खगड़िया के अगुवानी घाट पर प्रशासन ने शाम के बाद नाव परिचालन बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हाल ही में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद इस घाट पर लोगों की आवाजाही अचानक काफी बढ़ गई है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, शाम ढलने के बाद नदी में नाव परिचालन जोखिम भरा साबित हो सकता है। बढ़ती भीड़, तेज बहाव और रात के समय कम दृश्यता को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि लोगों की जान जोखिम में डालकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की जाएगी।
अगुवानी घाट पर पिछले कुछ दिनों से यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग नदी पार करने के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक घाट पर लंबी कतारें लग रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले घाट पर इतनी भीड़ नहीं होती थी, लेकिन पुल प्रभावित होने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। कई बार नावों में क्षमता से ज्यादा लोगों के बैठने की कोशिश भी की जा रही थी, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया था।
प्रशासन ने नाव चालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय क्षमता से अधिक यात्रियों को नाव पर न बैठाया जाए। लाइफ जैकेट और सुरक्षा मानकों का पालन करने को भी अनिवार्य किया गया है।
बिहार में हाल के दिनों में नदी घाटों पर सुरक्षा को लेकर प्रशासन काफी सतर्क नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून और मौसम में बदलाव के कारण नदी का जलस्तर और बहाव अचानक बदल सकता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
घाट पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। शाम होते ही घाट पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी जाती है ताकि निर्धारित समय के बाद कोई नाव नदी में न उतरे।
स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों का कहना है कि नाव परिचालन बंद होने से कुछ लोगों को परेशानी जरूर होगी, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह फैसला जरूरी है। कई लोगों ने प्रशासन के निर्णय का समर्थन किया है।
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के कारण भागलपुर और आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। इसका असर व्यापार, यातायात और रोजमर्रा के आवागमन पर भी पड़ रहा है। कई लोग वैकल्पिक रास्तों और नावों के जरिए सफर करने को मजबूर हैं।
विक्रमशिला सेतु को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।










