भारत में कब आएंगे प्लास्टिक के नोट? RBI गवर्नर ने दिया बड़ा अपडेट

Plastic Notes in India: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारत में प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों की शुरुआत को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। केंद्रीय बैंक अगले वित्त वर्ष से

देश में पिछले कुछ दिनों से प्लास्टिक या पॉलिमर नोटों को लेकर चर्चा तेज है और अब इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बड़ा संकेत मिला है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि सभी तैयारियां और प्रक्रियाएं योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर नोटों को चलन में लाया जा सकता है।

बिजनेस न्यूज़: भारत में प्लास्टिक के नोटों (Polymer Banknotes) को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सभी प्रक्रियाएं तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत में देश में पॉलीमर नोटों का प्रचलन शुरू किया जा सकता है। यह कदम भारतीय मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्रीय बैंक पॉलीमर नोटों के परीक्षण और चरणबद्ध उपयोग की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए प्लास्टिक नोट मौजूदा कागजी नोटों का स्थान नहीं लेंगे, बल्कि दोनों प्रकार की करेंसी समानांतर रूप से प्रचलन में रहेंगी।

क्या हैं पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक आधारित पदार्थ से बनाए जाते हैं, जो पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं। दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम में पहले से ही पॉलीमर बैंकनोट्स का सफल उपयोग किया जा रहा है। इन नोटों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे नमी, धूल, गंदगी और सामान्य टूट-फूट से कम प्रभावित होते हैं। इसके अलावा इनमें उन्नत सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की संभावना कम हो जाती है।

भारत में दूसरी बार हो रही कोशिश

भारत में पॉलीमर नोटों को लागू करने का विचार नया नहीं है। वर्ष 2009 में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने सीमित स्तर पर एक पायलट परियोजना शुरू करने की योजना बनाई थी। हालांकि तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण उस प्रयास को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब एक बार फिर आरबीआई इस परियोजना को नए सिरे से लागू करने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में प्रिंटिंग तकनीक, सुरक्षा मानकों और करेंसी प्रबंधन में हुए सुधारों के कारण इस बार सफलता की संभावना अधिक है।

शुरुआती चरण में छोटे मूल्यवर्ग के नोट

रिपोर्ट्स के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरुआत में ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट जारी किए जा सकते हैं। इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण है। भारतीय अर्थव्यवस्था में ₹10 और ₹20 के नोटों की संख्या काफी अधिक है और ये दैनिक लेनदेन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। हालांकि कुल मुद्रा मूल्य में इनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में यदि प्रारंभिक चरण में कोई तकनीकी या परिचालन समस्या सामने आती है, तो उसका वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा।

यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में ₹100, ₹200, ₹500 और अन्य बड़े मूल्यवर्ग के नोटों को भी पॉलीमर स्वरूप में जारी करने पर विचार किया जा सकता है।

कागजी नोटों से कैसे बेहतर हैं पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोटों को दुनिया भर में अधिक टिकाऊ मुद्रा विकल्प माना जाता है। सामान्य कागजी नोट जहां जल्दी फट जाते हैं, गीले होने पर खराब हो जाते हैं या समय के साथ घिस जाते हैं, वहीं पॉलीमर नोट लंबे समय तक उपयोग में बने रह सकते हैं। इनकी लंबी आयु के कारण केंद्रीय बैंकों को बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता कम पड़ती है, जिससे दीर्घकालिक लागत में कमी आ सकती है। इसके अलावा पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह मॉडल कई मामलों में अधिक प्रभावी माना जाता है क्योंकि नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम होती है।

नकली नोटों पर लगेगी रोक

सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी पॉलीमर नोट महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो, जटिल होलोग्राम, उन्नत माइक्रो-प्रिंटिंग और विशेष सुरक्षा तत्व शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें नकली रूप में तैयार करना काफी कठिन होता है। आरबीआई इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से यह भी जांचना चाहता है कि पॉलीमर नोट भारतीय बाजार में नकली मुद्रा की समस्या को किस हद तक कम कर सकते हैं और उनकी सुरक्षा विशेषताएं वास्तविक परिस्थितियों में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।

हालांकि पॉलीमर नोटों के कई फायदे हैं, लेकिन इनके व्यापक उपयोग से पहले कुछ तकनीकी चुनौतियों का समाधान भी जरूरी होगा। वर्तमान में देश के अधिकांश एटीएम और कैश रीसाइक्लिंग मशीनें कागजी नोटों की पहचान और प्रोसेसिंग के लिए डिज़ाइन की गई हैं। यदि भविष्य में बड़े मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट जारी किए जाते हैं, तो एटीएम नेटवर्क, बैंकिंग मशीनरी और कैश हैंडलिंग सिस्टम में सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर स्तर पर बदलाव करने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि आरबीआई पहले सीमित स्तर पर परीक्षण करना चाहता है।

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