आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने SLBC बैठक में 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना की समीक्षा की। बैंकरों ने बताया कि कृषि, MSME और प्राथमिकता क्षेत्रों को लाखों करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है, जिससे राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
अमरावती: आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में आर्थिक गतिविधियों को और तेज करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), स्वयं सहायता समूहों और किरायेदार किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे ऋणों की समीक्षा की गई।
बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ऋण वितरण रणनीति को मजबूत बनाना और राज्य की आर्थिक विकास दर को और गति देना था।
235वीं SLBC बैठक में आर्थिक विकास पर विशेष फोकस
आंध्र प्रदेश सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 235वीं बैठक को राज्य की आर्थिक योजना के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बैंकों के प्रतिनिधियों से विभिन्न क्षेत्रों में ऋण उपलब्धता, वित्तीय समावेशन और निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में वार्षिक ऋण योजना (Annual Credit Plan) पर विचार-विमर्श किया गया, जिसके तहत राज्य में विभिन्न उत्पादक क्षेत्रों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग क्षेत्र और सरकार के बीच बेहतर समन्वय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कृषि क्षेत्र को मिला 3.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण
बैठक के दौरान बैंकरों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र को लगभग 3,86,249 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि वित्तपोषण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त ऋण उपलब्ध होने से किसानों को बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण, सिंचाई और आधुनिक तकनीकों में निवेश करने का अवसर मिलता है। आंध्र प्रदेश में कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि उत्पादकता में सुधार पर जोर दे रही है।
MSME क्षेत्र को मिला बड़ा वित्तीय समर्थन
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को 1,17,357 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया गया। MSME क्षेत्र को किसी भी अर्थव्यवस्था का रोजगार इंजन माना जाता है। यह क्षेत्र लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है तथा औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र में वित्तीय सहायता की निरंतरता पर जोर देते हुए कहा कि छोटे और मध्यम उद्यम राज्य के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सुलभ ऋण व्यवस्था से नए उद्यमों की स्थापना और मौजूदा व्यवसायों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलता है।
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प्राथमिकता क्षेत्र में 5.19 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरण
बैठक में बैंकरों ने बताया कि प्राथमिकता क्षेत्र (Priority Sector) को कुल 5,19,693 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। प्राथमिकता क्षेत्र में कृषि, MSME, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवसंरचना और कमजोर वर्गों से जुड़े क्षेत्र शामिल होते हैं।
भारतीय बैंकिंग प्रणाली में प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण का उद्देश्य उन क्षेत्रों तक वित्तीय संसाधन पहुंचाना है जो आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिकता क्षेत्र में बढ़ता निवेश समावेशी विकास और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत बनाने में मदद करता है।
दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
बैठक के दौरान बैंकिंग अधिकारियों ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि आंध्र प्रदेश में ऋण वितरण का स्तर दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 137 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य में बैंकिंग गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हैं और वित्तीय संस्थानों का निवेश भी मजबूत बना हुआ है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च ऋण वितरण दर उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है। इस प्रदर्शन को राज्य की विकास नीतियों और बैंकिंग क्षेत्र के सहयोग का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों और किरायेदार किसानों पर भी ध्यान
मुख्यमंत्री ने बैठक में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और किरायेदार किसानों के लिए ऋण उपलब्धता को विशेष प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। वहीं किरायेदार किसानों को अक्सर औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकार और बैंकिंग संस्थानों के संयुक्त प्रयास इन वर्गों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बैंकों से मांगा सहयोग
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने के लिए बैंकों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया कि वे कृषि, उद्यमिता, स्टार्टअप, ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन से जुड़े क्षेत्रों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि बैंकिंग क्षेत्र और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी राज्य को तेज आर्थिक विकास की दिशा में आगे ले जा सकती है।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
बैठक में राज्य सरकार और वित्तीय संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें मुख्य सचिव, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), NABARD तथा विभिन्न सार्वजनिक और निजी बैंकों के अधिकारी शामिल थे। विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी ने यह सुनिश्चित किया कि आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श हो और समन्वित रणनीति तैयार की जा सके।









