुलने के कुछ समय बाद ही दोबारा मलबा आने से यातायात बाधित हो जाता है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। मशीनों की मदद से सड़कों से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। हालांकि, भारी बारिश जारी रहने पर सड़क खोलने का काम चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में यात्रियों को बिना जरूरी जानकारी के संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।
इधर अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रुद्रप्रयाग क्षेत्र में पहले भी लगातार बारिश के दौरान दोनों नदियों के जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किए जा चुके हैं। एक हालिया रिपोर्ट में अलकनंदा का जलस्तर 626.80 मीटर और मंदाकिनी का 625.50 मीटर दर्ज किया गया था, जबकि संबंधित चेतावनी स्तर क्रमशः 626 और 625 मीटर बताया गया था। दोनों नदियां उस समय खतरे के निशान से नीचे थीं।
नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है। स्थानीय निकायों की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से नदी तटों से दूर रहने की अपील की जाती है। बारिश के दौरान नदियों और बरसाती गदेरों में अचानक पानी बढ़ने का खतरा रहता है, इसलिए लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा जा रहा है।
उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। ऊधम सिंह नगर समेत कई जिलों में बारिश होने से तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि, लगातार बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है।
बारिश का असर सड़कों के साथ-साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। पहाड़ों में भूस्खलन के कारण बिजली की लाइनें और पाइपलाइन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखने की जरूरत होती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच प्रशासन ने लोगों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की है। खासकर पहाड़ी इलाकों में रात के समय सफर करने से बचने की सलाह दी जा रही है। बारिश के दौरान पहाड़ों से पत्थर गिरने और अचानक सड़क पर मलबा आने का खतरा बढ़ जाता है।
चारधाम और अन्य पहाड़ी मार्गों पर भी बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरती जा रही है। तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी जाती है। सड़क बंद होने की स्थिति में जबरन आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रुकना ज्यादा उचित है।
पिथौरागढ़ में बंद हुई 23 सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभाग की टीमें काम कर रही हैं। मार्गों पर जमा मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क खुलने के बाद भी प्रशासन की ओर से मार्ग की स्थिति पर निगरानी बनाए रखना जरूरी होगा, क्योंकि बारिश दोबारा होने पर भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है।
उत्तराखंड में बारिश के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ों में सड़क संपर्क बनाए रखना होती है। कई गांव मुख्य सड़कों से जुड़े हुए हैं और सड़क बंद होने पर लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त रास्ता तय करना पड़ सकता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, स्कूली बच्चों और कर्मचारियों के आने-जाने तथा जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब सड़क कई दिनों तक बंद रहती है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी सेवाओं को बहाल रखना प्राथमिकता बन जाता है। संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से मशीनरी और राहत दल तैनात रखने से सड़कें जल्दी खोली जा सकती हैं।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी नालों और छोटे नदी-नालों में भी अचानक पानी बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे स्थानों पर स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। बरसाती नालों को पार करने की कोशिश करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
प्रशासन की ओर से नदी किनारे और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम से संपर्क करने की अपील की जा रही है।
उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से मौसम लगातार बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी बादलों के बीच हल्की बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। पहाड़ों में बारिश का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों की नदियों और जलस्रोतों पर भी पड़ता है। इसलिए अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
बारिश के कारण सड़कें बंद होने का असर पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में होटल, टैक्सी और छोटे कारोबार बड़ी संख्या में यात्रियों पर निर्भर रहते हैं। मार्ग बाधित होने से पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, बारिश के बाद उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता भी बढ़ जाती है, लेकिन मानसून के दौरान यही मौसम जोखिम भी पैदा करता है। पहाड़ों की कमजोर ढलानों पर भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं। इसलिए मौसम साफ दिखाई देने पर भी यात्रियों को संवेदनशील क्षेत्रों में सावधानी बरतनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन का फोकस बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने, नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखने और संवेदनशील इलाकों में लोगों को अलर्ट करने पर है। पिथौरागढ़ में 23 सड़कों के बंद होने से स्थानीय स्तर पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जबकि अलकनंदा और मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर के कारण नदी किनारे के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
मौसम विभाग की ओर से बारिश का दौर जारी रहने की संभावना के बीच लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए। यदि किसी मार्ग पर भूस्खलन या मलबा आने की सूचना हो तो उस रास्ते पर जाने से बचना बेहतर है।
उत्तराखंड में बारिश ने एक बार फिर पहाड़ से मैदान तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऊधम सिंह नगर समेत सात जिलों में बारिश के बीच अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां चेतावनी स्तर के करीब पहुंच रही हैं। पिथौरागढ़ में भूस्खलन से 23 सड़कें बंद होने से यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन की टीमें सड़कें खोलने में जुटी हैं और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। लगातार बारिश के बीच अगले कुछ दिनों तक भूस्खलन, जलभराव और नदी का जलस्तर बढ़ने जैसी स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।











