10% टैरिफ ऐलान के बाद यूरोप का पलटवार, ट्रंप पर तीखी प्रतिक्रिया

10% टैरिफ ऐलान के बाद यूरोप का पलटवार, ट्रंप पर तीखी प्रतिक्रिया

ग्रीनलैंड विवाद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। इस कदम से ब्रिटेन, फ्रांस और यूरोपीय संघ में नाराजगी बढ़ गई है और ट्रांसअटलांटिक रिश्तों पर सवाल उठे हैं।

Trump Tariffs: ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। इस फैसले को न सिर्फ आर्थिक दबाव की रणनीति बताया जा रहा है, बल्कि इसे सहयोगी देशों के बीच भरोसे को कमजोर करने वाला कदम भी माना जा रहा है।

ट्रंप का टैरिफ ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि 1 फरवरी से यूनाइटेड किंगडम, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और फिनलैंड से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह टैरिफ आगे चलकर 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। यह बयान उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साझा किया।

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का रुख

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर कहा कि “दुनिया की शांति दांव पर लगी है” और इसी कारण डेनमार्क को ग्रीनलैंड को अमेरिका के हवाले करना चाहिए।

ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और वहां की स्थानीय सरकार भी अपनी स्वायत्तता को लेकर बेहद संवेदनशील है। यूरोपीय देशों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र का भविष्य वहां के लोगों और संबंधित देश का आंतरिक मामला होता है।

ब्रिटेन का कड़ा विरोध, कीर स्टार्मर का बयान

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी टैरिफ फैसले को “पूरी तरह गलत” बताया है। लंदन स्थित 10 डाउनिंग स्ट्रीट से जारी बयान में उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड पर ब्रिटेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है।

स्टार्मर ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और उसका भविष्य ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क द्वारा तय किया जाना चाहिए। किसी तीसरे देश द्वारा दबाव बनाना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य।

नाटो सहयोगियों पर टैरिफ को बताया अनुचित

कीर स्टार्मर ने यह भी कहा कि नाटो सहयोगियों की सामूहिक सुरक्षा के लिए टैरिफ लगाना बेहद गलत सोच है। उन्होंने जोर देकर कहा कि Arctic Security पूरे नाटो के लिए अहम है और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरूरत है, न कि आर्थिक दबाव डालने की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने साफ किया कि यह मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के साथ सीधे उठाया जाएगा और ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इसका जवाब देगा।

फ्रांस का तीखा रुख, मैक्रों ने बताया अस्वीकार्य

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ट्रंप की धमकी को सख्त शब्दों में खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की आर्थिक या राजनीतिक धमकी स्वीकार नहीं की जा सकती।

मैक्रों का कहना है कि यूरोप अपनी संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगा। फ्रांस ने साफ संकेत दिया है कि अगर अमेरिका ने टैरिफ लागू किया, तो यूरोपीय संघ संयुक्त प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटेगा।

ग्रीनलैंड और डेनमार्क में विरोध प्रदर्शन

ट्रंप के बयान और टैरिफ धमकी के बाद ग्रीनलैंड और डेनमार्क में भी विरोध तेज हो गया है। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और जबरन अमेरिकी कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रीनलैंड कोई सौदे की वस्तु नहीं है और वहां के लोगों की इच्छा के बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

स्वीडन और अन्य यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया

स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने भी अमेरिका के इस कदम पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगी किसी भी तरह के “Blackmail” के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि स्वीडन, अन्य यूरोपीय संघ देशों, नॉर्वे और यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर एक संयुक्त जवाब तैयार करने पर चर्चा कर रहा है।

यूरोपीय आयोग की चेतावनी

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांत हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने यह टैरिफ लागू किया, तो इससे Transatlantic Relations कमजोर होंगे और यह वैश्विक स्तर पर एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।

दावोस में हो सकती है सीधी टक्कर

अगले सप्ताह स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले World Economic Forum (WEF) में डोनाल्ड ट्रंप, उर्सुला वॉन डेर लेयेन और अन्य यूरोपीय नेताओं के बीच मुलाकात होने की संभावना है।

कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में ग्रीनलैंड और टैरिफ का मुद्दा एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा। यूरोपीय नेता अमेरिका से साफ शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी में हैं।

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