अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर निराशा जताई और कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने अमेरिका में भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ सामने आए नस्लीय बयानों और भेदभाव की घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते और इन्हें व्यापक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सोशल मीडिया और कुछ सार्वजनिक मंचों पर भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों की खबरें चर्चा में हैं। इस मुद्दे ने भारत और अमेरिका के बीच लोगों से जुड़े रिश्तों पर भी नई बहस को जन्म दिया है।
“कुछ लोगों की सोच पूरे समाज की पहचान नहीं”
प्रेस वार्ता के दौरान जब एक पत्रकार ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नस्लीय टिप्पणियों का मुद्दा उठाया, तो रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर देश में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो गलत या आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन उनका व्यवहार किसी पूरे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को केवल कुछ व्यक्तियों के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, “हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं जो ऑनलाइन या सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन इससे पूरे देश की पहचान तय नहीं होती।”
उनके इस बयान को अमेरिका की आधिकारिक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वह यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका में विविधता और समावेशिता अब भी मजबूत मूल्य हैं।
भारतीय समुदाय की अमेरिका में भूमिका की सराहना
रुबियो ने अपने बयान में भारतीय समुदाय की अमेरिका में भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग अमेरिकी समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, चिकित्सा, शिक्षा, स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट सेक्टर में भारतीयों की भूमिका का उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने न केवल आर्थिक विकास में योगदान दिया है, बल्कि सांस्कृतिक विविधता को भी मजबूत किया है।

रुबियो ने यह भी कहा कि भारत से आने वाले प्रवासियों ने अमेरिका में अपनी मेहनत और कौशल के दम पर एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि भारतीय समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान दिया है और यह योगदान लगातार बढ़ रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों को बताया रणनीतिक साझेदारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रुबियो ने भारत और अमेरिका के संबंधों को “वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और उनके बीच सहयोग केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। उनके अनुसार, यह साझेदारी भविष्य में और मजबूत होगी क्योंकि दोनों देशों के हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी इस बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है।
संयुक्त प्रेस वार्ता में दिखी कूटनीतिक एकजुटता
इस संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने व्यापार, रक्षा, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों पक्षों ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में सहयोग और अधिक गहरा होगा।
रुबियो के बयान के दौरान जब उनसे भारतीयों के खिलाफ नस्लीय घटनाओं पर सवाल पूछा गया, तो भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर हल्के मुस्कुराते हुए नजर आए, लेकिन इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई अलग औपचारिक टिप्पणी नहीं दी गई।
अमेरिका की विविधता पर रुबियो का जोर
रुबियो ने अपने बयान में अमेरिका की विविधता को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे अधिक विविध देशों में से एक है, जहां विभिन्न देशों से आए लोग रहते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हमेशा से एक “आव्रजन-आधारित देश” रहा है, और यहां आने वाले लोग देश को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उनके अनुसार, किसी भी तरह के नस्लीय या भेदभावपूर्ण बयान को पूरे समाज की सोच नहीं माना जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर नहीं पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से भारत और अमेरिका के रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इसके उलट यह बयान दोनों देशों के बीच लोगों से जुड़े संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देता है।
भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग, व्यापार और तकनीकी साझेदारी में तेजी से वृद्धि हुई है। खासकर क्वाड (QUAD) जैसे मंचों पर दोनों देश जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं।










