अजमेर में ई-रिक्शा चालकों ने कैरियर हटाने और 1000 रुपए चालान के विरोध में प्रदर्शन किया। चालकों का कहना है कि कैरियर हटने से यात्रियों का सामान ले जाना मुश्किल होगा और उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होगी। प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी दी गई।
अजमेर: राजस्थान के Ajmer में ई-रिक्शा चालकों और यातायात विभाग के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। शहर में ई-रिक्शाओं की छत पर लगे कैरियर हटाने के निर्देश और उल्लंघन करने पर 1000 रुपये जुर्माने की चेतावनी के खिलाफ बड़ी संख्या में चालक सड़कों पर उतर आए।
ई-रिक्शा चालकों ने प्रशासन के फैसले के विरोध में रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि ई-रिक्शाओं से कैरियर हटा दिए गए, तो यात्रियों के सामान ले जाने में भारी परेशानी होगी और इससे उनके रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।
कैरियर हटाने पर जताई नाराजगी
स्थानीय संगठन Kranti Sena Samiti के बैनर तले हुए प्रदर्शन में शामिल चालकों ने कहा कि यातायात विभाग द्वारा लगातार चेतावनी दी जा रही है कि ई-रिक्शा की छत पर लगे कैरियर हटाए जाएं, अन्यथा चालान काटा जाएगा।
चालकों के अनुसार ई-रिक्शा में सीमित जगह होने के कारण यात्रियों का अतिरिक्त सामान छत पर लगे कैरियर में रखा जाता है। उनका कहना है कि यह सुविधा हटने से रोजमर्रा की सवारी व्यवस्था प्रभावित होगी।
ई-रिक्शा ड्राइवरों का आरोप है कि प्रशासन ने इस फैसले से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की और न ही उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझने की कोशिश की।
कलेक्ट्रेट तक निकाली गई रैली
विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक रैली के रूप में शहर की सड़कों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई रोकने की मांग की।
![]()
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे क्रांति सेना समिति के राजस्थान प्रमुख Lokesh Singh Chauhan ने कहा कि प्रशासन को ई-रिक्शा चालकों की आर्थिक स्थिति और उनकी कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
रोजगार पर पड़ेगा असर
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि कई यात्री बाजार, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से भारी सामान लेकर यात्रा करते हैं। ऐसे में कैरियर उनके लिए जरूरी सुविधा है।
चालकों का तर्क है कि यदि सामान रखने की जगह खत्म हो गई, तो यात्री वैकल्पिक साधनों की ओर जा सकते हैं, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित होगी।
कुछ चालकों ने यह भी कहा कि शहर में पहले से बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईंधन व रखरखाव लागत के बीच यह नया नियम उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
प्रशासन और यूनियन के बीच पहले भी हुई थी बातचीत
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि ई-रिक्शा यूनियन पहले भी शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन और पुलिस का सहयोग करती रही है।
यूनियन ने कथित तौर पर शहर में ई-रिक्शा स्टैंड विकसित करने के लिए कई स्थानों की सूची प्रशासन को सौंपी थी, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चालकों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में यातायात व्यवस्था सुधारना चाहता है, तो पहले उचित स्टैंड, पार्किंग और संचालन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
शहरी परिवहन में बढ़ती भूमिका
भारत के कई शहरों में ई-रिक्शा कम दूरी के परिवहन का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाले इस परिवहन माध्यम ने हजारों लोगों को रोजगार भी दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी ट्रैफिक के बीच ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का अहम हिस्सा बन रहे हैं। हालांकि सुरक्षा मानकों, यातायात नियमों और संरचनात्मक बदलावों को लेकर कई शहरों में बहस जारी है।
यातायात सुरक्षा बनाम रोजगार का सवाल
यातायात विभाग का मानना है कि अतिरिक्त कैरियर सड़क सुरक्षा और वाहन संतुलन के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं। वहीं चालक इसे रोजमर्रा के कामकाज की जरूरत बता रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के विवादों में प्रशासन और परिवहन यूनियनों के बीच संतुलित समाधान जरूरी होता है, ताकि सुरक्षा और रोजगार दोनों प्रभावित न हों।
आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के बाद ई-रिक्शा चालकों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने जुर्माने और कैरियर हटाने की कार्रवाई वापस नहीं ली, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन शहर में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।







