भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में हुई झमाझम बारिश के बाद अब मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है।
Weather Forecast: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने हाल के दिनों में कई राज्यों में व्यापक बारिश दर्ज कराई, जिससे जून के दौरान हुई वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो गई। हालांकि, अब मौसम का पैटर्न एक बार फिर बदलने के संकेत मिल रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आगामी दिनों में उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधि कमजोर पड़ सकती है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) की स्थिति में बदलाव के कारण वर्षा का वितरण बदल रहा है। इसका असर कृषि, जलाशयों, शहरी जलभराव और मौसम संबंधी गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।
जून की कमी जुलाई की बारिश से हुई पूरी
इस वर्ष मानसून की शुरुआत के बाद शुरुआती हफ्तों में कई क्षेत्रों में अपेक्षा से कम बारिश दर्ज की गई थी। जून के दौरान वर्षा में आई कमी ने कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि जुलाई की शुरुआत में मध्य भारत और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले सिस्टम (Low Pressure System) ने मानसून को फिर सक्रिय कर दिया। इसके परिणामस्वरूप पश्चिमी, मध्य और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक वर्षा हुई।
इस बारिश से देश में मौसमी वर्षा का कुल अंतर (Rainfall Departure) सुधरकर सामान्य श्रेणी के करीब पहुंच गया। साथ ही जलाशयों में जल स्तर बढ़ा, मिट्टी में नमी आई और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिली।
अब बदल रहा है मानसून का रुख
IMD के अनुसार, लगातार सक्रिय रहने के बाद मानसून ट्रफ अब उत्तर की ओर खिसक रही है। इसके चलते अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के बड़े हिस्सों में बारिश की तीव्रता कम हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून ट्रफ दोबारा दक्षिण की ओर नहीं लौटती, तब तक इन क्षेत्रों में व्यापक और लगातार बारिश की संभावना सीमित रहेगी। यह बदलाव मौसमी प्रणाली के सामान्य चक्र का हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है।
किन राज्यों में कम हो सकती है बारिश?
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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में निम्न क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियों में कमी देखने को मिल सकती है—
- पंजाब
- हरियाणा
- दिल्ली
- राजस्थान
- गुजरात
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र के कई हिस्से
- पश्चिमी मध्य प्रदेश
इन क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी रह सकती है, लेकिन हाल के दिनों जैसी व्यापक और तेज बारिश की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
इन राज्यों में जारी रह सकती है भारी वर्षा
दूसरी ओर, देश के पूर्वी, पर्वतीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में मानसून सक्रिय बना रह सकता है। IMD के अनुसार निम्न राज्यों में आगामी दिनों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है—
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
- पूर्वी उत्तर प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
- ओडिशा
- पश्चिम बंगाल
- पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य
इन क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि भारी बारिश के दौरान जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
सैटेलाइट संकेत भी दे रहे हैं बदलाव
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उपग्रह (Satellite) से प्राप्त नवीनतम तस्वीरों में देश के प्रमुख मानसूनी क्षेत्रों में घने बादलों की मात्रा में कमी दिखाई दे रही है। इससे संकेत मिलता है कि अगले कुछ दिनों में वर्षा की तीव्रता पहले की तुलना में घट सकती है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो जुलाई के मध्य तक देश में कुल मौसमी वर्षा का स्तर फिर से सामान्य से थोड़ा नीचे आ सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून एक गतिशील प्रणाली है और नए कम दबाव वाले क्षेत्र बनने पर स्थिति फिर बदल सकती है।
अल नीनो का भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मानसून के व्यवहार पर अल नीनो (El Niño) जैसी वैश्विक जलवायु परिस्थितियों का भी प्रभाव देखने को मिल सकता है। अल नीनो की स्थिति में सामान्य मानसून की तुलना में बारिश का वितरण अधिक असमान हो सकता है। यानी कुछ क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि अन्य स्थानों पर लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रह सकती है। इसी कारण मौसम वैज्ञानिक पूरे मानसून सीजन के दौरान लगातार निगरानी रखने और समय-समय पर जारी पूर्वानुमानों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं।








