आगरा के अजय प्रताप सिंह ने सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान 34 असफलताएं देखीं। सात साल तक लगातार मेहनत और रणनीति में बदलाव के बाद उन्होंने 35वें प्रयास में CAPF परीक्षा में 392वीं रैंक हासिल कर सफलता पाई।
Ajay Pratap Singh Success Story: उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी अजय प्रताप सिंह की सरकारी नौकरी की तैयारी आसान नहीं रही। मैकेनिकल इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने प्राइवेट नौकरी के बजाय अफसर बनने का लक्ष्य चुना। UPSC, UPPSC, MPPSC समेत कई परीक्षाओं में 34 बार असफल होने के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार 35वें प्रयास में CAPF Assistant Commandant बनकर अपना सपना पूरा किया।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग के बाद चुना अफसर बनने का रास्ता
अजय प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के आगरा के रहने वाले हैं। उन्होंने 2018 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उस समय उनके कई साथी कॉलेज प्लेसमेंट के जरिए अच्छी प्राइवेट नौकरियों और सैलरी पैकेज की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन अजय ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने प्राइवेट जॉब के बजाय सरकारी सेवा में जाने और अफसर बनने का लक्ष्य तय किया।
अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कॉलेज प्लेसमेंट छोड़ दिया और दिल्ली चले गए। यहां उन्होंने सिविल सर्विस समेत दूसरी सरकारी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। हालांकि, आगे का सफर उनकी उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रहा और उन्हें लगातार कई असफलताओं का सामना करना पड़ा।
34 बार मिली असफलता, लेकिन नहीं छोड़ी तैयारी
सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश में अजय को UPSC, UPPSC, MPPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में कई बार असफलता मिली। कुल मिलाकर वह 34 परीक्षाओं में फेल हुए। लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया।

एक समय उत्तर प्रदेश SI भर्ती के फिजिकल टेस्ट में भी उन्हें महज 1.5 सेंटीमीटर हाइट कम होने की वजह से बाहर होना पड़ा। वहीं CAPF Assistant Commandant के फिजिकल टेस्ट में रस्सी चढ़ने के दौरान वह एक फ्रैक्शन ऑफ सेकंड से पीछे रह गए। लगातार असफलताओं के बावजूद अजय ने इन्हें अपनी कमजोरी मानने के बजाय उनसे सीखने की कोशिश की।
उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया और हर परीक्षा के अनुभव को अगली कोशिश के लिए इस्तेमाल किया। दिल्ली में तैयारी के दौरान उन्होंने परीक्षाओं की एक क्रोनोलॉजिकल लिस्ट तैयार की। इसके साथ ही आंसर राइटिंग, टाइम मैनेजमेंट और लगातार सेल्फ असेसमेंट पर ध्यान दिया।
मां को परेशान देखकर लिया अफसर बनने का संकल्प
अजय की सफलता के पीछे उनके परिवार की भूमिका भी अहम रही। उन्होंने बताया कि उनकी मां सरकारी अस्पताल में नर्स हैं। एक बार प्रशासनिक काम से जुड़ी परेशानियों के कारण उन्होंने अपनी मां को रोते हुए देखा था। इस घटना ने अजय के मन पर गहरा असर डाला और उन्होंने तय किया कि वह एक दिन खुद अफसर बनकर लोगों की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने की कोशिश करेंगे।
असफलताओं के लंबे दौर में उनके पिता के शब्दों ने भी उनका हौसला बढ़ाया। CAPF Assistant Commandant के फिजिकल टेस्ट में मामूली अंतर से असफल होने के बाद पिता ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह यह परीक्षा जरूर पास करेंगे, लेकिन शायद उस दिन उनका समय नहीं था।
इन शब्दों ने अजय को फिर से तैयारी में जुटने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपनी कमियों पर काम किया और अगले प्रयास के लिए खुद को तैयार किया।
35वें प्रयास में मिली बड़ी सफलता
एक साल बाद अजय ने दोबारा CAPF Assistant Commandant परीक्षा के फिजिकल टेस्ट में हिस्सा लिया। इस बार उन्होंने पिछली असफलता से मिले अनुभव को ध्यान में रखते हुए बेहतर प्रदर्शन किया और फिनिश लाइन पार कर ली।
लगातार 34 असफलताओं के बाद 35वें प्रयास में मिली सफलता उनके लिए खास रही। उन्होंने CAPF Assistant Commandant परीक्षा में 392वीं रैंक हासिल की और अफसर बनने का सपना पूरा किया।
अजय की कहानी बताती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में असफलता के बाद रणनीति बदलना और लगातार प्रयास करते रहना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। सात साल तक लक्ष्य पर टिके रहने के बाद मिली यह सफलता उन उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बावजूद सरकारी नौकरी की तैयारी जारी रखे हुए हैं।













