जमशेदपुर में बाइक-स्कूटी चोर गिरोह पर SIT का शिकंजा, 5 आरोपी गिरफ्तार; 25 चोरी के वाहन बरामद

मशेदपुर में SIT ने बाइक-स्कूटी चोर गिरोह के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गुड़ाबांदा और मुसाबनी से अब तक 25 चोरी के वाहन बरामद किए गए।
जमशेदपुर में बाइक-स्कूटी चोर गिरोह पर SIT का शिकंजा, 5 आरोपी गिरफ्तार; 25 चोरी के वाहन बरामद
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जमशेदपुर में मोटरसाइकिल और स्कूटी चोरी करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्वी सिंहभूम पुलिस की विशेष अनुसंधान टीम यानी SIT ने जांच को आगे बढ़ाते हुए अब तक 25 चोरी के दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर चोरी के वाहनों की खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क और गिरोह में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में कार्रवाई अभी जारी रहेगी और गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

ग्रामीण एसपी शुभम खंडेलवाल ने शनिवार को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है। पुलिस के सामने यह बात आई कि जमशेदपुर शहर के अलावा जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों और दूसरे इलाकों से भी मोटरसाइकिल और स्कूटी चोरी की जा रही थीं। चोरी किए गए वाहनों को बाद में ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत पर बेचने या दूसरे लोगों के माध्यम से खपाने का प्रयास किया जाता था।

इस पूरे मामले की शुरुआत 24 अगस्त को गुड़ाबांदा थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई से हुई। पुलिस को वाहन चोरी से जुड़े गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई करते हुए 17 चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की थीं। इस दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने बरामद वाहनों और आरोपियों से जुड़े मोबाइल फोन समेत अन्य साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया था।

गुड़ाबांदा में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ में कथित तौर पर वाहन चोरी के तरीके, चोरी के वाहनों को छिपाने वाले ठिकानों और उनकी खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच को केवल एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा और गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश शुरू कर दी।

इसके बाद वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मुसाबनी डीएसपी के नेतृत्व में विशेष अनुसंधान टीम का गठन किया गया। SIT ने मामले में तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ मानवीय सूचना और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस की कोशिश यह पता लगाने की थी कि 17 बाइक की बरामदगी के पीछे केवल स्थानीय स्तर का चोरी का मामला है या इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

जांच के दौरान SIT को सूचना मिली कि मुसाबनी थाना क्षेत्र के कटकी मैदान के आसपास चोरी के वाहनों की खरीद-बिक्री से जुड़े लोग सक्रिय हैं। पुलिस को संदेह था कि चोरी किए गए वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर उनकी पहचान छिपाने के बाद बेचने की कोशिश की जा रही है। सूचना की पुष्टि के बाद SIT ने इलाके में निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।

पुलिस टीम ने इसके बाद कटकी मैदान के पास घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान दो और आरोपियों को पकड़ा गया। इन दोनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस को चोरी के अन्य वाहनों के संबंध में जानकारी मिली। उनकी निशानदेही पर आठ और मोटरसाइकिल तथा स्कूटी बरामद की गईं।

इस तरह गुड़ाबांदा थाना क्षेत्र की पहली कार्रवाई में बरामद 17 वाहनों और मुसाबनी क्षेत्र की आगे की कार्रवाई में मिले आठ वाहनों को मिलाकर अब तक कुल 25 चोरी के वाहन पुलिस के हाथ लगे हैं। इसी जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों की संख्या भी बढ़कर पांच हो गई है। पुलिस अब बरामद सभी वाहनों के कागजात, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और अन्य पहचान संबंधी विवरणों का मिलान संबंधित थाना क्षेत्रों में दर्ज वाहन चोरी के मामलों से कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि कौन सा वाहन कहां से चोरी हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य केवल जमशेदपुर शहर तक सीमित नहीं थे। वे अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जाकर मोटरसाइकिल और स्कूटी को निशाना बनाते थे। चोरी के बाद वाहनों को ऐसे इलाकों में पहुंचाया जाता था, जहां उन्हें कम कीमत पर बेचने में आसानी हो। ग्रामीण इलाकों में चोरी के वाहन कम दाम में बेचने की कोशिश किए जाने से पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क में चोरी करने वालों के अलावा वाहन खरीदने और बेचने वाले दूसरे लोग भी शामिल हो सकते हैं।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी के वाहनों को बेचने के लिए किन लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या वाहनों के नंबर प्लेट बदले जाते थे या उनके दस्तावेजों में किसी तरह की हेराफेरी की जाती थी। हालांकि पुलिस ने इस जांच के सभी पहलुओं को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

वाहन चोरी के मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती चोरी के बाद वाहनों को दूसरे क्षेत्र में पहुंचाकर उनकी पहचान छिपाने वाले नेटवर्क का पता लगाना होती है। किसी शहर से चोरी की गई बाइक यदि दूसरे थाना क्षेत्र या जिले में पहुंच जाती है तो स्थानीय स्तर पर उसके बारे में जानकारी जुटाना कठिन हो सकता है। ऐसे में पुलिस अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों और बरामद वाहनों के विवरण का मिलान कर रही है।

जमशेदपुर और पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में मोटरसाइकिल चोरी की घटनाएं पुलिस के लिए लगातार चुनौती रही हैं। पिछले कुछ समय में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में वाहन चोरी के कई मामले सामने आए हैं और पुलिस ने कई मौकों पर चोरी की बाइक के साथ आरोपियों को पकड़ा है। अगस्त में गुड़ाबांदा से 17 बाइक की बरामदगी भी इसी अभियान का हिस्सा थी। उस कार्रवाई में पुलिस ने बताया था कि गिरोह जमशेदपुर सहित अलग-अलग थाना क्षेत्रों में सक्रिय था।

इस नए खुलासे के बाद पुलिस का फोकस अब केवल बरामद 25 वाहनों तक सीमित नहीं है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि इन वाहनों की चोरी किन-किन स्थानों से की गई थी और चोरी के बाद उन्हें कहां-कहां रखा गया। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह में कितने लोग सीधे चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे और कितने लोग चोरी के वाहनों को खरीदने या बेचने में मदद करते थे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ से मिले सुरागों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और ठिकानों पर छापेमारी हो सकती है। यदि बरामद वाहनों के संबंध में दूसरे जिलों में दर्ज चोरी के मामलों की पुष्टि होती है तो संबंधित जिलों की पुलिस से भी समन्वय किया जा सकता है। इससे गिरोह के नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता लगाने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण एसपी शुभम खंडेलवाल ने संकेत दिया है कि वाहन चोरी के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस का उद्देश्य चोरी की घटनाओं में शामिल लोगों को पकड़ने के साथ-साथ चोरी के वाहनों की खरीद-बिक्री के पूरे नेटवर्क को सामने लाना है। इसके लिए पुलिस तकनीकी जांच, स्थानीय सूचना और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी को आधार बना रही है।

25 चोरी के वाहनों की बरामदगी पुलिस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे एक ही जांच में बड़ी संख्या में चोरी के मामलों को जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। यदि वाहनों के नंबर और अन्य पहचान की जांच के बाद उनके मालिकों का पता चलता है तो पुलिस संबंधित मामलों की कड़ियों को भी जोड़ सकेगी। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि गिरोह किन इलाकों में सबसे ज्यादा सक्रिय था और चोरी के बाद वाहनों को किस रास्ते से आगे पहुंचाया जाता था।

पुलिस की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गिरफ्तार पांच आरोपियों की भूमिका क्या थी। सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी थी या किसी की जिम्मेदारी चोरी करने, किसी की वाहन छिपाने और किसी की बिक्री कराने की थी, इसका पता पूछताछ और जांच के आगे बढ़ने पर चलेगा। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया है और आगे की जांच जारी है।

इस कार्रवाई से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए भी एक बार फिर यह संदेश सामने आता है कि वाहन पार्क करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। भीड़भाड़ वाले स्थानों, बाजारों, कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर बाइक या स्कूटी खड़ी करते समय सुरक्षित पार्किंग और लॉक की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। चोरी होने की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने और वाहन के दस्तावेज उपलब्ध कराने से पुलिस को जांच में मदद मिल सकती है।

जमशेदपुर में SIT की यह कार्रवाई फिलहाल पांच गिरफ्तारियों और 25 बरामद वाहनों तक पहुंची है, लेकिन पुलिस की जांच को देखते हुए मामले में और खुलासे की संभावना बनी हुई है। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, चोरी के वाहनों के संभावित खरीदारों और बिक्री के नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि वाहन चोरी के इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।

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