पश्चिम बंगाल में आंगनवाड़ी केंद्रों को मुफ्त बिजली का तोहफा: 19 हजार किराए के केंद्रों को मिलेंगे स्थायी भवन

पश्चिम बंगाल में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को मुफ्त बिजली मिलेगी। किराए के करीब 19 हजार केंद्रों के लिए स्थायी भवन बनाने की योजना है, मानदेय और पोषण राशि भी बढ़ी।
पश्चिम बंगाल में आंगनवाड़ी केंद्रों को मुफ्त बिजली का तोहफा: 19 हजार किराए के केंद्रों को मिलेंगे स्थायी भवन
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पश्चिम बंगाल में आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों, महिलाओं और कार्यकर्ताओं के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी में आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम में कहा कि राज्य के सभी आंगनवाड़ी और आइसीडीएस केंद्रों को अब सरकार की ओर से मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही किराए के भवनों में संचालित करीब 19 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से स्थायी सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। सरकार ने इसके लिए आवश्यक धनराशि का प्रावधान किए जाने की बात कही है।

सरकार की इस घोषणा का सीधा असर उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर पड़ेगा, जहां अभी किराए के भवन में बच्चों की देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा, पोषण संबंधी गतिविधियां और मातृ-शिशु सेवाएं संचालित की जाती हैं। स्थायी भवन उपलब्ध होने के बाद इन केंद्रों के संचालन के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करने की संभावना है। वहीं मुफ्त बिजली की सुविधा से बिजली के बिल का खर्च कम होगा और केंद्रों में पंखे, रोशनी तथा जरूरत के दूसरे विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल अधिक सुविधाजनक तरीके से किया जा सकेगा।

पश्चिम बंगाल में आंगनवाड़ी केंद्रों के भवनों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2022 के सरकारी ऑडिट से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,19,481 चालू आंगनवाड़ी केंद्रों में से 61,314 यानी करीब 51 प्रतिशत अपने भवनों में संचालित हो रहे थे, जबकि 19,479 केंद्र किराए के भवनों में चल रहे थे। बाकी केंद्र ऐसे कमरों में संचालित हो रहे थे, जो न तो विभाग के स्वामित्व में थे और न ही किराए पर लिए गए थे। ऐसे में अब करीब 19 हजार किराए के केंद्रों के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराने की घोषणा को आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से जुड़े आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी घोषणाएं कीं। कार्यक्रम में बताया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में अगस्त से प्रति माह अतिरिक्त 5,000 रुपये की वृद्धि लागू की गई है। इससे पहले जुलाई में जारी राज्य सरकार के आदेश के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कुल मासिक मानदेय को 14,000 रुपये और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के कुल मासिक मानदेय को 11,800 रुपये किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह बढ़ोतरी एक अगस्त 2026 से लागू होने की बात कही गई थी।

कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी सुविधा की भी घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया गया है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में सालाना पांच लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार की सुविधा मिलने की बात कही गई है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवारों पर अचानक आने वाले बड़े इलाज के खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। योजना का वास्तविक लाभ संबंधित पात्रता और सरकारी व्यवस्था के अनुसार मिलेगा।

आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन और गर्भवती तथा प्रसूता महिलाओं के पोषण को लेकर भी राशि बढ़ाने की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार बच्चों के भोजन के लिए मिलने वाली राशि को दो रुपये बढ़ाकर आठ रुपये किया गया है। वहीं गर्भवती और प्रसूता महिलाओं के भोजन के लिए मिलने वाली राशि 12 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये कर दी गई है। इन बदलावों का उद्देश्य आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत मिलने वाले पोषण कार्यक्रम को मजबूत करना बताया गया है।

आंगनवाड़ी केंद्र केवल बच्चों के लिए भोजन उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था नहीं हैं। इनके माध्यम से छोटे बच्चों की प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं से जुड़ी सेवाएं भी संचालित होती हैं। केंद्रों पर काम करने वाली कार्यकर्ता और सहायिका स्थानीय स्तर पर बच्चों और परिवारों के साथ सीधे संपर्क में रहती हैं। केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं में सुधार का असर इसलिए सिर्फ भवन या बिजली की सुविधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वहां मिलने वाली सेवाओं की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

केंद्र सरकार की ओर से भी आंगनवाड़ी सेवाओं को प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के भीतर आंगनवाड़ी केंद्र बनाने के लिए सितंबर 2025 में संयुक्त दिशानिर्देश जारी किए गए थे। मार्च 2026 तक देशभर में 2.9 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसरों के साथ एकीकृत किया जा चुका था। इससे आंगनवाड़ी से औपचारिक स्कूली शिक्षा की ओर बच्चों के संक्रमण को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में स्थायी भवनों की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना उनकी सेवाओं का अहम हिस्सा है। किराए के भवनों में स्थान, पानी, शौचालय, बिजली और दूसरे संसाधनों की उपलब्धता हर जगह एक जैसी नहीं होती। सरकारी भवन मिलने के बाद इन केंद्रों में आवश्यक सुविधाओं को एक तय मानक के अनुसार विकसित करने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि नए भवनों का निर्माण किस चरण में होगा, किन क्षेत्रों को पहले शामिल किया जाएगा और निर्माण पूरा होने की समयसीमा क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी आगे की सरकारी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

मुफ्त बिजली की घोषणा भी आंगनवाड़ी केंद्रों के रोजमर्रा के संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन और पंखे की सुविधा जरूरी होती है। बिजली उपलब्ध रहने से केंद्रों में रोशनी, पंखे और अन्य आवश्यक उपकरण चलाने में सुविधा होगी। साथ ही केंद्रों को नियमित बिजली बिल के खर्च से राहत मिलने की बात सरकार की घोषणा में कही गई है।

कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी को भी सरकार ने अपनी घोषणा का हिस्सा बनाया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका स्थानीय स्तर पर बच्चों और महिलाओं से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। जुलाई में जारी राज्य सरकार के आदेश के अनुसार बढ़ा हुआ अतिरिक्त मानदेय एक अगस्त 2026 से लागू किया गया था। कार्यकर्ताओं के मानदेय में 5,000 रुपये की अतिरिक्त वृद्धि और सहायिकाओं के मानदेय में भी 5,000 रुपये की वृद्धि की गई थी।

पानीहाटी में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य भी मौजूद थे। नितिन नवीन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के शुरुआती विकास और देखभाल में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा और बच्चों की देखभाल को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर दिया।

सरकार की घोषणाओं में सबसे बड़ा आधारभूत बदलाव किराए के केंद्रों को स्थायी भवन उपलब्ध कराने का है। करीब 19 हजार केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपने भवन मिलने की योजना है। इसका मतलब यह है कि सभी केंद्रों को एक साथ नए भवन नहीं मिलेंगे, बल्कि सरकारी योजना और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अलग-अलग चरणों में निर्माण या हस्तांतरण किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए आवश्यक धनराशि के प्रावधान की बात कही है।

आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े पुराने ऑडिट आंकड़ों में भवन, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख रहा है। 2022 से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 से 2019-20 के बीच स्वीकृत 18,319 आंगनवाड़ी शौचालयों में नवंबर 2022 तक केवल 2,056 का निर्माण पूरा हुआ था। इसी अवधि में स्वीकृत 11,174 पेयजल परियोजनाओं में से किसी के पूरा न होने का भी ऑडिट में उल्लेख किया गया था। ये पुराने आंकड़े हैं, लेकिन इससे आंगनवाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत का संदर्भ सामने आता है।

अब राज्य सरकार की नई घोषणाओं के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े लोगों की नजर इसके क्रियान्वयन पर रहेगी। मुफ्त बिजली की व्यवस्था किस प्रक्रिया से लागू होगी, नए भवनों का निर्माण किन जिलों और केंद्रों से शुरू होगा, भवन निर्माण के लिए क्या मानक तय होंगे और चरणबद्ध योजना कब तक पूरी होगी, इन सवालों की विस्तृत जानकारी सरकारी दिशा-निर्देश आने के बाद स्पष्ट हो सकेगी। इसी तरह मानदेय और पोषण राशि में बढ़ोतरी के भुगतान की प्रक्रिया भी संबंधित विभागीय व्यवस्था के तहत होगी।

बंगाल सरकार की इन घोषणाओं में एक तरफ आंगनवाड़ी केंद्रों की भौतिक सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर है, तो दूसरी तरफ वहां काम करने वाले कर्मचारियों के आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी लाभ बढ़ाने की बात कही गई है। बच्चों के भोजन की राशि और गर्भवती तथा प्रसूता महिलाओं के भोजन के लिए मिलने वाली राशि में बदलाव को पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है। यदि स्थायी भवनों और मुफ्त बिजली की योजना तय प्रक्रिया के अनुसार लागू होती है, तो किराए के भवनों में चल रहे हजारों केंद्रों के संचालन की स्थिति में भी बदलाव आ सकता है। फिलहाल राज्य सरकार ने घोषणा कर दी है और अब इसके जमीनी स्तर पर लागू होने का इंतजार रहेगा।

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