उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। लंबे समय तक चले सत्यापन, दावे-आपत्तियों और नामों की जांच की प्रक्रिया के बाद अब राज्य की नई अंतिम निर्वाचक नामावली सामने आ गई है। जारी जानकारी के मुताबिक अंतिम सूची में करीब 71.59 लाख मतदाता शामिल हैं। SIR के दौरान मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर सत्यापन और संशोधन किया गया, जिसके बाद मतदाताओं की संख्या में बदलाव देखने को मिला है।
उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया की शुरुआत इस साल जून में हुई थी। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO को घर-घर जाकर मतदाताओं के गणना फॉर्म उपलब्ध कराने और उनके विवरण का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक अद्यतन बनाने के साथ मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना था। राज्य में इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की गई।
SIR के पहले चरण के बाद 14 जुलाई 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई थी। उस समय उत्तराखंड की प्रारूप मतदाता सूची में 71,33,785 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए थे। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करने तथा किसी तरह की गलती होने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया था।
ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के समय चुनाव अधिकारियों ने बताया था कि करीब 19 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म में अलग-अलग तरह की विसंगतियां सामने आई थीं। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी करने और सुनवाई के माध्यम से रिकॉर्ड का सत्यापन करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसका उद्देश्य किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने से रोकना और मतदाता सूची में मौजूद रिकॉर्ड को सही करना था।
SIR के दौरान केवल नामों की जांच ही नहीं की गई, बल्कि मतदाताओं के पते, उम्र और अन्य संबंधित विवरणों को भी सत्यापित किया गया। बूथ स्तर पर उपलब्ध जानकारी का पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मिलान किया गया। जहां रिकॉर्ड में अंतर पाया गया, वहां संबंधित प्रक्रिया के तहत दस्तावेज और दावे-आपत्तियां देखी गईं। इस पूरी कवायद के बाद अंतिम सूची तैयार की गई है।
शुरुआत में उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी। बाद में दावे और आपत्तियों के निस्तारण तथा अन्य प्रक्रियाओं के लिए समय बढ़ाया गया। चुनाव आयोग ने अंतिम प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 3 अक्टूबर कर दी थी। इसके बाद अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते हुए अंतिम मतदाता सूची जारी की।
SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों ने यह भी दिखाया कि मतदाता सूची में पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करने की जरूरत थी। जुलाई में जारी ड्राफ्ट सूची के मुताबिक पहले की सूची की तुलना में 8.26 लाख नाम कम हुए थे। हालांकि ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं थी और इसके बाद दावे, आपत्तियां तथा नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया जारी रही। इसलिए अंतिम आंकड़ा ड्राफ्ट सूची से अलग होना स्वाभाविक था।
अब अंतिम सूची में 71.59 लाख मतदाताओं का आंकड़ा सामने आया है। यानी ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद भी मतदाता सूची में विभिन्न स्तर पर बदलाव हुए। दावे-आपत्तियों की सुनवाई और पात्रता के सत्यापन के बाद जिन लोगों के नाम जोड़ने या विवरण सुधारने की प्रक्रिया पूरी हुई, उन्हें अंतिम रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इसी तरह सत्यापन के दौरान अपात्र पाए गए रिकॉर्ड को नियमों के तहत हटाया या संशोधित किया गया।
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद अब मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम अपने नाम और मतदान केंद्र की जानकारी की जांच करना है। चुनाव आयोग की मतदाता सेवा व्यवस्था के माध्यम से नागरिक अपने नाम की जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं। आयोग की वेबसाइट पर मतदाता सूची में नाम खोजने, आवेदन की स्थिति देखने और ई-ईपीआईसी डाउनलोड करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी SIR 2026 से संबंधित अलग व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। यहां SIR ड्राफ्ट रोल, अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं से संबंधित सूची तथा अन्य निर्वाचन संबंधी जानकारी उपलब्ध है। मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र और रिकॉर्ड के अनुसार जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अंतिम मतदाता सूची जारी होने के साथ ही उन लोगों के लिए भी स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिन्होंने SIR के दौरान अपने नाम या विवरण से संबंधित दावे-आपत्तियां दाखिल की थीं। जिन मामलों में दस्तावेज और सत्यापन के आधार पर दावा स्वीकार किया गया, उनमें आवश्यक बदलाव किए गए हैं। वहीं जिन मामलों में पात्रता साबित नहीं हो सकी या रिकॉर्ड में दूसरी तरह की समस्या सामने आई, उन पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों ने नियमानुसार निर्णय लिया।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मतदाता सूची एक स्थिर दस्तावेज नहीं है। पात्र नागरिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने, नाम या पते में संशोधन कराने अथवा अन्य जरूरी सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग के Voters' Services Portal पर नए मतदाता के पंजीकरण के लिए Form 6 सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध हैं।
उत्तराखंड में SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। प्रदेश में बड़ी संख्या में BLO को मतदाताओं के घर तक पहुंचकर गणना फॉर्म उपलब्ध कराने, प्राप्त फॉर्म को डिजिटाइज करने और रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया में लगाया गया था। शुरुआती चरण में राज्य के 79,60,762 मतदाताओं के लिए गणना फॉर्म वितरित किए जाने की जानकारी दी गई थी।
SIR की पूरी प्रक्रिया का एक प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना रहा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, सही मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है, क्योंकि इसी सूची के आधार पर पात्र नागरिक मतदान करते हैं। इसलिए किसी भी नाम को जोड़ने, हटाने या संशोधित करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन और सुनवाई की व्यवस्था रखी गई।
ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची के बीच हुए बदलाव यह बताते हैं कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मामलों को दोबारा जांचने के लिए किया गया। इससे उन मतदाताओं को भी अपना रिकॉर्ड ठीक कराने का अवसर मिला, जिनके विवरण में गलती थी या जिनका नाम किसी कारण से ड्राफ्ट सूची में नहीं था।
अंतिम सूची में 71.59 लाख मतदाताओं का शामिल होना उत्तराखंड की मौजूदा निर्वाचक तस्वीर को दर्शाता है। इसमें वे मतदाता शामिल हैं जिनकी पात्रता और विवरण SIR की निर्धारित प्रक्रिया के बाद अंतिम रूप से स्वीकार किए गए हैं। पुनरीक्षण के बाद करीब 1.29 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी का आंकड़ा भी इसी अंतिम प्रक्रिया से जुड़ा है।
अब मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे केवल यह मानकर न चलें कि उनका नाम सूची में मौजूद है, बल्कि आधिकारिक पोर्टल पर जाकर एक बार नाम की पुष्टि कर लें। खासकर जिन लोगों ने हाल के वर्षों में अपना घर बदला है, जिनके नाम या पते में संशोधन हुआ है, नए मतदाता बने हैं या जिन्होंने SIR के दौरान कोई दावा या आपत्ति दर्ज की थी, उन्हें अपना रिकॉर्ड जरूर देखना चाहिए।
उत्तराखंड में आगामी चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन प्रशासनिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। नई सूची के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों और मतदान केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा। देहरादून जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी मतदाता सूची में नाम खोजने और निर्वाचन संबंधी सेवाओं की सुविधा उपलब्ध है।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब राज्य में मतदाता सूची को लेकर लंबे समय से चल रहा SIR चरण पूरा हो गया है। अंतिम सूची के प्रकाशन के साथ ड्राफ्ट सूची से जुड़े दावे-आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया का एक बड़ा चरण समाप्त हो गया है। हालांकि पात्र नागरिकों के लिए निर्वाचन आयोग की सामान्य मतदाता पंजीकरण और संशोधन सेवाएं आगे भी उपलब्ध रहेंगी।