भागलपुर और खगड़िया समेत पूर्वी तथा उत्तरी बिहार के बीच आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु को लेकर एक बार फिर लोगों की परेशानी का मुद्दा सामने आया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर विक्रमशिला सेतु पर बने बेली ब्रिज को हटाने की प्रक्रिया को कम से कम दुर्गापूजा के बाद तक टालने का आग्रह किया है। सांसद ने अपनी मांग के पीछे आगामी त्योहारों, आम यात्रियों की आवाजाही, छोटे कारोबारियों की निर्भरता और गंगा के जलस्तर को प्रमुख वजह बताया है।
दरअसल, मौजूदा कार्ययोजना के मुताबिक 30 सितंबर की मध्यरात्रि से विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद करने की तैयारी है। इसके बाद 1 अक्टूबर से बेली ब्रिज को हटाने का काम शुरू किया जाना है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी BRO की विशेषज्ञ टीम को बेली ब्रिज हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। ताजा योजना के अनुसार चारों बेली ब्रिज को हटाने का काम लगभग एक सप्ताह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मूल पुल के स्ट्रक्चर की तकनीकी जांच की जाएगी और क्षतिग्रस्त हिस्सों के पुनर्स्थापन का काम आगे बढ़ेगा।
सांसद राजेश वर्मा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इसी समय-सारणी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि 30 सितंबर की रात से सेतु पर आवाजाही बंद हो जाती है और इसके तुरंत बाद बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू कर दिया जाता है, तो इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। खासकर यह परेशानी उस समय बढ़ सकती है, जब बिहार में दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े पर्वों का सिलसिला शुरू होने वाला है। इन त्योहारों के दौरान आसपास के जिलों के लोगों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है।
राजेश वर्मा के मुताबिक खगड़िया, कटिहार, कुरसेला और नवगछिया समेत कई इलाकों से बड़ी संख्या में लोग भागलपुर आते-जाते हैं। इनमें नौकरी और दूसरे जरूरी काम से यात्रा करने वाले लोगों के साथ-साथ छोटे व्यापारी भी शामिल हैं। फल, सब्जी, कपड़े और अन्य सामान का कारोबार करने वाले कई कारोबारी इस मार्ग पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में पुल बंद होने से उनके लिए आवागमन का रास्ता लंबा और मुश्किल हो सकता है। सांसद ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस बात की ओर दिलाया है कि त्योहारों के समय इस तरह की परेशानी का सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों और व्यापार पर पड़ सकता है।
सांसद ने गंगा के जलस्तर का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि नदी का जलस्तर अभी पूरी तरह नीचे नहीं आया है। ऐसे में यदि सड़क मार्ग से विक्रमशिला सेतु की सुविधा उपलब्ध नहीं रहती है तो लोगों के सामने नाव से आवागमन का विकल्प रह सकता है, लेकिन बढ़े हुए जलस्तर की स्थिति में नाव से यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेली ब्रिज हटाने की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाए।
राजेश वर्मा ने अपनी मांग में कम से कम दुर्गापूजा तक मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि त्योहारों के बाद बेली ब्रिज हटाने और विक्रमशिला सेतु के स्थायी पुनर्स्थापन का काम शुरू किया जा सकता है। इस तरह त्योहार के दौरान लोगों को अचानक वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर होने की स्थिति से राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला राज्य सरकार और संबंधित विभागों की कार्ययोजना के अनुसार होगा।
विक्रमशिला सेतु पूर्वी बिहार को उत्तरी बिहार और सीमांचल के कई इलाकों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। भागलपुर से नवगछिया, खगड़िया, कटिहार और आगे के क्षेत्रों तक जाने वाले लोगों के लिए यह पुल लंबे समय से अहम भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में पुल पर आवागमन बंद होने का असर केवल निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बस, ट्रक, छोटे मालवाहक वाहन, व्यापारिक गतिविधियों और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों पर भी पड़ता है।
वर्तमान में सेतु के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने के लिए पहले बेली ब्रिज हटाना जरूरी बताया गया है। ताजा कार्ययोजना के अनुसार बेली ब्रिज हटने के बाद पुल के मूल ढांचे की विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी। इंजीनियर पुल के पायों, बेयरिंग और कंक्रीट फ्रेम की मजबूती की जांच करेंगे। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पुनर्स्थापन कार्य के दौरान पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की भी तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार चार स्पैन और क्षतिग्रस्त स्लैब को हटाने के लिए हेली कटर मशीन का उपयोग किया जाएगा, ताकि पुल के सुरक्षित हिस्सों पर अनावश्यक कंपन का असर न पड़े। योजना के तहत बेली ब्रिज हटाने के बाद अगले चरण में मूल सेतु के स्ट्रक्चर की जांच होगी और उसके बाद पुनर्स्थापन का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
पुल बंद होने की स्थिति में प्रशासन के सामने वैकल्पिक यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। पहले की कार्ययोजना में भी यह स्पष्ट किया गया था कि पुल पर काम के दौरान भागलपुर और नवगछिया दोनों छोर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्जन, भारी वाहनों की आवाजाही और वैकल्पिक मार्गों पर दबाव को देखते हुए व्यवस्था करनी होगी।
त्योहारों के दौरान स्थिति और संवेदनशील हो सकती है। दुर्गापूजा के बाद दीपावली और छठ महापर्व आते हैं। इन मौकों पर बाजारों में खरीदारी बढ़ती है और दूसरे जिलों से लोगों का आना-जाना भी बढ़ जाता है। सांसद का तर्क है कि इसी समय पुल बंद रहने से लोगों और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से समय-सारणी पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
दूसरी ओर, विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन में देरी से पुल की मरम्मत और संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े काम भी आगे खिसक सकते हैं। मौजूदा योजना में बेली ब्रिज हटाने के बाद तकनीकी जांच और क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी है। इसलिए सरकार के सामने एक तरफ लोगों की तत्काल सुविधा और दूसरी तरफ पुल के स्थायी पुनर्स्थापन को तय समय में पूरा करने के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
फिलहाल सांसद राजेश वर्मा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने अपनी मांग रख दी है। उन्होंने जनहित, त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली आवाजाही, छोटे व्यापारियों की परेशानी और गंगा के जलस्तर को आधार बनाते हुए बेली ब्रिज हटाने की प्रक्रिया को दुर्गापूजा के बाद तक टालने का आग्रह किया है। अब इस पर राज्य सरकार और संबंधित विभाग क्या निर्णय लेते हैं, इस पर भागलपुर, नवगछिया, खगड़िया और आसपास के इलाकों के लोगों की नजर रहेगी।










