उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने एंसिलरी सर्विसेज विनियम-2026 का मसौदा जारी किया है। इसके लागू होने पर राज्य में रिजर्व बिजली बाजार विकसित होगा, जिससे ग्रिड संतुलन, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
देहरादून: उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने पहली बार एंसिलरी सर्विसेज विनियम-2026 का मसौदा जारी किया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद राज्य में रिजर्व बिजली बाजार विकसित होगा, जिससे बिजली ग्रिड को अधिक स्थिर बनाने और आपातकालीन परिस्थितियों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड में पहली बार तैयार होगा रिजर्व बिजली बाजार
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली क्षेत्र में नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। आयोग ने एंसिलरी सर्विसेज (सहायक सेवाएं) विनियम-2026 का ड्राफ्ट जारी करते हुए विभिन्न हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इस मसौदे पर 3 जुलाई तक राय दी जा सकती है।

विनियम लागू होने के बाद बैटरी स्टोरेज सिस्टम, अतिरिक्त उत्पादन क्षमता वाले बिजलीघर, पंप स्टोरेज परियोजनाएं और बड़े बिजली उपभोक्ता ग्रिड संतुलन सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। इसके बदले उन्हें आर्थिक भुगतान भी मिलेगा। इससे बिजली क्षेत्र में एक नया बाजार विकसित होने की संभावना है।
क्यों महसूस हुई नई व्यवस्था की जरूरत?
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड में सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हालांकि इन स्रोतों से होने वाला बिजली उत्पादन मौसम और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जिससे उत्पादन में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
ऐसी स्थिति में बिजली ग्रिड को स्थिर बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मांग और आपूर्ति में अचानक अंतर आने पर बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बिजली संसाधनों को तुरंत सक्रिय किया जा सके।
क्या बदलेगा नई प्रणाली में?
अभी तक बिजली क्षेत्र में मुख्य रूप से उत्पादन, खरीद और खपत पर ध्यान दिया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रिड को स्थिर बनाए रखने वाली सेवाओं का भी अलग आर्थिक मूल्य तय होगा।
यदि किसी समय बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, उत्पादन कम हो जाता है या ट्रांसमिशन नेटवर्क पर दबाव बढ़ता है, तो रिजर्व क्षमता का उपयोग करके स्थिति को संभाला जा सकेगा। इससे बिजली कटौती और ग्रिड अस्थिरता जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलेगी।
क्या होता है रिजर्व बिजली बाजार?
रिजर्व बिजली बाजार वह व्यवस्था है जिसमें बिजली प्रणाली को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार रखी जाती है। सामान्य परिस्थितियों में बिजली की खरीद-बिक्री अनुबंधों और ऊर्जा एक्सचेंजों के माध्यम से होती है, लेकिन आपात स्थिति में रिजर्व संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।
बैटरी स्टोरेज, अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता और मांग कम करने वाले बड़े उपभोक्ता इस प्रणाली का हिस्सा बन सकते हैं। जब मांग और आपूर्ति के बीच अचानक अंतर पैदा होता है, तब यही संसाधन ग्रिड को स्थिर बनाए रखने में मदद करते हैं।
50 हर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बनाए रखना होगा मुख्य लक्ष्य
नए विनियम का प्रमुख उद्देश्य बिजली ग्रिड की आवृत्ति को 50 हर्ट्ज के आसपास बनाए रखना है। बिजली ग्रिड की फ्रीक्वेंसी में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होने पर पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और बड़े स्तर पर बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
प्रस्तावित नियमों के तहत किसी भी असंतुलन की स्थिति में अतिरिक्त संसाधनों को कुछ सेकंड या मिनटों के भीतर सक्रिय किया जा सकेगा। इससे अचानक बढ़ी बिजली मांग को पूरा करने और ग्रिड को स्थिर रखने में सहायता मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र को मिलेंगे नए अवसर
नई व्यवस्था से पंप स्टोरेज परियोजनाओं, बैटरी स्टोरेज सिस्टम और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता रखने वाले बिजलीघरों को आय का नया स्रोत मिलेगा। साथ ही बिजली व्यवस्था अधिक भरोसेमंद और लचीली बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एंसिलरी सर्विसेज विनियम-2026 उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है। इससे न केवल बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग को भी प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा।











