Columbus

Priest of Iskcon: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार बढ़ रही हिंसा, स्वामी चिन्मय कृष्णदास के बाद ISKCON मंदिर के एक और पुजारी को किया गिरफ्तार

Priest of Iskcon: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार बढ़ रही हिंसा, स्वामी चिन्मय कृष्णदास के बाद ISKCON मंदिर के एक और पुजारी को किया गिरफ्तार
अंतिम अपडेट: 01-12-2024

हाल ही में बांगलादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा में तेजी आई है। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद, बांगलादेश के कई हिंदू मंदिरों को तोड़ दिया गया और उन पर पत्थरबाजी की गई। इस हिंसा का कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह घटनाएं समाज में तनाव को बढ़ा रही हैं। 

ढाका: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में, इस्कॉन मंदिर के पुजारी स्वामी चिन्मय कृष्णदास की गिरफ्तारी के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बीच एक और हिंदू पुजारी को गिरफ्तार किया गया। यह घटना बांग्लादेश के चट्टोग्राम जिले से सामने आई है, जहां इस्कॉन मंदिर के ब्रह्मचारी श्यामदास प्रभु को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 

इस गिरफ्तारी के बाद, पश्चिम बंगाल में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने ट्वीट करके श्यामदास प्रभु की तस्वीर साझा की और यह सवाल उठाया कि क्या वह आतंकवादी दिखते हैं। इससे पहले, चिन्मय कृष्णदास को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के अनुसार, श्यामदास प्रभु गिरफ्तारी के समय चिन्मय कृष्णदास से मिलने जेल गए थे। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में धार्मिक तनाव को और बढ़ा दिया है, और हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा और उत्पीड़न पर गंभीर चिंता जताई जा रही हैं।

ISKCON मंदिर के पुजारी श्यामदास प्रभु को पुलिस ने किया गिरफ्तार 

बांग्लादेश में हाल की घटनाओं ने हिंदू समुदाय के बीच बढ़ते उत्पीड़न और धार्मिक असहिष्णुता की चिंता को बढ़ा दिया है। इस्कॉन के पुजारी श्यामदास प्रभु को बिना आधिकारिक वारंट के गिरफ्तार किया गया, जो कि बांग्लादेश की पुलिस की एक विवादास्पद प्रथा का हिस्सा है, जो बाद में गिरफ्तार व्यक्तियों को रिहा करने का प्रबंध करती है। इस गिरफ्तारी के खिलाफ इस्कॉन के कोलकाता उपाध्यक्ष राधारमण दास ने ट्विटर पर पोस्ट किया।

बांग्लादेश में हिंसा और धार्मिक तनाव की शुरुआत चिन्मय कृष्णदास की गिरफ्तारी से हुई थी, जिन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समुदाय ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे, जिसमें ढाका और चट्टोग्राम शामिल हैं। मंगलवार को चट्टोग्राम अदालत ने चिन्मय कृष्णदास की जमानत को नकार दिया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। इस झड़प में एक सहायक लोक अभियोजक की मौत हो गई, और पुलिस ने 46 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिनमें अधिकांश सफाई कर्मचारी हिंदू थे।

बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हिंसा जारी 

बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हिंसा का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को चट्टोग्राम में जुमे की नमाज के बाद एक बड़ी भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की। इस हमले के पीछे इस्कॉन के एक पूर्व सदस्य पर राजद्रोह के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद उत्पन्न विरोध और हिंसा को कारण बताया जा रहा है। हमलावरों ने शांतिेश्वरी मातृ मंदिर, शोनी मंदिर और शांतिेश्वरी कालीबाड़ी मंदिर पर पत्थर फेंके, जिससे इन मंदिरों के द्वार क्षतिग्रस्त हो गए। कोतवाली थाना प्रमुख अब्दुल करीम ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि हमलावरों ने मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी बांग्लादेश में बढ़ते धार्मिक और राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। बांग्लादेश में, विशेष रूप से शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, हिंसा और असहमति की स्थिति गंभीर हो गई है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार पर आरोप है कि उसने अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय, के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने में नाकामी दिखाई हैं। 

Leave a comment