Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu ने कहा कि AI पर बढ़ते निवेश के कारण IT कंपनियां नई भर्तियां कम कर रही हैं। उनका मानना है कि इससे युवाओं के रोजगार और भविष्य की आय को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
Tech: Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर IT इंडस्ट्री में रोजगार की स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कंपनियां अब नए कर्मचारियों की भर्ती करने के बजाय AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और डेटा सेंटर पर अधिक निवेश कर रही हैं, जिससे नई नौकरियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
AI निवेश के कारण IT सेक्टर में धीमी हुई नई भर्तियां
Zoho के फाउंडर Sridhar Vembu का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। पहले जहां IT कंपनियां हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की भर्ती करती थीं, वहीं अब कंपनियों का फोकस AI आधारित तकनीकों पर निवेश बढ़ाने की ओर है। उनका मानना है कि यह बदलाव भारत जैसे देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि लाखों युवा IT सेक्टर में रोजगार की उम्मीद लेकर आते हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती अब यह होगी कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर कैसे बनाए जाएं।
कर्मचारियों के बजट का बड़ा हिस्सा AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
Sridhar Vembu के अनुसार, पहले कंपनियां जिस बजट का उपयोग नए कर्मचारियों की भर्ती और उनके वेतन पर करती थीं, अब वही राशि AI टूल्स, हाई-परफॉर्मेंस सर्वर, GPU और डेटा सेंटर जैसी तकनीकी जरूरतों पर खर्च हो रही है। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर की लागत लगातार बढ़ रही है क्योंकि मेमोरी और सर्वर हार्डवेयर पहले की तुलना में काफी महंगे हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि Zoho ने हाल के वर्षों में कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं की है, लेकिन कंपनी ने नई भर्तियों की गति भी काफी सीमित रखी है। उनके मुताबिक यह स्थिति केवल Zoho तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी IT इंडस्ट्री इसी दौर से गुजर रही है।
क्या बाजार को और ज्यादा सॉफ्टवेयर की जरूरत है?
Zoho के संस्थापक ने यह सवाल भी उठाया कि AI के जरिए सॉफ्टवेयर तेजी से और कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन क्या वैश्विक बाजार को वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में नए सॉफ्टवेयर उत्पादों की आवश्यकता है? उनका कहना है कि जब किसी उद्योग में उत्पादों की संख्या बहुत बढ़ जाती है, तब प्रतिस्पर्धा कीमत की बजाय गुणवत्ता, भरोसे और ब्रांड वैल्यू पर आ जाती है। ऐसे में बाजार की वृद्धि भी अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है।
सस्ती तकनीक के साथ आय का सवाल भी अहम
Sridhar Vembu का मानना है कि AI के कारण भविष्य में कई तकनीकी उत्पाद और डिजिटल सेवाएं पहले से कहीं अधिक सस्ती हो सकती हैं, क्योंकि उत्पादन लागत घटेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोगों के पास पर्याप्त आय नहीं होगी तो वे सस्ते उत्पाद भी नहीं खरीद पाएंगे। इसलिए AI के दौर में केवल तकनीकी प्रगति ही नहीं, बल्कि रोजगार और आय के नए मॉडल विकसित करना भी जरूरी होगा।
IT इंडस्ट्री पर बढ़ रहा AI का प्रभाव
पिछले एक वर्ष में दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियों ने AI रणनीति के तहत अपने खर्चों का पुनर्गठन किया है। इसी दौरान कुछ कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या भी कम की गई है। Sridhar Vembu का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियों, सरकारों और नीति-निर्माताओं को मिलकर ऐसे समाधान तलाशने होंगे, जिनसे AI के लाभ भी मिलें और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी लगातार बने रहें।










