आंध्र प्रदेश में CCTV 360 और AI सिस्टम से अंतर-राज्यीय चोरी गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश के नांदयाल में RTGS CCTV 360 सिस्टम की मदद से पुलिस ने अंतरराज्यीय चोरी गिरोह को पकड़ा। धोन में ITC वेयरहाउस चोरी का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार।

नांदयाल पुलिस ने RTGS CCTV 360 सिस्टम की मदद से अंतरराज्यीय चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया। धोन में ITC वेयरहाउस से चोरी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और नकदी व वाहन बरामद किए गए।

नांदयाल: आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने धोन शहर में स्थित एक सिगरेट गोदाम में हाई-प्रोफाइल चोरी को अंजाम दिया था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है।

यह सफलता राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) के तहत विकसित CCTV 360 डिग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली की मदद से संभव हो सकी। इस तकनीक ने न केवल संदिग्ध वाहन की पहचान की, बल्कि पूरे अपराध नेटवर्क तक पहुंचने में पुलिस की मदद की।

20 अप्रैल को हुई थी गोदाम में बड़ी चोरी

यह घटना 20 अप्रैल 2026 की तड़के लगभग 3:30 बजे धोन शहर में हुई, जहां ITC सिगरेट गोदाम को निशाना बनाया गया था। अज्ञात चोरों ने गोदाम में सेंध लगाकर बड़ी मात्रा में सिगरेट के कार्टन चोरी कर लिए और मौके से फरार हो गए थे।

घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था और व्यापारिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

CCTV 360 और AI तकनीक से मिली अहम सफलता

जांच के दौरान पुलिस ने आधुनिक CCTV 360 सर्विलांस सिस्टम और AI आधारित एनालिटिक्स का सहारा लिया। इसी तकनीक के जरिए संदिग्ध गतिविधियों और वाहन की पहचान की गई।

पुलिस ने एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार (रजिस्ट्रेशन नंबर DL1CQ9769) को ट्रैक किया, जो इस चोरी में इस्तेमाल की गई थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने पूरे गिरोह तक पहुंचने की रणनीति तैयार की।

गूटी रोड के पास से हुई गिरफ्तारी

नंद्याल के पुलिस अधीक्षक Suneel Sheoran ने बताया कि आरोपियों को बुधवार को धोन शहर के बाहरी इलाके में रुद्राक्ष गुंटा के पास गूटी रोड पर गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई विशेष पुलिस टीमों द्वारा की गई, जिनमें धोन टाउन पुलिस और क्राइम कंट्रोल स्टेशन (CCS) नंद्याल के अधिकारी शामिल थे। पूरी जांच की निगरानी धोन डीएसपी P Srinivas कर रहे थे।

राजस्थान से जुड़ा अंतर-राज्यीय अपराध गिरोह

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी राजस्थान के पाली जिले से जुड़े एक संगठित अपराध गिरोह के सदस्य हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लक्ष्मण राम कुमावत (45), गन श्याम उर्फ गन पथ (45) और मानक चंद कुमावत (35) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी पाली जिले के सोजत और जैतारण क्षेत्रों से संबंधित हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह तेलंगाना, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कई चोरी की घटनाओं में शामिल रहा है।

पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे

पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने एक फरार साथी के साथ मिलकर धोन के गोदाम में सेंध लगाई थी। चोरी किए गए सिगरेट के कार्टन को बाद में हैदराबाद ले जाकर बेच दिया गया और उससे प्राप्त रकम को आपस में बांट लिया गया।

जांच में यह भी पता चला कि यह गिरोह कडप्पा शहर में दर्ज चार अन्य चोरी मामलों में भी शामिल रहा है। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि अन्य वारदातों का भी खुलासा किया जा सके।

भारी नकदी और वाहन बरामद, अवैध शराब भी मिली

पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹14,01,500 नकद बरामद किए हैं, जिसे अपराध से प्राप्त आय माना जा रहा है। इसके अलावा चोरी में इस्तेमाल की गई मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार भी जब्त कर ली गई है।

तलाशी के दौरान पुलिस को 45 लीटर अवैध देशी शराब भी मिली है, जिसे जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।

फरार आरोपी की तलाश तेज

पुलिस ने बताया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। साथ ही चोरी किए गए अन्य सामान की बरामदगी के प्रयास भी जारी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है।

RTGS और स्मार्ट पुलिसिंग की बड़ी सफलता

यह मामला आंध्र प्रदेश की रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) और स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल की सफलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

Real Time Governance Society के तहत लागू CCTV 360 और AI आधारित सिस्टम ने अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग को बेहद तेज और प्रभावी बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के कारण अंतर-राज्यीय अपराधों पर नियंत्रण में अब पहले से कहीं अधिक मदद मिल रही है और पुलिस को निर्णायक सुराग जल्दी मिल रहे हैं।

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