उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में करणी सेना के युवा जिला अध्यक्ष सचिन राघव के साथ हुई मारपीट के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। घटना के विरोध और कार्रवाई की मांग को लेकर सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया, जिसके बाद शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी कूड़ा उठाने वाले वाहनों के साथ सिविल लाइन थाने पहुंचे और थाने का घेराव किया। कर्मचारियों की मांग है कि दूसरे पक्ष के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाए और पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए युवकों को छोड़ा जाए। हड़ताल के कारण कई इलाकों में कूड़ा उठान प्रभावित हुआ और लोगों को सड़कों के किनारे कचरा जमा होने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत 15 सितंबर को हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार करणी सेना के युवा जिला अध्यक्ष सचिन राघव की ओर से यूजीसी रोलबैक के मुद्दे को लेकर वाल्मीकि समाज के प्रति कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी किए जाने के बाद विरोध शुरू हुआ। वाल्मीकि समाज के लोगों ने टिप्पणी को लेकर कार्रवाई की मांग की थी। इसी विवाद के बीच सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अंबेडकर पार्क के पास सचिन राघव के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने की घटना सामने आई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और चर्चा में आ गया।
वायरल वीडियो में भीड़ के बीच सचिन राघव के साथ मारपीट होती दिखाई देने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान उनसे माफी मांगने के लिए कहा गया और नारे भी लगवाए गए। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है और घटना में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
इसी कार्रवाई के बाद सफाई कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम में दूसरे पक्ष की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर सफाई कर्मचारी काम पर नहीं गए और कूड़ा उठाने वाले वाहनों को लेकर सिविल लाइन थाने पहुंच गए। कई वाहन थाने के बाहर खड़े कर दिए गए, जिससे शहर में कूड़ा उठाने की व्यवस्था प्रभावित हुई।
गुरुवार सुबह से सफाई व्यवस्था पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगा। जिन इलाकों में सामान्य तौर पर नगर निगम के कर्मचारी घरों और सड़कों से कूड़ा उठाते हैं, वहां कूड़ा नहीं उठ सका। कई जगह लोगों ने कचरा सड़क किनारे डाल दिया। यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है तो शहर के अलग-अलग हिस्सों में कूड़ा जमा होने से सफाई व्यवस्था को लेकर और परेशानी बढ़ सकती है। फिलहाल कर्मचारियों का ध्यान पुलिस कार्रवाई और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर है।
सफाई कर्मचारियों के थाने पहुंचने के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारी यह मांग कर रहे हैं कि घटना में शामिल दूसरे पक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा जिन युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, उनकी रिहाई की मांग भी प्रदर्शनकारियों की ओर से की जा रही है। पुलिस की ओर से मामले में उपलब्ध वीडियो, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाने की बात सामने आई है।
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग घटनाक्रम सामने आए हैं। एक ओर करणी सेना के पदाधिकारी के साथ मारपीट का मामला है, जिस पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। दूसरी ओर इस घटना के विरोध में सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन और काम बंद करना है। दोनों घटनाओं को जोड़कर देखने के बजाय पुलिस प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। फिलहाल मारपीट में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है।
मामले का असर अब केवल विवादित टिप्पणी और मारपीट तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव शहर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कूड़ा उठाने वाले वाहन थाने के बाहर खड़े रहे और नियमित कूड़ा संग्रह प्रभावित हुआ। ऐसे में स्थानीय लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। शहर में पहले से जमा कचरे के बीच अगर सफाई व्यवस्था जल्द बहाल नहीं हुई तो कई मोहल्लों में स्थिति और खराब हो सकती है।
पुलिस के लिए इस मामले में चुनौती यह भी है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना की वास्तविक परिस्थितियों और उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पहचान की जाए। पुलिस ने वीडियो के अलावा सीसीटीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की है। इसके आधार पर आरोपियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। किसी व्यक्ति की भूमिका केवल वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी के आधार पर तय नहीं की जा सकती, इसलिए जांच में जुटाए जा रहे साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
विवाद की शुरुआत कथित टिप्पणी से हुई थी। वाल्मीकि समाज से जुड़े लोगों ने टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद करणी सेना के पदाधिकारी के साथ मारपीट की घटना सामने आई। अब दोनों पक्षों के बीच तनाव को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। रोजाना घरों और बाजारों से उठने वाला कचरा समय पर नहीं उठने के कारण जगह-जगह जमा होने लगा है। कूड़ा उठाने वाले वाहनों के चालकों के भी हड़ताल में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में नगर क्षेत्र में नियमित सफाई का काम बाधित हुआ है। कर्मचारियों की मांगों और पुलिस कार्रवाई को लेकर समाधान निकलने तक सफाई व्यवस्था सामान्य होने में समय लग सकता है।
फिलहाल पुलिस ने करणी सेना पदाधिकारी के साथ मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। घटना से जुड़े वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। दूसरी ओर सफाई कर्मचारी थाने का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे दूसरे पक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और हिरासत में लिए गए युवकों को छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
अलीगढ़ में सामने आया यह विवाद अब पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन गया है। एक तरफ पुलिस को मारपीट की घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करनी है, वहीं दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कर शहर में कूड़ा उठान व्यवस्था को सामान्य करना भी जरूरी है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम में पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों तथा दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर होने की बात सामने आई है।












