उत्तराखंड में लघु जलविद्युत परियोजनाओं ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान दिया है। फरवरी तक राज्य में 855.91 मिलियन यूनिट बिजली बनी, जिसमें छोटी जलविद्युत परियोजनाओं की अहम भूमिका रही।
Dehradun: उत्तराखंड में लघु जलविद्युत परियोजनाएं हरित ऊर्जा उत्पादन का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरी हैं। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक गैर-पारंपरिक स्रोतों से हुए कुल बिजली उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान छोटी जलविद्युत परियोजनाओं का रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के लिए यह ऊर्जा मॉडल पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
गैर-पारंपरिक ऊर्जा में सबसे बड़ा योगदान
केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी तक गैर-पारंपरिक स्रोतों से 855.91 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन किया। इसमें 323.95 मिलियन यूनिट बिजली केवल लघु जलविद्युत परियोजनाओं से तैयार हुई, जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जल आधारित ऊर्जा उत्पादन आज भी सबसे भरोसेमंद और प्रभावी विकल्प बना हुआ है।
पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में छोटी जलविद्युत परियोजनाओं को बड़े बांधों की तुलना में अधिक अनुकूल माना जाता है। इनमें बड़े जलाशयों की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे विस्थापन और पर्यावरणीय दबाव कम रहता है।
इन परियोजनाओं से दूरस्थ गांवों तक बिजली पहुंचाने में मदद मिल रही है। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार और पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा भी मिल रहा है।
मौसम और जलप्रवाह पर निर्भर उत्पादन
राज्य में लघु जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन मौसम और जलप्रवाह पर काफी हद तक निर्भर करता है। वर्ष 2020-21 में इन परियोजनाओं से रिकॉर्ड 821.88 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हुआ था। हालांकि बाद के वर्षों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में उत्पादन बढ़ता है, जबकि सर्दियों में जलस्तर घटने से बिजली उत्पादन प्रभावित होता है। सिल्ट जमा होना, रखरखाव और ट्रांसमिशन नेटवर्क की सीमाएं भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
कई परियोजनाएं लंबे समय से दे रहीं ऊर्जा सहारा
यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एके सिंह के अनुसार कुल्हाल, ढकरानी, पथरी, मोहम्मदपुर और निरगड्डू जैसी परियोजनाएं लंबे समय से राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग क्षेत्रों में संचालित कई छोटी परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रही हैं।









