20 लाख के बिल भुगतान के बदले मांगी 3 लाख रिश्वत, बातचीत में 1.30 लाख पर बनी बात; निगरानी ने दर्ज किया केस

20 लाख रुपये के बिल भुगतान के बदले 3 लाख रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। बातचीत में रकम 1.30 लाख पर आई। शिकायत के बाद निगरानी ने केस दर्ज किया।
20 लाख के बिल भुगतान के बदले मांगी 3 लाख रिश्वत, बातचीत में 1.30 लाख पर बनी बात; निगरानी ने दर्ज किया केस
Photo Credit / Attribution: Google

सरकारी विभाग में लंबित बिल का भुगतान कराने के बदले रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 20 लाख रुपये के बिल भुगतान के लिए संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की ओर से तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच बातचीत के दौरान रिश्वत की रकम घटाकर 1.30 लाख रुपये करने की बात सामने आई। मामले की शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया है। अब इस मामले में आरोपों की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता का करीब 20 लाख रुपये का बिल सरकारी विभाग में भुगतान के लिए लंबित था। भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए वह संबंधित कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। इसी दौरान आरोप है कि बिल पास कराने और राशि जारी करने के बदले उससे रिश्वत की मांग की गई। शुरुआत में तीन लाख रुपये देने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई और बातचीत के दौरान रिश्वत की राशि कम करने की बात कही।

बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद रिश्वत की रकम घटकर 1.30 लाख रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जानकारी निगरानी विभाग को दी। शिकायत मिलने पर निगरानी अधिकारियों ने आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जानकारी और शिकायत के आधार पर विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है।

निगरानी विभाग की ओर से केस दर्ज किए जाने के बाद अब यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि रिश्वत की मांग किसने की थी और बिल भुगतान की प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका थी। जांच के दौरान बातचीत से जुड़े साक्ष्य, शिकायतकर्ता के बयान और विभागीय दस्तावेजों की पड़ताल की जा सकती है। यदि रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सरकारी कार्यालयों में बिल भुगतान और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की ओर से काम के बदले अवैध रकम मांगना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में निगरानी विभाग शिकायत मिलने पर जांच करता है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करता है।

फिलहाल इस मामले में निगरानी विभाग की जांच आगे बढ़ने का इंतजार है। उपलब्ध जानकारी में आरोपी की पहचान, संबंधित विभाग और घटना के स्थान का स्पष्ट विवरण नहीं है। इसलिए इन तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति या विभाग का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा।

Leave a comment