किशाऊ प्रोजेक्ट एक मुख्यमंत्री की उपलब्धि नहीं: अनुराग ठाकुर का CM सुक्खू पर निशाना; UPI चार्ज पर भी दी प्रतिक्रिया

अनुराग ठाकुर ने किशाऊ परियोजना को छह राज्यों और केंद्र का संयुक्त प्रयास बताया। CM सुक्खू पर श्रेय लेने को लेकर निशाना साधा और UPI चार्ज पर भी प्रतिक्रिया दी।
किशाऊ प्रोजेक्ट एक मुख्यमंत्री की उपलब्धि नहीं: अनुराग ठाकुर का CM सुक्खू पर निशाना; UPI चार्ज पर भी दी प्रतिक्रिया
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हिमाचल प्रदेश में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के उस रुख पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें किशाऊ परियोजना से जुड़े समझौते को हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि किशाऊ प्रोजेक्ट किसी एक मुख्यमंत्री की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार और छह राज्यों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने परियोजना को लेकर किसी एक व्यक्ति को श्रेय दिए जाने पर सवाल उठाया।

अनुराग ठाकुर बुधवार को गगल एयरपोर्ट पहुंचे थे। इसी दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने किशाऊ परियोजना के साथ-साथ डिजिटल भुगतान और UPI शुल्क को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। किशाऊ परियोजना पर उन्होंने कहा कि इस समझौते तक पहुंचने में केंद्र सरकार के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली की भूमिका रही है। 15 सितंबर को इन छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में परियोजना से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। परियोजना को लेकर लंबे समय से राज्यों के बीच सहमति और लागत बंटवारे जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं। अब छह राज्यों के बीच समझौता होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल घटक की करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत राशि सहभागी राज्यों के बीच साझा की जाएगी।

परियोजना के प्रस्तावित लाभों में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इससे करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से 1476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का भी प्रावधान बताया गया है। बांध की प्रस्तावित ऊंचाई करीब 232.6 मीटर और जल भंडारण क्षमता करीब 1562 मिलियन घन मीटर बताई गई है।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि किशाऊ परियोजना पर सहमति केवल हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयासों से नहीं बनी है। उनके अनुसार केंद्र और छह राज्यों के बीच बातचीत और सहमति के बाद यह समझौता संभव हुआ है। उन्होंने इसी आधार पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को परियोजना का पूरा श्रेय देने की धारणा पर आपत्ति जताई। उनके बयान में केंद्र और अन्य सहभागी राज्यों की भूमिका को प्रमुखता दी गई।

उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक श्रेय की बहस से भी जोड़ा। अनुराग ठाकुर ने कहा कि लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने में कई सरकारों और संस्थाओं की भूमिका रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि परियोजना को लेकर श्रेय लेने की राजनीति से बचना चाहिए। यह अनुराग ठाकुर का राजनीतिक बयान है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। परियोजना समझौते में हिमाचल के मुख्यमंत्री सहित सभी छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी दर्ज है।

किशाऊ परियोजना का इतिहास कई दशक पुराना है। अलग-अलग समय पर परियोजना की लागत, पानी के बंटवारे और राज्यों की हिस्सेदारी जैसे विषयों पर सहमति बनाने की कोशिश होती रही। लंबे समय तक इन मुद्दों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब केंद्र की पहल और संबंधित राज्यों के बीच सहमति के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हालांकि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अभी निर्धारित प्रक्रियाओं और मंजूरियों के अगले चरण भी महत्वपूर्ण होंगे।

परियोजना को लेकर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इसका प्रस्तावित उद्देश्य यमुना बेसिन में जल उपलब्धता को बढ़ाना और विभिन्न राज्यों की सिंचाई एवं पेयजल जरूरतों में योगदान देना है। जलविद्युत उत्पादन भी परियोजना का एक अहम हिस्सा है। इसलिए समझौते के बाद अब ध्यान इसके अगले चरण की स्वीकृतियों, वित्तीय व्यवस्था और निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं पर रहेगा।

अनुराग ठाकुर ने बातचीत के दौरान UPI और डिजिटल भुगतान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने डिजिटल लेनदेन को लोगों के लिए सुविधा बढ़ाने वाला बताया और UPI के इस्तेमाल को भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया। उन्होंने कांग्रेस की ओर से UPI शुल्क को लेकर की जा रही आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर लोगों में भ्रम पैदा करने के बजाय नीतियों को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए।

UPI शुल्क का मुद्दा फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का फैसला किया गया है। कुछ क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था और छोटी दुकानों के लिए छूट का प्रावधान भी बताया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे आम ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है।

अनुराग ठाकुर ने UPI को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में डिजिटल लेनदेन से मिलने वाली सुविधा पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत में डिजिटल भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है और इस उपलब्धि को लेकर देश को गर्व होना चाहिए। वहीं UPI शुल्क को लेकर विपक्ष की आलोचना और सरकार की नीति पर बहस अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी व्याख्याओं के साथ सामने आ रही है।

UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर यह अंतर समझना भी जरूरी है कि प्रस्तावित MDR और आम उपभोक्ता से सीधे शुल्क लेने की बात एक जैसी नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक शुल्क का ढांचा मर्चेंट लेनदेन पर लागू किया जाना है और बैंकों तथा UPI सेवा प्रदाताओं को इसे ग्राहकों पर ट्रांसफर करने से रोका गया है। इसलिए इस मुद्दे पर होने वाली राजनीतिक बहस में उपभोक्ता शुल्क और मर्चेंट शुल्क के बीच अंतर महत्वपूर्ण है।

किशाऊ परियोजना और UPI दोनों मुद्दों पर अनुराग ठाकुर की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब हिमाचल प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच विकास परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। किशाऊ परियोजना के मामले में छह राज्यों की भागीदारी है, जबकि UPI शुल्क का मुद्दा पूरे देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ा है। दोनों विषयों को लेकर अनुराग ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी राजनीतिक और नीतिगत प्रतिक्रिया दी।

किशाऊ परियोजना के समझौते के बाद अब इसका अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना को आगे की मंजूरियों के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना है। इसके बाद वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। परियोजना के निर्माण और उससे मिलने वाले संभावित लाभों का वास्तविक असर उसके क्रियान्वयन की गति और निर्धारित योजनाओं के मुताबिक काम पूरा होने पर निर्भर करेगा।

फिलहाल किशाऊ परियोजना को लेकर एक तरफ छह राज्यों के बीच समझौता होने की बात सामने आई है, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इसका श्रेय लेने को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की भूमिका समझौते में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ दर्ज है, जबकि अनुराग ठाकुर ने इसे सामूहिक प्रयास बताते हुए किसी एक मुख्यमंत्री को इसका श्रेय देने पर सवाल उठाया है। दोनों पक्षों के राजनीतिक बयानों के बीच परियोजना की आगे की मंजूरी और क्रियान्वयन पर अब नजर रहेगी।

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