अमेरिका-ईरान तनाव पर ईरानी विदेश मंत्री का बड़ा बयान: “शांति प्रक्रिया में भारत निभा सकता है अहम भूमिका”

अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्रीय शांति और कूटनीतिक समाधान

पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच Seyyed Abbas Araghchi ने शुक्रवार, 15 मई को कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की राह में United States सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी नीतियों और हस्तक्षेप के कारण क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।

World News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच Seyyed Abbas Araghchi ने कहा है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्रीय शांति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका की नीतियां हैं। नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी संकट का सैन्य समाधान नहीं मानता और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान चाहता है।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक समुदाय युद्धविराम की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।

“अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल”

Seyyed Abbas Araghchi ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लंबे संघर्ष के बाद जब अमेरिका को अपने उद्देश्यों में सफलता नहीं मिली, तब उसने बातचीत का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, “लगभग 40 दिनों के संघर्ष के बाद अमेरिका को यह समझ आ गया कि वह ईरान के खिलाफ अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता। इसके बाद उन्होंने बातचीत की बात की। लेकिन हमें अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है।”

अराघची ने दावा किया कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के कई कारण हैं, जबकि अमेरिका के पास ईरान पर अविश्वास करने का कोई ठोस आधार नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अमेरिका-ईरान संबंधों में गहराते अविश्वास को दर्शाता है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता को और जटिल बना दिया है।

“भारत की साख मजबूत, निभा सकता है बड़ी भूमिका”

ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की कूटनीतिक छवि और संतुलित विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के पश्चिम एशिया के लगभग सभी देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, जिससे वह शांति प्रक्रिया में सकारात्मक योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा, “भारत अपनी मजबूत साख और संतुलित कूटनीति के जरिए इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत फारसी खाड़ी के सभी देशों का मित्र है और हम किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं।”

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, भारत की “रणनीतिक संतुलन” की नीति उसे पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में स्थापित कर सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख

Seyyed Abbas Araghchi ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान दुनिया भर के जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन देशों के साथ ईरान युद्ध की स्थिति में होगा, उनके जहाजों को लेकर अलग नीति अपनाई जा सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।

चाबहार पोर्ट पर भारत की सराहना

ईरानी विदेश मंत्री ने भारत और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग के प्रतीक Chabahar Port का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस बंदरगाह के विकास में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अराघची ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई है, लेकिन भविष्य में यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार बन सकता है।

उन्होंने कहा, “चाबहार पोर्ट भारत के लिए एक सुनहरे दरवाजे जैसा है। इसके जरिए भारत मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकता है।” ईरान को उम्मीद है कि भारत इस परियोजना में अपनी भागीदारी जारी रखेगा ताकि क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को और मजबूत किया जा सके।

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