झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा मुख्य बाजार में ज्वेलरी दुकान में हुई दिनदहाड़े लूट की वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। करीब 10 दिन पहले किशुन वर्मा ज्वेलर्स में हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोलकर लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए थे। अब पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी करते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। गिरफ्तार आरोपियों के पास से करीब एक किलो चांदी के आभूषण, हथियार, कारतूस, नकदी, मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई दो बाइक बरामद की गई हैं।
पुलिस के अनुसार, 2 सितंबर को अमड़ापाड़ा बाजार स्थित किशुन वर्मा ज्वेलर्स में तीन हथियारबंद बदमाश पहुंचे थे। बदमाशों ने दुकान में घुसकर हथियार के बल पर लूटपाट की और सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार हो गए। घटना के दौरान फायरिंग किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। वारदात के बाद पूरे बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, बदमाश पल्सर बाइक से दुकान तक पहुंचे थे और वारदात के बाद उसी दिशा में फरार हुए थे।
घटना के बाद अमड़ापाड़ा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। दुकान संचालक के पुत्र आकाश वर्मा के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, लूटे गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामान की अनुमानित कीमत करीब 13.50 लाख रुपये बताई गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, अपराधियों के आने-जाने के रास्ते और घटना के बाद उनके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटानी शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पाकुड़ पुलिस अधीक्षक ने विशेष जांच टीम गठित की। महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में छह टीमों को जांच की जिम्मेदारी दी गई। इन टीमों ने अलग-अलग स्तर पर काम करते हुए मानवीय सूचना के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस की जांच का दायरा पाकुड़ से बाहर दूसरे जिलों तक भी पहुंचा।
जांच के दौरान पुलिस की टीम देवघर जिले तक भी पहुंची थी। शुरुआती कार्रवाई में संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। 4 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया था कि पुलिस की टीम ने देवघर के मोहनपुर थाना क्षेत्र के चितरपोका और रिखिया के सरसा घोरमारा इलाके में संदिग्धों के ठिकानों पर दबिश दी थी। हालांकि, उस समय कुछ संदिग्ध पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए थे।
पुलिस ने इसके बाद जांच को और तेज किया। अलग-अलग जिलों में संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई गई और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। लगातार मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। इसके बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लूट की पूरी योजना कैसे तैयार की गई थी और वारदात में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब एक किलो चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। इसके अलावा पांच ट्रे, दुकान के नाम वाले तीन थैले, आभूषण नापने की मशीन, छह प्लास्टिक के डिब्बे और जेवर गलाने में इस्तेमाल होने वाले पत्थर के दो टुकड़े भी जब्त किए गए हैं। इन सामानों की बरामदगी से पुलिस को लूटे गए आभूषणों को संभालने और आगे खपाने की प्रक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 12,700 रुपये नकद भी बरामद किए हैं। इसके साथ ही काले रंग की पैशन प्रो और पल्सर एन-160 बाइक जब्त की गई हैं। तीन मोबाइल फोन भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इनमें से कौन सी बाइक वारदात में सीधे इस्तेमाल हुई थी और दूसरी बाइक का इस्तेमाल गिरोह के सदस्यों ने रेकी, भागने या चोरी के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किया था।
मामले में हथियार और कारतूस की बरामदगी को भी पुलिस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद हथियार कहां से हासिल किए गए थे और क्या आरोपियों का किसी दूसरे आपराधिक गिरोह से भी संबंध है। यदि जांच में हथियारों का संबंध दूसरे मामलों से सामने आता है तो पुलिस उन मामलों की कड़ियों को भी इस गिरोह से जोड़ सकती है।
अमड़ापाड़ा की इस वारदात ने स्थानीय कारोबारियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी थी। दिनदहाड़े बाजार के बीच स्थित ज्वेलरी दुकान को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ अपराधियों के भागने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाई थी। शुरुआती जांच में यह सामने आया था कि तीनों अपराधी हथियारों से लैस थे और उन्होंने वारदात को बेहद कम समय में अंजाम देने की कोशिश की।
घटना के समय अपराधियों ने दुकान के अंदर मौजूद लोगों को हथियार के बल पर डराया और आभूषण लेकर भाग निकले। कुछ रिपोर्टों में दुकानदार पर गोली चलाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, इस मामले में पुलिस की आधिकारिक जांच के निष्कर्ष को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर लूट की पूरी कहानी और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करना है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि लूट से पहले अपराधियों ने दुकान और बाजार की कितने दिनों तक रेकी की थी। ज्वेलरी दुकान में रखे आभूषणों और दुकान की गतिविधियों के बारे में उन्हें जानकारी कैसे मिली, यह भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। आमतौर पर ऐसी वारदात में अपराधियों को दुकान के खुलने-बंद होने, सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की गतिविधियों की जानकारी पहले से हो सकती है। इसलिए पुलिस रेकी करने वाले संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच का एक अहम पहलू लूटे गए सोने के आभूषणों का पता लगाना भी है। पुलिस ने करीब एक किलो चांदी के आभूषण बरामद कर लिए हैं, लेकिन लूटे गए पूरे सामान की बरामदगी अभी बाकी हो सकती है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बाकी आभूषणों को कहां रखा गया है या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से बेचने की कोशिश तो नहीं की गई। बरामद सामान की पहचान दुकान संचालक और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर की जा सकती है।
आरोपियों के पास से जेवर गलाने से संबंधित सामग्री मिलने के बाद पुलिस इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि क्या लूटे गए आभूषणों की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही थी। आभूषणों को गलाकर उनका स्वरूप बदल देने से चोरी या लूट के सामान की पहचान मुश्किल हो सकती है। हालांकि, इस मामले में आरोपियों ने वास्तव में ऐसा किया था या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
तीन मोबाइल फोन की बरामदगी भी जांच में अहम साबित हो सकती है। पुलिस मोबाइल फोन की तकनीकी जांच और कॉल डिटेल के जरिए आरोपियों के संपर्क में रहने वाले लोगों की पहचान कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि वारदात से पहले और बाद में आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और घटना के बाद किस दिशा में गए थे।
पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास क्या है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में प्रवीण नाम के एक आरोपी पर कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उसके पुराने मामलों और दूसरे आरोपियों के आपसी संबंधों की भी जांच कर रही है।
अमड़ापाड़ा ज्वेलरी लूटकांड की जांच में छह टीमों को लगाया जाना इस बात को दिखाता है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। अलग-अलग टीमों ने तकनीकी साक्ष्य, स्थानीय सूचना और संभावित ठिकानों पर छापेमारी के जरिए जांच को आगे बढ़ाया। पहले कुछ संदिग्धों के हाथ नहीं आने के बावजूद पुलिस ने जांच जारी रखी और आखिरकार तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक पहुंच बनाई।
पुलिस अब गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे ले जाएगी और पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारियों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी। यदि आरोपियों से किसी अन्य ज्वेलरी दुकान, लूट या चोरी की घटना में शामिल होने की जानकारी मिलती है तो पुलिस उन मामलों की भी जांच कर सकती है।
इस पूरे मामले में फिलहाल तीन गिरफ्तारियां और बड़ी मात्रा में सामान की बरामदगी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सफलता है। करीब एक किलो चांदी, हथियार, कारतूस, नकदी, दो बाइक और तीन मोबाइल फोन की बरामदगी से जांच को कई नए सुराग मिले हैं। पुलिस का प्रयास अब केवल अमड़ापाड़ा की इस एक लूट का खुलासा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने का भी है कि आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा है और वे किन-किन इलाकों में सक्रिय रहे हैं।
अमड़ापाड़ा बाजार में हुई इस लूट के बाद जिस तेजी से जांच को आगे बढ़ाया गया और अलग-अलग जिलों में छापेमारी की गई, उससे पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली। हालांकि, लूटे गए सभी आभूषणों की बरामदगी और गिरोह में शामिल बाकी लोगों की गिरफ्तारी के बाद ही मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है।











