असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख रुपये की मदद की मांग, अखिल गोगोई ने PM मोदी को लिखा पत्र

असम के विधायक अखिल गोगोई ने PM मोदी से शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और पीड़ितों को 10 लाख रुपये देने की मांग की है।

असम के विधायक अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट की विनाशकारी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार और कारोबारी प्रतिष्ठान को 10 लाख रुपये सहायता देने की अपील की।

गुवाहाटी: असम में लगातार बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद और पुनर्वास को लेकर सियासी मांग तेज हो गई है। शिवसागर से रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार से प्रत्येक प्रभावित परिवार और कारोबारी प्रतिष्ठान को 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की अपील की है।

गोगोई ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में प्रभावित इलाकों के तत्काल राहत कार्य, पुनर्वास और लंबे समय के पुनर्निर्माण के लिए 22 सूत्रीय मांगपत्र रखा है। उनका कहना है कि बाढ़ से प्रभावित समुदायों को सामान्य स्थिति में लौटने के लिए केवल तत्काल राहत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि आवास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और आजीविका की बहाली के लिए व्यापक योजना की जरूरत है।

तीन जिलों में बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग

अखिल गोगोई ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में बाढ़ से हुई तबाही की गंभीरता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों के घरों, दुकानों, कृषि गतिविधियों और स्थानीय बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है।

विधायक के मुताबिक, नुकसान का स्तर इतना व्यापक है कि राज्य सरकार के सीमित संसाधनों के आधार पर प्रभावित परिवारों का पूरी तरह पुनर्वास करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए उन्होंने केंद्र से विशेष आर्थिक पैकेज और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

हर प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये देने की मांग

गोगोई की प्रमुख मांगों में प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल है। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित कारोबारी प्रतिष्ठानों और उद्यमों के लिए भी समान स्तर की वित्तीय मदद की मांग रखी है।

उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है और छोटे कारोबारियों के सामने दोबारा अपना काम शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में राहत राशि केवल तत्काल जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को अपनी आर्थिक गतिविधियां फिर से शुरू करने में मदद करनी चाहिए।

जुलाई की बाढ़ की जांच के लिए CBI जांच की मांग

अखिल गोगोई ने 19 जुलाई को आई बाढ़ के कारणों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की मांग भी की है। उन्होंने अपने पत्र में बाढ़ की गंभीरता के पीछे पर्यावरणीय और मानवीय गतिविधियों की भूमिका की जांच की आवश्यकता बताई।

गोगोई ने असम-नागालैंड सीमा के आसपास कथित अवैध कोयला खनन और डिकोह नदी से बड़े पैमाने पर कथित रेत एवं पत्थर खनन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की भी जांच होनी चाहिए।

हालांकि, ये आरोप विधायक द्वारा उठाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। प्रस्तावित जांच का उद्देश्य यदि स्वीकार किया जाता है तो बाढ़ के कारणों और कथित अवैध गतिविधियों के बीच संभावित संबंध की पड़ताल करना होगा।

डिकोह नदी और खनन गतिविधियों पर सवाल

गोगोई ने डिकोह नदी में कथित रूप से बड़े पैमाने पर रेत और पत्थर निकालने की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि नदियों और उनके आसपास होने वाली अनियंत्रित गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं।

उन्होंने केंद्र से इस पूरे मामले की जांच कराने और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

असम जैसे बाढ़ प्रभावित राज्य में नदियों, तटबंधों, जल निकासी व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। हर साल मानसून के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ और कटाव से बड़ी आबादी प्रभावित होती है।

राहत के साथ दीर्घकालिक पुनर्निर्माण पर जोर

अखिल गोगोई ने अपने 22 सूत्रीय मांगपत्र में केवल तत्काल आर्थिक सहायता तक बात सीमित नहीं रखी है। उन्होंने प्रभावित इलाकों के पुनर्वास और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया।

उनके मुताबिक, बाढ़ के बाद सरकार को घरों और सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत के साथ-साथ प्रभावित लोगों की आजीविका बहाल करने पर भी ध्यान देना चाहिए। कृषि, छोटे कारोबार और स्थानीय रोजगार बाढ़ से प्रभावित होने की स्थिति में पुनर्वास योजना में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की जरूरत होगी।

गोगोई ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी रेखांकित की। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर हुई तबाही से निपटने के लिए प्रशासनिक संसाधनों के साथ पर्याप्त वित्तीय सहायता भी जरूरी है।

बार-बार आने वाली बाढ़ बनी बड़ी चुनौती

असम में बाढ़ हर साल बड़ी संख्या में लोगों के लिए चुनौती बनती है। मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने, तटबंधों पर दबाव और नदी कटाव के कारण कई इलाकों में लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है।

बाढ़ का असर केवल आवासीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता। सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और कृषि भूमि भी प्रभावित होती हैं। इसके चलते प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ लंबे समय तक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में गोगोई ने केंद्र सरकार से असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष हस्तक्षेप की मांग की है।

केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

शिवसागर विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित तीनों जिलों की स्थिति का गंभीरता से आकलन कर विशेष राहत और पुनर्निर्माण पैकेज उपलब्ध कराए।

उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता मिलने से वे अपने घरों और आजीविका को दोबारा खड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। उन्होंने केंद्र से बाढ़ की परिस्थितियों और कथित मानवीय कारणों की जांच कराने की भी मांग की है।

राजनीतिक मांग के साथ जवाबदेही का मुद्दा

अखिल गोगोई की मांग में राहत और पुनर्वास के साथ जवाबदेही का मुद्दा भी प्रमुख है। उन्होंने कथित अवैध खनन और नदी से संसाधनों के अनियंत्रित दोहन की जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि मानवीय गतिविधियों ने बाढ़ के प्रभाव को बढ़ाने में भूमिका निभाई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और असम प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल गोगोई का पत्र बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए बड़े आर्थिक पैकेज, पुनर्वास और कथित पर्यावरणीय उल्लंघनों की जांच की मांग को सामने लाता है।

Leave a comment