भारतीय नौसेना में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत वाइस एडमिरल A N Pramod ने शनिवार को डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का पदभार संभाल लिया। उन्होंने Tarun Sobti का स्थान लिया है, जो 31 जुलाई को 38 वर्षों से अधिक की गौरवपूर्ण सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना में शीर्ष स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव के तहत वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने नए डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती का स्थान लिया है, जो 31 जुलाई 2026 को 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद का नौसेना में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रहा है। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण समुद्री अभियानों, रणनीतिक ऑपरेशनों और नेतृत्व भूमिकाओं में योगदान दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव भारतीय नौसेना की भविष्य की परिचालन क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा रणनीतियों को और मजबूत करेगा।
नौसेना अकादमी से शुरू हुआ सैन्य सफर
भारतीय नौसेना द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, वाइस एडमिरल एएन प्रमोद भारतीय नौसेना अकादमी, गोवा के 38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्हें 1 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्रदान किया गया था। वह एक प्रशिक्षित सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर होने के साथ-साथ कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विशेषज्ञ भी हैं।
सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और गोवा के नेवल वॉर कॉलेज से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी पेशेवर विशेषज्ञता ने उन्हें नौसेना के विभिन्न परिचालन और रणनीतिक पदों पर सफलता के साथ काम करने में मदद की है।
ऑपरेशन विजय से ऑपरेशन स्नो लेपर्ड तक अहम योगदान
वाइस एडमिरल एएन प्रमोद का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों से जुड़ा रहा है। उन्होंने 1999 के ऑपरेशन विजय के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों का प्रमुख सैन्य अभियान था। इसके अलावा, 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी उन्होंने योगदान दिया।
बाद में गलवान घाटी की घटना के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान उन्होंने पश्चिमी बेड़े के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। इन अभियानों में उनकी भूमिका ने उन्हें एक अनुभवी और रणनीतिक सैन्य अधिकारी के रूप में स्थापित किया।

कई युद्धपोतों और नौसैनिक इकाइयों का किया नेतृत्व
अपने 36 वर्षों से अधिक लंबे करियर में वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने भारतीय नौसेना के कई प्रमुख युद्धपोतों और इकाइयों की कमान संभाली है। उन्होंने INS राजपूत में कार्यकारी अधिकारी के रूप में सेवा दी। इसके अलावा INS अभय, INS शार्दुल और INS सतपुड़ा के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई।
समुद्री संचालन और युद्धपोत प्रबंधन में उनके व्यापक अनुभव को भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है। समुद्री अभियानों के अलावा वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने तटीय और प्रशासनिक स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने अंडमान एवं निकोबार क्षेत्र में स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन INS उत्क्रोश की कमान संभाली। इसके अलावा नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया।
फ्लैग रैंक अधिकारी बनने के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (एयर) तथा महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान निभाई निर्णायक भूमिका
दिसंबर 2023 से जुलाई 2026 तक वाइस एडमिरल एएन प्रमोद महानिदेशक नौसेना संचालन (Director General Naval Operations - DGNO) के पद पर कार्यरत रहे। इस अवधि के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक योजना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक तैनाती से जुड़े अभियानों के संचालन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, जटिल सुरक्षा परिस्थितियों में उनकी नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक निर्णय भारतीय नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए. भारतीय नौसेना में उनके योगदान और उत्कृष्ट नेतृत्व को देखते हुए उन्हें कई सैन्य सम्मान प्रदान किए गए हैं। वर्ष 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया, जबकि वर्ष 2025 में उन्हें युद्ध सेवा मेडल (YSM) प्रदान किया गया।











