अंतरराज्यीय एटीएम ठगी गैंग का भंडाफोड़: 6 राज्यों में सक्रिय “मेवात टारगेट गैंग” के तीन आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान: जयपुर की झोटवाड़ा पुलिस ने ‘मेवात टारगेट गैंग’ के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया। यह गैंग 6 राज्यों में एटीएम कार्ड बदलकर ठगी और साइबर फ्रॉड करता था।

झोटवाड़ा पुलिस ने अंतरराज्यीय ‘मेवात टारगेट गैंग’ का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह छह राज्यों में एटीएम कार्ड बदलकर ठगी और साइबर फ्रॉड करता था। पुलिस ने भारी मात्रा में एटीएम कार्ड और नकदी बरामद की।

जयपुर: राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय एटीएम ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो एटीएम कार्ड बदलकर और साइबर तकनीकों का इस्तेमाल कर देश के कई राज्यों में संगठित अपराध को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में गिरोह के सरगना शाकिब उर्फ कालू समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह गिरोह “मेवात टारगेट गैंग” के नाम से सक्रिय था और राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे छह राज्यों में लगातार वारदातों को अंजाम देकर लोगों को निशाना बना रहा था।

98 एटीएम कार्ड और फर्जी सामग्री बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में आपराधिक सामग्री बरामद की है, जिसमें 98 एटीएम/डेबिट कार्ड, वारदात में इस्तेमाल की गई बलेनो कार, नकदी, मोबाइल फोन और फर्जी नंबर प्लेट शामिल हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह अत्यंत संगठित तरीके से काम करता था और हर वारदात के बाद सबूत मिटाने और अलग-अलग राज्यों में छिपने की रणनीति अपनाता था।

शिकायत से शुरू हुई जांच, 700 सीसीटीवी कैमरों की मदद

मामले की शुरुआत 13 मई को हुई, जब झोटवाड़ा निवासी मुकेश मीणा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि एक्सिस बैंक एटीएम में पैसे निकालने के दौरान दो अज्ञात युवकों ने बातचीत में उलझाकर उसका एटीएम कार्ड बदल दिया और बाद में खाते से पैसे निकाल लिए।

इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और करीब 700 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही पुराने एटीएम फ्रॉड मामलों के डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया गया और संदिग्धों की पहचान की गई।

200 किलोमीटर पीछा कर पुलिस ने दबोचे आरोपी

पुलिस ने मुखबिरों की सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर गिरोह की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद पुलिस टीम ने करीब 200 किलोमीटर तक बाइक से पीछा कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शाकिब उर्फ कालू (सरगना), आंदल और ताहिर हुसैन के रूप में हुई है। तीनों हरियाणा के पलवल और नूंह जिलों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

“मेवात टारगेट गैंग” नाम कैसे पड़ा

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का नाम “टारगेट गैंग” इसलिए रखा गया था क्योंकि यह पहले से तय करता था कि किसी भी शहर में कम से कम चार से पांच वारदातें करनी हैं।

यह गिरोह विशेष रूप से कमजोर वर्ग के लोगों—जैसे बुजुर्ग, महिलाएं और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों—को निशाना बनाता था। आरोपी एटीएम बूथ में मदद करने के बहाने घुसते और लोगों को बातचीत में उलझाकर उनका एटीएम कार्ड बदल लेते थे।

एटीएम ठगी का पूरा तरीका

जांच में सामने आया कि गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था। आरोपी पहले एटीएम बूथ के बाहर अपने शिकार की पहचान करते थे। जैसे ही कोई बुजुर्ग या महिला एटीएम में प्रवेश करती, एक आरोपी भी अंदर चला जाता।

वे पीड़ित का पिन नंबर देखने की कोशिश करते और फिर मशीन के इंटरफेस में भ्रम पैदा कर देते थे। इसी दौरान कार्ड बदल दिया जाता था और पीड़ित को पता भी नहीं चलता था।

इसके बाद असली कार्ड का इस्तेमाल कर दूसरे एटीएम से पैसे निकाल लिए जाते थे। यदि कोई व्यक्ति विरोध करता, तो आरोपी जबरन कार्ड छीनकर फरार हो जाते थे।

छह राज्यों में फैला नेटवर्क, दर्जनों मामले स्वीकार

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने राजस्थान के जयपुर, अजमेर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ सहित कई जिलों के अलावा हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करीब 50 से अधिक वारदातें की हैं।

पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था और कई राज्यों में इनके खिलाफ दर्जनों मामले पहले से दर्ज हैं।

गिरोह का आपराधिक इतिहास

गैंग का सरगना शाकिब उर्फ कालू पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुका है। रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ राजस्थान में 16 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

वह पहले भी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में एटीएम फ्रॉड और साइबर ठगी के मामलों में पकड़ा जा चुका है। वर्ष 2022 में उसके पास से 100 से अधिक एटीएम कार्ड और स्वाइप मशीनें बरामद हुई थीं।

अपराध से कमाई और जीवनशैली

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ठगी से प्राप्त पैसों को आपस में बांटता था और उसे महंगे शौक, यात्रा और शहरों में ऐशो-आराम पर खर्च करता था।

आरोपी लगातार अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग शहरों में रहते थे ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके।

पुलिस की आगे की जांच

अधिकारियों के अनुसार अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में बैंकिंग या तकनीकी सहायता देने वाले लोग भी शामिल थे।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की गई रकम किन-किन खातों और माध्यमों से निकाली गई।

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