AI Jobs Impact Report: अगले 10 साल में बदलेगा Job Market, लेकिन बड़े पैमाने पर नहीं जाएंगी नौकरियां|

Goldman Sachs की रिपोर्ट के अनुसार AI अगले 10 वर्षों में जॉब मार्केट बदलेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंका फिलहाल कम है।

Goldman Sachs की नई रिपोर्ट के अनुसार AI आने वाले वर्षों में जॉब मार्केट को बदलेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंका फिलहाल कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।

Tech: AI Jobs Impact को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच Goldman Sachs की नई रिपोर्ट ने राहत भरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले दशक में रोजगार बाजार को जरूर प्रभावित करेगा, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की आशंका फिलहाल उतनी गंभीर नहीं है, जितनी अक्सर बताई जाती है।

AI बदलेगा काम करने का तरीका, लेकिन नहीं आएगा जॉब संकट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग को लेकर दुनिया भर में यह चिंता बनी हुई है कि क्या आने वाले वर्षों में मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी। हालांकि Goldman Sachs की नई रिपोर्ट "An AI Job Apocalypse" इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानती। रिपोर्ट के अनुसार AI निश्चित रूप से कई क्षेत्रों में काम करने के तरीके को बदलेगा, लेकिन इससे अचानक बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म होने की संभावना कम है।

AI Jobs Impact Report: अगले 10 साल में बदलेगा Job Market, लेकिन बड़े पैमाने पर नहीं जाएंगी नौकरियां|

रिपोर्ट में शामिल अर्थशास्त्रियों और AI विशेषज्ञों का मानना है कि AI कुछ पारंपरिक भूमिकाओं को प्रभावित करेगा, लेकिन इसके साथ ही नई तरह की नौकरियां और स्किल आधारित अवसर भी पैदा होंगे। इसलिए इसका असर केवल नकारात्मक नहीं होगा।

अगले 10 वर्षों में कैसा रहेगा असर?

Goldman Sachs के सीनियर ग्लोबल इकोनॉमिस्ट जोसेफ ब्रिग्स का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों के AI ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की कुल वर्कफोर्स का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद उनका मानना है कि यह बदलाव स्थायी नहीं होगा और समय के साथ लेबर मार्केट खुद को नई परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेगा।

वहीं MIT के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री डैरन एसेमोग्लू का कहना है कि अगले पांच वर्षों में AI का रोजगार पर सीमित नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां AI का उपयोग कर्मचारियों को बदलने के लिए करती हैं या उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए।

AI अपनाने में अभी भी हैं कई चुनौतियां

MIT के कंप्यूटर साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब से जुड़े विशेषज्ञ नील थॉम्पसन के अनुसार AI की तकनीकी क्षमता जितनी प्रभावशाली दिखाई देती है, उसका वास्तविक असर उससे कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि अभी भी विश्वसनीयता, डेटा की उपलब्धता, लागत और बड़े स्तर पर तकनीक को लागू करने जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं।

उन्होंने AI की तुलना एक ऐसी लहर से की है जो धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। इससे कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को नई तकनीक के अनुरूप खुद को तैयार करने का समय मिलेगा।

युवाओं और व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों पर रहेगा ज्यादा असर

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI का प्रभाव सभी पेशों पर समान नहीं होगा। शुरुआती दौर में व्हाइट-कॉलर प्रोफेशन और कम अनुभव वाले युवा कर्मचारियों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी तक ऐसे पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं कि AI ने हाल ही में ग्रेजुएट हुए युवाओं के रोजगार अवसरों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI के साथ काम करने की क्षमता, नई डिजिटल स्किल और लगातार सीखने की आदत रोजगार बाजार में सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि सरकारें, कंपनियां और शैक्षणिक संस्थान स्किल डेवलपमेंट पर निवेश बढ़ाते हैं, तो AI केवल नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक नहीं बल्कि नए रोजगार और बेहतर उत्पादकता का माध्यम भी बन सकता है।

Leave a comment