उत्तराखंड में सितंबर के मध्य में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पहाड़ी जिलों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक कई जगह बारिश का दौर जारी है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी देखने को मिल रही है। पिथौरागढ़ में बर्फबारी और बारिश के बीच कई स्थानों पर सड़कें पानी से भर गई हैं। देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और अन्य जिलों में भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है। कई जगह सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। मौसम खराब होने का असर हेलीसेवा पर भी पड़ा है। पिथौरागढ़ से विमान और हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर भी हाल के दिनों में मौसम के कारण व्यवधान सामने आया है।
पिथौरागढ़ में मौसम का असर खास तौर पर पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। यहां बारिश के साथ बर्फबारी की स्थिति बनी हुई है। इससे तापमान में गिरावट के साथ लोगों को एक साथ बारिश और ठंड का सामना करना पड़ रहा है। जिले में पिछले दिनों भी लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर गरमपानी के पास पहाड़ी से मलबा और बोल्डर सड़क पर गिरने के बाद आवाजाही बाधित हुई थी। सीमा सड़क संगठन की टीम ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया था।
पिथौरागढ़ के लिए मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में भी 17 सितंबर को बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान में पिथौरागढ़ में 17 सितंबर को एक-दो दौर की बारिश या गरज के साथ बौछार होने की संभावना बताई गई है और आकाश आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहने का अनुमान है। इसके साथ ही गरज और बिजली चमकने की चेतावनी भी दर्ज की गई है। 18 सितंबर के बाद भी हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है।
उत्तराखंड के कई दूसरे जिलों में भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। देहरादून और उत्तरकाशी समेत पहाड़ी इलाकों में रुक-रुककर बारिश और बौछारें पड़ रही हैं। टिहरी और केदारघाटी में भी बारिश की गतिविधियां जारी हैं। चारधाम यात्रा से जुड़े मार्गों के लिए भी मौसम विभाग के ताजा अपडेट में कई सेक्टरों में हल्की बारिश और हल्की गरज के साथ बौछार की संभावना दर्ज की गई है। 17 सितंबर की सुबह के अपडेट में रुद्रप्रयाग से केदारनाथ, ऋषिकेश से टिहरी, टिहरी से उत्तरकाशी और हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना बताई गई थी।
बारिश के कारण सबसे ज्यादा परेशानी सड़कों पर देखने को मिल रही है। लगातार पानी गिरने से कई जगह सड़कें पानी से भर गई हैं। निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने से सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां बारिश के साथ पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने का खतरा भी बना रहता है। कई स्थानों पर सड़क किनारे जमा मलबा वाहनों की आवाजाही में बाधा पैदा कर सकता है। ऐसे में प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को संवेदनशील मार्गों पर लगातार निगरानी रखनी पड़ रही है।
पिथौरागढ़ में बारिश और भूस्खलन की समस्या पहले भी सामने आती रही है। कुछ दिन पहले जिले की तीन घाटियों का संपर्क एक पुल बह जाने के कारण प्रभावित हुआ था। यह पुल एक महीने के भीतर दूसरी बार क्षतिग्रस्त हुआ था। लगातार बारिश और तेज बहाव के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पुलों, सड़कों और संपर्क मार्गों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे हालात में स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही के साथ जरूरी सामान और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की खबर ने मौसम के बदलते स्वरूप को और स्पष्ट कर दिया है। सितंबर में बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ पड़ना पहाड़ों में मौसम के अलग-अलग रूप को दिखाता है। निचले क्षेत्रों में जहां लोग बारिश और जलभराव से परेशान हैं, वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ने लगी है। बर्फबारी और बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
देहरादून में भी बारिश का असर शहर और आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश होने पर सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात की रफ्तार प्रभावित होती है। शहरी क्षेत्रों में नालियों और जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। थोड़े समय में अधिक बारिश होने पर कई सड़कों पर पानी जमा हो जाता है और वाहन चालकों को परेशानी होती है। पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मार्गों पर भूस्खलन की स्थिति बनने पर देहरादून से दूसरे जिलों की ओर जाने वाली आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
उत्तरकाशी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में भी मौसम को लेकर सतर्कता जरूरी है। मौसम विभाग ने उत्तरकाशी समेत कई पहाड़ी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछार की संभावना जताई है। चारधाम यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों पर भी बारिश का असर पड़ सकता है। IMD के चारधाम सेक्टर अपडेट में उत्तरकाशी से गंगोत्री, उत्तरकाशी से बरकोट और बरकोट से यमुनोत्री के मार्गों पर बादल बनने और कुछ क्षेत्रों में बहुत हल्की से हल्की बारिश की संभावना बताई गई है।
केदारघाटी में भी मौसम की गतिविधियां यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर IMD के अपडेट में हल्की बारिश और हल्की गरज के साथ बौछार की संभावना दर्ज की गई है। पहाड़ी रास्तों पर बारिश होने के बाद सड़क फिसलन भरी हो सकती है। इसके अलावा लगातार बारिश के दौरान कहीं-कहीं पत्थर गिरने और मलबा आने का खतरा भी रहता है। इसलिए यात्रा और आवाजाही करने वालों को स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही आगे बढ़ने की जरूरत है।
मौसम खराब होने का असर हवाई और हेली सेवाओं पर भी पड़ता है। पिथौरागढ़ में दिल्ली और देहरादून के लिए विमान सेवा को 11 से 17 सितंबर तक स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई थी और इसे 18 सितंबर से फिर शुरू किए जाने की बात कही गई थी। हेलीकॉप्टर सेवाएं भी मौसम से प्रभावित रही हैं। पहाड़ों में कम दृश्यता, बारिश, बादल और तेज हवा के कारण उड़ान संचालन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
उत्तराखंड में इस समय मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे कमजोर होने की ओर बताई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद पहाड़ी जिलों में बारिश के दौर जारी हैं। मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 सितंबर को भी प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद 20 से 22 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां और कम होने की संभावना जताई गई है। मैदानी इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने का अनुमान है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले कुछ दिनों में बारिश पूरी तरह खत्म होने के बजाय इसकी तीव्रता और दायरा धीरे-धीरे कम हो सकता है। पहाड़ी जिलों में स्थानीय स्तर पर अचानक बारिश या गरज-बौछार की स्थिति फिर भी बन सकती है। इसलिए सड़क और यात्रा से जुड़े विभागों के सामने चुनौती बनी रहेगी कि संवेदनशील मार्गों पर अचानक होने वाली बारिश और भूस्खलन जैसी घटनाओं से निपटने के लिए मशीनरी और कर्मचारी तैयार रखें।
पिथौरागढ़ में आदि कैलाश मार्ग पर हालिया भूस्खलन की घटना भी इसी जोखिम को दिखाती है। गरमपानी के पास पहाड़ी का मलबा और बोल्डर सड़क पर आने से वाहनों की आवाजाही बाधित हुई थी। BRO की टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क साफ करने का काम किया था। इससे पहले दोबाट के पास भी पहाड़ी दरकने से मार्ग प्रभावित हुआ था। लगातार बारिश के दौरान ऐसे स्थानों पर दोबारा मलबा आने की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बारिश और बर्फबारी के इस दौर में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और यात्रियों के लिए भी सावधानी जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कुछ ही समय में बदल सकता है। जहां एक स्थान पर हल्की बारिश हो रही हो, वहीं कुछ दूरी पर तेज बारिश या भूस्खलन की स्थिति बन सकती है। इसलिए किसी भी संवेदनशील मार्ग पर निकलने से पहले सड़क की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सूचना देखना जरूरी है।
चारधाम और अन्य धार्मिक यात्राओं के लिए निकलने वाले लोगों के लिए मौसम की जानकारी विशेष महत्व रखती है। IMD की ओर से जारी सेक्टर-वार अपडेट में कई मार्गों पर हल्की बारिश की संभावना बताई गई है। ऐसे में यात्रियों को बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रुकने, नदी-नालों के किनारे अनावश्यक रूप से न जाने और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में रुकने से बचने की सलाह दी जाती है।
फिलहाल उत्तराखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। पिथौरागढ़ में बर्फबारी और बारिश, देहरादून-उत्तरकाशी समेत कई जिलों में बौछारें, टिहरी और केदारघाटी में बारिश तथा पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन की आशंका ने प्रशासन और यात्रियों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार सप्ताहांत के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है और 25 सितंबर के बाद उत्तराखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की संभावना जताई गई है।
ऐसे में फिलहाल लोगों को मौसम के हर अपडेट पर नजर रखने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी जिलों में यात्रा करने वाले लोग बिना सड़क की स्थिति जाने जोखिम न लें। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर वाहन धीरे चलाना, भूस्खलन संभावित जगहों पर रुकने से बचना और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी का पालन करना जरूरी है। आने वाले दिनों में बारिश कम होने की संभावना है, लेकिन तब तक उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और सड़क की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।












