पश्चिम बंगाल विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। राज्य में मई 2026 में सत्ता परिवर्तन के बाद नई विधानसभा का गठन हो चुका है, लेकिन डिप्टी स्पीकर का पद अभी तक नहीं भरा गया है। इस पद के लिए चुनाव कराने को लेकर फिलहाल विधानसभा के स्तर पर कोई स्पष्ट पहल सामने नहीं आई है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष डिप्टी स्पीकर का चुनाव होने की संभावना भी कम दिखाई दे रही है। ऐसे में विधानसभा के महत्वपूर्ण पदों में शामिल डिप्टी स्पीकर का पद फिलहाल खाली रहने के आसार हैं।
पश्चिम बंगाल में मई में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और नई विधानसभा अस्तित्व में आई। नई विधानसभा के गठन के बाद विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव कराया गया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर अभी तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस पद को भरने के लिए अगस्त में हलचल जरूर दिखाई दी थी, लेकिन उसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। यही वजह है कि अब इस पद को लेकर विधानसभा के भीतर और राजनीतिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
डिप्टी स्पीकर पद के लिए अगस्त में पु़रशुड़ा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक विमान घोष का नाम प्रमुखता से सामने आया था। उस समय माना जा रहा था कि पार्टी इस पद के लिए उनके नाम पर आगे बढ़ सकती है। विधानसभा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक एक अनुभवी विधायक को यह जिम्मेदारी देने की दिशा में तैयारी की चर्चा थी। हालांकि, इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और अब तक यह तय नहीं हुआ है कि डिप्टी स्पीकर पद के लिए चुनाव कब कराया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विमान घोष के नाम को लेकर भाजपा के भीतर एक वर्ग की ओर से आपत्ति सामने आने की बात कही गई थी। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना अभी संभव नहीं है कि पार्टी आगे भी विमान घोष के नाम पर ही विचार करेगी या किसी दूसरे विधायक को डिप्टी स्पीकर पद के लिए आगे किया जाएगा। जब तक पार्टी की ओर से औपचारिक निर्णय नहीं होता, तब तक इस पद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।
नई विधानसभा के गठन के बाद डिप्टी स्पीकर का चुनाव होना संसदीय प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विधानसभा में अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं, जबकि डिप्टी स्पीकर की भूमिका अध्यक्ष की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी कारण इस पद पर किसी सदस्य का चुनाव होने तक सदन के दूसरे शीर्ष पद को लेकर चर्चा बनी रहती है। पश्चिम बंगाल में अभी डिप्टी स्पीकर पद रिक्त होने के कारण इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई निर्वाचित सदस्य मौजूद नहीं है।
पिछली विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद तृणमूल कांग्रेस के अशिस बनर्जी के पास था। 2021 में उनके डिप्टी स्पीकर चुने जाने के बाद उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभाला था। 2026 में विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ पिछली विधानसभा और उसके पदाधिकारियों का कार्यकाल भी समाप्त हुआ। नई विधानसभा के गठन के बाद अब डिप्टी स्पीकर के पद पर नए चुनाव की जरूरत है। उपलब्ध विधानसभा रिकॉर्ड में भी 18वीं विधानसभा के डिप्टी स्पीकर का पद फिलहाल निर्धारित नहीं दिखता।
नई विधानसभा में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा विधायक रथींद्र बसु निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। उनके निर्वाचन के बाद विधानसभा के संचालन से जुड़े प्रमुख पदों में डिप्टी स्पीकर का पद अभी भी रिक्त है। ऐसे में सदन के पदाधिकारियों की व्यवस्था को लेकर डिप्टी स्पीकर का चुनाव अगला महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा सकता है। हालांकि, फिलहाल चुनाव की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
डिप्टी स्पीकर के चुनाव में देरी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अभी तक उपलब्ध जानकारी में चुनाव टलने का कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष चुनाव होने की संभावना कम है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल पद को खाली रखते हुए विधानसभा की कार्यवाही आगे चलने की स्थिति बनी हुई है।
इस बीच विमान घोष के नाम को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। अगस्त में उनका नाम सामने आने के बाद यह माना जा रहा था कि सरकार और भाजपा विधायक दल डिप्टी स्पीकर के चुनाव की दिशा में आगे बढ़ सकता है। लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने से अब यह भी सवाल है कि क्या उनके नाम पर फिर से सहमति बनेगी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर उनके नाम को लेकर आपत्ति की बात कही गई है, लेकिन यह जानकारी आधिकारिक तौर पर भाजपा द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे सूत्रों की जानकारी के तौर पर ही देखा जा रहा है।
विधानसभा के डिप्टी स्पीकर का पद केवल औपचारिक पद नहीं है। सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है। इसके अलावा विधानसभा की संसदीय व्यवस्था में यह पद सदन के संचालन से जुड़े संवैधानिक ढांचे का हिस्सा है। इसलिए लंबे समय तक पद खाली रहने पर राजनीतिक और संसदीय हलकों में इसको लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
बंगाल में इस पद की स्थिति की तुलना राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा के डिप्टी स्पीकर पद से भी की जा रही है। जगरण की रिपोर्ट में उल्लेख है कि लोकसभा में भी डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से रिक्त रहा है। हालांकि दोनों सदनों और उनके चुनाव की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन डिप्टी स्पीकर के पद पर चुनाव में देरी का मुद्दा संसद और विधानसभाओं में समय-समय पर चर्चा का विषय रहा है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल विधानसभा में सरकार के पास बहुमत है और सदन की कार्यवाही दूसरे पदाधिकारियों के माध्यम से चल रही है। डिप्टी स्पीकर का चुनाव कब होगा, इसके लिए अभी कोई स्पष्ट कार्यक्रम सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में भाजपा विधायक दल की बैठक या विधानसभा सचिवालय की ओर से कोई प्रक्रिया शुरू होने पर इस पद को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि डिप्टी स्पीकर पद के लिए विमान घोष के नाम को आगे बढ़ाया जाएगा या पार्टी किसी दूसरे विधायक पर भरोसा करेगी। अगस्त में उनका नाम सामने आने के बाद प्रक्रिया रुकने और अब चुनाव को लेकर अनिश्चितता बने रहने से यह मुद्दा फिलहाल खुला हुआ है। भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होने तक किसी संभावित उम्मीदवार के नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता।
बंगाल विधानसभा में नई सरकार बनने के बाद कई संसदीय प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। ऐसे में डिप्टी स्पीकर पद का चुनाव भी आने वाले समय में एजेंडे में शामिल हो सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में विधानसभा सचिवालय के स्तर पर चुनाव की कोई निश्चित समय-सारणी नहीं है। इसलिए फिलहाल डिप्टी स्पीकर का पद खाली ही रहने के आसार हैं।
इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पद के लिए चुनाव तभी आगे बढ़ेगा जब सरकार और विधानसभा में इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार के नाम पर सहमति, नामांकन और चुनाव से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ही नया डिप्टी स्पीकर चुना जा सकेगा। अभी इन चरणों में से किसी के शुरू होने की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस तरह पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ता परिवर्तन के बाद जहां नई सरकार और नई विधानसभा की संसदीय व्यवस्था आकार ले रही है, वहीं डिप्टी स्पीकर का पद अभी भी खाली है। अगस्त में विमान घोष का नाम चर्चा में आने के बावजूद चुनाव आगे नहीं बढ़ सका है। सूत्रों के मुताबिक इस साल चुनाव की संभावना कम दिखाई दे रही है, हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और विधानसभा की आगामी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल डिप्टी स्पीकर के चुनाव को लेकर असमंजस बना हुआ है और यह पद खाली रहने की स्थिति जारी है।











