अलीगढ़ की बरौली विधानसभा सीट की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मंत्री और बरौली के पूर्व विधायक ठाकुर दलवीर सिंह के छोटे पौत्र विजय सिंह उर्फ पप्पू ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। उन्होंने गुरुवार को लखनऊ में सपा की सदस्यता ग्रहण की। विजय सिंह पिछले कुछ महीनों से समाजवादी पार्टी के स्थानीय और प्रदेश स्तर के नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे थे। उनके सपा में शामिल होने के बाद बरौली विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
विजय सिंह के सपा में शामिल होने की खबर ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। बरौली सीट पर लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक परिवारों और नेताओं की सक्रियता रही है। विजय सिंह के परिवार की भी इस क्षेत्र की राजनीति में पुरानी पकड़ रही है। उनके दादा ठाकुर दलवीर सिंह ब्लॉक प्रमुख से लेकर विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दलवीर सिंह चार बार विधायक रहे हैं। परिवार की इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण विजय सिंह के सपा में आने को बरौली की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विजय सिंह के पिता ठाकुर राकेश सिंह और उनकी माता पुष्पलता भी चंडौस ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। इस तरह विजय सिंह ऐसे राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिसकी क्षेत्र में लंबे समय से मौजूदगी रही है। उनके बड़े भाई अजय सिंह भी बरौली क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं। अब छोटे भाई विजय सिंह के सपा में शामिल होने से परिवार की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
विजय सिंह के सपा में जाने से पहले भी बरौली विधानसभा सीट पर उनके परिवार की राजनीतिक दावेदारी सामने आती रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके बड़े भाई अजय सिंह का नाम भाजपा के संभावित टिकट दावेदारों में शामिल था। उस समय भाजपा नेतृत्व ने बरौली से अजय सिंह को टिकट नहीं दिया था और पूर्व मंत्री जयवीर सिंह को उम्मीदवार बनाया था। भाजपा के तत्कालीन टिकट चयन की खबरों में भी अजय सिंह को दावेदारों में शामिल बताया गया था।
2022 के चुनाव में बरौली सीट से भाजपा ने ठाकुर जयवीर सिंह को उम्मीदवार बनाया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा आधिकारिक सदस्य सूची में भी बरौली विधानसभा क्षेत्र से जयवीर सिंह का नाम भाजपा विधायक के तौर पर दर्ज है। इसका मतलब है कि फिलहाल बरौली सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के पास है।
विजय सिंह के सपा में आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में बरौली से सपा का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि अभी इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अमर उजाला की रिपोर्ट में भी उनके सपा में शामिल होने के बाद बरौली से टिकट मिलने की चर्चाओं का उल्लेख किया गया है, लेकिन टिकट को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा। इसलिए फिलहाल विजय सिंह को सपा का संभावित चेहरा कहा जा सकता है, आधिकारिक प्रत्याशी नहीं।
सपा में शामिल होने से पहले विजय सिंह के पार्टी नेताओं के साथ संपर्क में होने की बात सामने आई थी। सपा के अलीगढ़ जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि विजय सिंह दो दिन पहले उनके आवास पर आए थे। वहां पार्टी में शामिल होने को लेकर बातचीत हुई और इसके बाद लखनऊ में उन्होंने औपचारिक रूप से सपा की सदस्यता ग्रहण की।
बरौली विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भी इस घटनाक्रम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। 2022 में यह सीट सपा-रालोद गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोकदल के खाते में थी और प्रमोद गौड़ ने गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। वहीं भाजपा ने जयवीर सिंह को मैदान में उतारा था। आगामी चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच सीटों के बंटवारे और गठबंधन की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए अभी से किसी एक पार्टी के उम्मीदवार या गठबंधन की अंतिम तस्वीर तय मानना उचित नहीं होगा।
विजय सिंह के सपा में शामिल होने के बाद बरौली क्षेत्र में पार्टी के संभावित चेहरे को लेकर चर्चा जरूर बढ़ गई है। हालांकि किसी नेता का किसी पार्टी में शामिल होना और विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। पार्टी में शामिल होने के बाद संगठन में जिम्मेदारी, क्षेत्र में सक्रियता, स्थानीय समीकरण और आगामी चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति जैसे कई पहलू भूमिका निभाते हैं। विजय सिंह को टिकट मिलेगा या नहीं, इस पर अभी सपा की ओर से अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
वहीं भाजपा के लिए भी बरौली सीट पर आगे की रणनीति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। विजय सिंह का सपा में जाना इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि उनका परिवार बरौली क्षेत्र की राजनीति से लंबे समय से जुड़ा रहा है। हालांकि इससे भाजपा के स्थानीय संगठन या चुनावी स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी प्रक्रिया के दौरान ही स्पष्ट होगा।
विजय सिंह के सपा में जाने से उनके परिवार की राजनीतिक दिशा में भी बदलाव दिखाई देता है। उनके दादा ठाकुर दलवीर सिंह भाजपा से जुड़े रहे हैं और परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग स्तर पर चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में विजय सिंह का समाजवादी पार्टी में जाना उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। रिपोर्ट के अनुसार वह पिछले कई महीनों से सपा नेताओं के संपर्क में थे, इसलिए इसे अचानक लिया गया फैसला मानने के बजाय लंबे समय से चल रही राजनीतिक बातचीत के बाद लिया गया कदम बताया जा रहा है।
बरौली विधानसभा क्षेत्र में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव अभी सामने है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता, दलों में नेताओं का आना-जाना और स्थानीय स्तर पर संगठन मजबूत करने की कोशिशें पहले से शुरू हो चुकी हैं। विजय सिंह का सपा में शामिल होना भी इसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है और बरौली सीट को लेकर पार्टी की अंतिम रणनीति क्या रहती है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात फिलहाल स्पष्ट है कि विजय सिंह उर्फ पप्पू ने भाजपा से अलग होकर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उनकी पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि और बरौली क्षेत्र में सक्रियता के कारण उनके दल बदलने की खबर स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बनी है। वहीं 2027 में उन्हें बरौली से टिकट मिलेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। आधिकारिक प्रत्याशी सूची आने के बाद ही इस संबंध में तस्वीर साफ होगी।











