गया के विष्णुपद मंदिर स्थित देवघाट पर फल्गु नदी की भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार सरकार के कृषि एवं गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्री ने भगवान विष्णु और फल्गु नदी की पूजा-अर्चना की। करीब 40 मिनट तक चली महाआरती के दौरान विजय सिन्हा ने दीप प्रज्वलित करने के साथ डमरू भी बजाया। कार्यक्रम के दौरान घाट पर धार्मिक जयघोष सुनाई दिए और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
महाआरती में शामिल होने के बाद विजय सिन्हा ने मीडिया से बातचीत की और इस दौरान विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया दी। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े दीप जलाने के कार्यक्रम को लेकर बिहार सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि जब बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, तब सरकारी स्तर पर दूसरे कार्यक्रमों पर ध्यान दिया जा रहा है। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार तेजस्वी यादव ने बाढ़, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
इसी बयानबाजी के बीच विजय सिन्हा ने तेजस्वी यादव पर पलटवार किया। उन्होंने तेजस्वी यादव के बयानों को नकारात्मकता से जोड़ते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से लगातार इस तरह की बातें कही जा रही हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे बयानों के जरिए अपनी भड़ास निकाली जा रही है। यह विजय सिन्हा की ओर से दिया गया राजनीतिक जवाब है और इसे उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फल्गु महाआरती को लेकर विजय सिन्हा ने कहा कि गया जैसी धार्मिक और ऐतिहासिक धरती पर इस तरह के आयोजन से लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कार्यक्रम को सेवा, संकल्प और समर्पण से जुड़ा बताया। उनके मुताबिक 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा, संकल्प और समर्पण से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला चल रहा है। फल्गु नदी के तट पर आयोजित महाआरती भी इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल रही।
महाआरती के दौरान विजय सिन्हा का डमरू बजाना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने दीप जलाए और करीब 40 मिनट तक चली आरती में हिस्सा लिया। देवघाट का माहौल धार्मिक रंग में नजर आया। रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष भी सुनाई दिए।
कार्यक्रम को लेकर सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा इसके आयोजन पर होने वाले खर्च को लेकर हुई। तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े दीप जलाने के कार्यक्रम पर सवाल उठाए थे और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकारी खर्च का आरोप लगाया था। उन्होंने बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया। दूसरी तरफ विजय सिन्हा ने कहा कि फल्गु महाआरती सरकारी पैसे से नहीं हुई, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के स्वैच्छिक सहयोग से इसका आयोजन किया गया।
विजय सिन्हा ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर तंज भी किया। उन्होंने कहा, “एसी वाले क्या जानें जनता का उत्साह।” मंत्री का यह बयान कार्यक्रम में लोगों की भागीदारी और उत्साह के संदर्भ में था। इस तरह फल्गु महाआरती धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी का भी हिस्सा बन गई।
दरअसल, बिहार में इन दिनों बाढ़ को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं। तेजस्वी यादव ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीप कार्यक्रम को लेकर सरकार पर निशाना साधा। एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल किए। रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों के हवाले से बिहार में करीब 49.72 लाख लोगों के बाढ़ से प्रभावित होने और 15 जिलों में बाढ़ के असर की बात कही गई।
वहीं विजय सिन्हा का कहना है कि फल्गु महाआरती का आयोजन जनसहयोग से हुआ और इसे सरकारी खर्च से जोड़ना सही नहीं है। इस तरह दोनों नेताओं के बयानों में कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। आयोजन के खर्च से जुड़े वास्तविक तथ्यों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड या आधिकारिक दस्तावेज ही निर्णायक होंगे। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में विजय सिन्हा का पक्ष यह है कि कार्यक्रम के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने सहयोग दिया।
गया में फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर का धार्मिक महत्व लंबे समय से रहा है। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में फल्गु नदी के तट पर होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में स्थानीय प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन, सफाई, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। इसी वजह से विजय सिन्हा ने महाआरती के बाद आगामी पितृपक्ष मेले की तैयारियों की भी समीक्षा की।
मंत्री ने अधिकारियों को पितृपक्ष मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गया में पितृपक्ष मेला एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में प्रशासन के सामने साफ-सफाई, पेयजल, यातायात, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और घाटों पर व्यवस्थाओं को सुचारु रखने की चुनौती रहती है। विजय सिन्हा ने अधिकारियों के साथ इन तैयारियों को लेकर समीक्षा की।
विजय सिन्हा ने कांग्रेस के ‘राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस’ अभियान को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष के रोजगार से जुड़े अभियान पर निशाना साधा। हालांकि इस राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह भी स्पष्ट है कि रोजगार और बेरोजगारी बिहार की राजनीति में लगातार उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। अलग-अलग दल इन मुद्दों पर सरकार के कामकाज को लेकर अपने-अपने दावे और सवाल रखते रहे हैं।
फल्गु महाआरती के दौरान धार्मिक कार्यक्रम और राजनीतिक बयान दोनों एक साथ सामने आए। एक तरफ घाट पर पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन हुआ, वहीं दूसरी तरफ मंत्री ने मीडिया से बातचीत में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। यही वजह रही कि कार्यक्रम की चर्चा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही और राजनीतिक प्रतिक्रिया भी खबर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।
तेजस्वी यादव की ओर से उठाए गए सवालों का केंद्र बाढ़ के बीच सरकार की प्राथमिकताएं थीं। उनके बयान में बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानियों का मुद्दा उठाया गया। दूसरी ओर विजय सिन्हा ने आयोजन को जनसहयोग से जुड़ा बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सरकारी खर्च और निजी या राजनीतिक संगठन के सहयोग से हुए खर्च के दावे की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
गया के देवघाट पर आयोजित इस महाआरती का धार्मिक पक्ष भी महत्वपूर्ण रहा। भगवान विष्णु की पूजा और फल्गु नदी की आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंत्री ने स्वयं आरती में हिस्सा लिया और डमरू बजाया। कार्यक्रम में दीप प्रज्वलित किए गए और धार्मिक जयघोष के बीच आरती संपन्न हुई।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब बिहार में बाढ़ की स्थिति और सरकार की राहत व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर सरकार और उसके नेता राहत एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपने स्तर पर जवाब दे रहे हैं। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फल्गु महाआरती पर विजय सिन्हा की प्रतिक्रिया इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
विजय सिन्हा ने तेजस्वी यादव के बयानों पर जिस तरह पलटवार किया, उससे यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मंत्री ने तेजस्वी के बयान को नकारात्मकता से जोड़ते हुए उनकी आलोचना की, जबकि तेजस्वी यादव ने बाढ़ और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं। इन दोनों दावों और प्रतिक्रियाओं को अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के बयान के रूप में देखना जरूरी है।
गया में पितृपक्ष मेले की तैयारियां भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा हैं। फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन को व्यापक व्यवस्था करनी होती है। महाआरती के बाद विजय सिन्हा ने अधिकारियों से तैयारियों की जानकारी ली और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के निर्देश दिए।
इस बीच फल्गु नदी के तट पर हुए धार्मिक आयोजन ने गया की धार्मिक पहचान को भी सामने रखा। देवघाट पर आरती के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही। मंत्री के साथ स्थानीय लोग और श्रद्धालु भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन के दौरान पूजा-पाठ के साथ धार्मिक वातावरण बना रहा।
कुल मिलाकर गया के विष्णुपद मंदिर स्थित देवघाट पर हुई फल्गु महाआरती में कृषि मंत्री विजय सिन्हा की भागीदारी के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हुई। विजय सिन्हा ने कार्यक्रम को जनसहयोग से आयोजित बताते हुए सरकारी खर्च के आरोपों को खारिज किया और तेजस्वी यादव के बयानों पर पलटवार किया। वहीं तेजस्वी यादव ने बाढ़, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल किए हैं। इस राजनीतिक विवाद के बीच गया में आगामी पितृपक्ष मेले की तैयारियां भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।











