विजय दिवस पर बांग्लादेश ने किया विवादित बयान, भारत ने लिया कड़ा रुख

विजय दिवस पर बांग्लादेश ने किया विवादित बयान, भारत ने लिया कड़ा रुख

दिल्ली में बांग्लादेश दूतावास में विजय दिवस मनाया गया। इसी बीच भारत ने ढाका में भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा पर चिंता जताई और बांग्लादेश उच्चायुक्त को तलब किया। विवाद भारत विरोधी बयानों और कूटनीतिक तनाव से जुड़ा।

Bangladesh: भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के बीच उस समय हलचल तेज हो गई जब दिल्ली स्थित बांग्लादेश दूतावास में विजय दिवस का आयोजन चल रहा था और दूसरी ओर भारत सरकार ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह को तलब किया। यह कदम बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति से जुड़े कुछ भारत विरोधी बयानों के बाद उठाया गया, जिसने नई दिल्ली में असहजता पैदा कर दी।

दिल्ली में मनाया गया बांग्लादेश विजय दिवस

भारत की राजधानी दिल्ली में बांग्लादेश दूतावास परिसर में विजय दिवस को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बांग्लादेश की संस्कृति, विरासत और मुक्ति संग्राम की भावना को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक संगीत, नृत्य और ऐतिहासिक झलकियां शामिल रहीं। 

बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह ने अपने संबोधन में कहा कि बांग्लादेश अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने खास तौर पर युवा पीढ़ी का जिक्र करते हुए कहा कि देश की बड़ी युवा आबादी भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।

भारत बांग्लादेश रिश्तों पर उच्चायुक्त का संदेश

उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह ने अपने भाषण में भारत और बांग्लादेश के संबंधों को पारस्परिक रूप से लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध समृद्धि, शांति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर आधारित हैं। उनका कहना था कि बांग्लादेश मानता है कि भारत के साथ मजबूत रिश्ते दोनों देशों के साझा हित में हैं। उन्होंने परस्पर निर्भरता का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और बांग्लादेश की साझेदारी बेहद जरूरी है।

भारत विरोधी बयान बना विवाद की वजह

जहां एक ओर विजय दिवस के मंच से दोस्ती और सहयोग की बात की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश के राष्ट्रीय नागरिक दल के नेता हसनत अब्दुल्ला के बयानों ने विवाद खड़ा कर दिया। हसनत अब्दुल्ला ने कथित तौर पर भारत के खिलाफ कड़े बयान दिए, जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल थीं। उन्होंने भारत की सात बहनों को अलग-थलग करने और पूर्वोत्तर के अलगाववादी तत्वों को समर्थन देने जैसी बातें कही। इन बयानों को भारत ने गंभीर सुरक्षा चिंता के रूप में लिया।

विदेश मंत्रालय का सख्त रुख

इन बयानों के सामने आने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज़ हामिदुल्लाह को तलब किया। यह संदेश साफ था कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की बयानबाजी को हल्के में नहीं लेगा। विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक माध्यम से यह भी स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश से जिम्मेदाराना रवैये की अपेक्षा करता है।

युनूस सरकार पर बढ़ता दबाव

इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर भी दबाव बढ़ता नजर आया। भारत की इस सख्त कूटनीतिक कार्रवाई से यह संकेत मिला कि नई दिल्ली किसी भी तरह की गीदड़ भभकी या उकसावे को स्वीकार नहीं करेगी। माना जा रहा है कि भारत के रुख से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद युनूस भी असहज स्थिति में आ गए हैं। भारत के साथ रिश्ते बिगड़ने का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिति पर पड़ सकता है।

एस जयशंकर की कूटनीतिक पहल

इन सबके बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने विजय दिवस के अवसर पर बांग्लादेश को शुभकामनाएं दीं। एक आधिकारिक पोस्ट में उन्होंने विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन, अंतरिम सरकार और बांग्लादेश की जनता को बधाई दी। यह संदेश बताता है कि भारत एक ओर जहां सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश के साथ संवाद और सम्मान बनाए रखने का इच्छुक भी है।

मुक्ति युद्ध की वर्षगांठ पर विशेष आयोजन

बांग्लादेश की मुक्ति युद्ध की 54वीं वर्षगांठ के मौके पर दोनों देशों के बीच सैन्य और ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिला। बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, आठ वीर मुक्तिजोद्धा और बांग्लादेश सशस्त्र बलों के दो सेवारत अधिकारी 14 दिसंबर 2025 को कोलकाता पहुंचे। वे भारत में आयोजित विजय दिवस समारोह में शामिल हुए। इसी तरह भारत के आठ युद्ध अनुभवी और भारतीय सशस्त्र बलों के दो सेवारत अधिकारी 15 दिसंबर 2025 को ढाका पहुंचे, जहां उन्होंने बांग्लादेश के विजय दिवस समारोह में भाग लिया।

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