झुंझुनूं में स्कॉर्पियो हादसे के बाद विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

झुंझुनूं मे स्कॉर्पियो हादसे मे युवक की मौत के बाद परिजनो और युवाओ ने महिंद्रा के खिलाफ रैली निकाली। एयरबैग नहीं खुलने के आरोप पर वाहन को बंद करने की मांग की।

झुंझुनूं में स्कॉर्पियो हादसे में युवक की मौत के बाद परिजनों और समर्थकों ने क्रेन से दुर्घटनाग्रस्त वाहन को शहर में घुमाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वाहन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कंपनी से सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक सड़क हादसे में युवा कारोबारी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। मृतक के परिजनों, दोस्तों और समर्थकों ने दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो वाहन को क्रेन से बांधकर पूरे शहर में घुमाया और उसके पीछे करीब 100 वाहनों का काफिला निकाला। इस दौरान शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित रहा और कुछ स्थानों पर जाम की स्थिति भी बनी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका उद्देश्य वाहन सुरक्षा को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और संबंधित कंपनी से जवाबदेही की मांग करना है। रैली के दौरान कई वाहनों पर सुरक्षा संबंधी संदेश और कंपनी के खिलाफ विरोध दर्ज कराने वाले पोस्टर लगाए गए थे।

हादसे ने खड़े किए सुरक्षा से जुड़े सवाल

यह पूरा मामला 20 जुलाई को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, 21 वर्षीय तरुण नायक अपने चार साथियों के साथ सीकर से झुंझुनूं लौट रहे थे। डूंडलोद बाइपास के पास उनकी स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर बिजली के पोल से टकरा गई और पलट गई। हादसे में तरुण गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि वाहन में सवार अन्य चार लोगों को मामूली चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि हादसे के समय तरुण ने सीट बेल्ट पहन रखी थी, लेकिन दुर्घटना के दौरान वाहन का एयरबैग नहीं खुला। इसी मुद्दे को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों ने वाहन की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, एयरबैग के न खुलने के कारणों की आधिकारिक जांच और तकनीकी निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों द्वारा ही तय किए जा सकते हैं।

दूसरी बार सड़क पर उतरे परिजन और समर्थक

यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में विरोध प्रदर्शन हुआ हो। इससे पहले भी परिजनों और स्थानीय युवाओं ने वाहन को हवा में लटकाकर संबंधित शोरूम के बाहर प्रदर्शन किया था।

सोमवार को निकाली गई रैली में दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो को सबसे आगे क्रेन से बांधकर रखा गया। उसके पीछे विभिन्न वाहनों का लंबा काफिला चला। प्रदर्शनकारियों ने सड़क सुरक्षा और वाहन निर्माण में बेहतर सुरक्षा तकनीक अपनाने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि यदि किसी वाहन में सुरक्षा संबंधी कमियां हैं तो उन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

वाहन सुरक्षा को लेकर उठी मांग

रैली में शामिल लोगों ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियों को ग्राहकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि यदि किसी मॉडल में सुरक्षा संबंधी सुधार की आवश्यकता है तो उसे जल्द लागू किया जाए। कुछ लोगों ने संबंधित मॉडल को बंद करने या उसे नए सुरक्षा फीचर्स के साथ अपडेट करने की भी मांग रखी।

प्रदर्शन के दौरान कई युवाओं ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में सुरक्षा उपकरणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और वाहन कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर लगातार ध्यान देना चाहिए।

एजेंसी के बाहर हुआ प्रतीकात्मक प्रदर्शन

रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई संबंधित वाहन एजेंसी तक पहुंची। वहां प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से हवन और प्रार्थना का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कंपनी से सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की अपील की।

प्रदर्शन के दौरान कंपनी के खिलाफ नारे भी लगाए गए। हालांकि, यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया और पुलिस प्रशासन पूरे कार्यक्रम के दौरान मौके पर मौजूद रहा।

रैली के दौरान यातायात प्रभावित

करीब 100 वाहनों के काफिले के कारण शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। रोडवेज डिपो के पास कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस और यातायात कर्मियों ने वाहनों की आवाजाही सामान्य कराई।

इसी दौरान एक वाहन पर काली फिल्म लगी होने को लेकर पुलिस और कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की बहस भी हुई। बाद में अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हो गया और रैली आगे बढ़ी।

सड़क सुरक्षा और वाहन गुणवत्ता पर नई बहस

इस घटना ने सड़क सुरक्षा और वाहन सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क दुर्घटना के बाद वाहन की तकनीकी जांच बेहद आवश्यक होती है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि दुर्घटना के समय सुरक्षा प्रणाली ने अपेक्षित तरीके से काम किया या नहीं। साथ ही, वाहन चालकों के लिए सीट बेल्ट का उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन और सुरक्षित ड्राइविंग भी दुर्घटनाओं में जान बचाने के महत्वपूर्ण उपाय माने जाते हैं।

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