यूपी में वोटरों की संख्या घटी, SIR ड्राफ्ट ने बदली तस्वीर, जानिए क्या है आंकड़ा

उत्तर प्रदेश में SIR ड्राफ्ट जारी होने से मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। 75 जिलों में 2.88 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए, कई जिलों में कटौती 20% से ज्यादा रही

उत्तर प्रदेश में SIR ड्राफ्ट जारी होने के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। 75 जिलों में 2.88 करोड़ वोटरों के नाम कटे हैं। कई जिलों में 20 प्रतिशत से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

UP SIR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान का ड्राफ्ट अब सार्वजनिक कर दिया गया है। इस ड्राफ्ट के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में हलचल तेज हो गई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 75 जिलों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कुछ जिलों में यह कटौती 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

SIR अभियान का उद्देश्य क्या रहा

चुनाव आयोग द्वारा चलाया गया SIR अभियान मतदाता सूची को साफ और अपडेट करने के लिए किया गया था। इसका मकसद ऐसे मतदाताओं की पहचान करना था जो अब उस क्षेत्र में नहीं रहते, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं या जो लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बीएलओ स्तर तक सत्यापन कराया गया।

प्रदेश में कुल कितने मतदाता हटाए गए

उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। SIR ड्राफ्ट के मुताबिक इनमें से 2 करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं का करीब 18.70 प्रतिशत है। आयोग के अनुसार हटाए गए नामों में ऐसे मतदाता शामिल हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं, जिनका निधन हो चुका है, जिनके नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं या जिन्होंने तय समय में फार्म जमा नहीं किया।

किस श्रेणी में कितने नाम हटे

ड्राफ्ट आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा नाम स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं के हैं। इस श्रेणी में करीब 2.17 करोड़ नाम हटाए गए हैं। मृत मतदाताओं की संख्या 46.23 लाख बताई गई है। डुप्लीकेट नामों की संख्या 25.47 लाख है। वहीं 7.57 लाख ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने निर्धारित समय में आवश्यक फार्म जमा नहीं किया।

2003 की सूची से रिकॉर्ड न मिलने का मामला

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SIR प्रक्रिया के दौरान 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता भी सामने आए जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्हें अपनी पहचान और पात्रता साबित करने का पूरा मौका दिया जाएगा।

अब मतदाता सूची में कितने नाम बचे

ड्राफ्ट जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में अब 12.55 करोड़ मतदाता रह गए हैं। ड्राफ्ट के प्रकाशन के साथ ही इसकी प्रति सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को भी उपलब्ध करा दी गई है ताकि वे जांच कर सकें और जरूरत पड़ने पर आपत्ति दर्ज करा सकें।

दावे और आपत्तियों की समयसीमा

ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब एक महीने तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। छह फरवरी तक कोई भी पात्र नागरिक अपना नाम जुड़वा सकता है या गलत तरीके से कटे नाम को वापस जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है। बीएलओ के पास मतदाता सूची उपलब्ध है और आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय रहते जांच जरूर करें।

20 प्रतिशत से ज्यादा कटौती वाले जिले

प्रदेश के 75 जिलों में से 17 जिले ऐसे हैं जहां 20 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें सबसे ऊपर लखनऊ है, जहां 30.04 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। इसके बाद गाजियाबाद, बलरामपुर, कानपुर नगर और प्रयागराज जैसे बड़े जिलों का नाम आता है।

लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटे

राजधानी लखनऊ में कुल 12,00,138 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह जिले के कुल मतदाताओं का 30.04 प्रतिशत है। इतना बड़ा आंकड़ा सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी समीक्षा की जा रही है।

अन्य बड़े जिलों की स्थिति

गाजियाबाद में 8,18,139 मतदाता यानी 28.83 प्रतिशत नाम कटे हैं। बलरामपुर में 25.98 प्रतिशत, कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत और प्रयागराज में 24.64 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। मेरठ, आगरा, बरेली और बदायूं जैसे जिलों में भी कटौती 20 प्रतिशत के आसपास रही है।

कम कटौती वाले जिले

कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां मतदाता सूची में अपेक्षाकृत कम बदलाव हुआ है। महोबा में केवल 12.42 प्रतिशत नाम कटे हैं। हमीरपुर, ललितपुर, चित्रकूट, श्रावस्ती, शामली और कासगंज जैसे जिलों में कटौती अपेक्षाकृत कम रही है।

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