APPSC ग्रुप-1 परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप, CM नायडू ने जांच और सुधार की बात कही

आंध्र प्रदेश CM चंद्रबाबू नायडू ने APPSC ग्रुप-1 परीक्षा में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच और आयोग में सुधार की बात कही।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछली सरकार के दौरान APPSC ग्रुप-1 परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं के कथित गलत मूल्यांकन और नियमों की अनदेखी का दावा करते हुए मामले की व्यापक जांच और आयोग में सुधार की घोषणा की।

अमरावती: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में आयोजित APPSC ग्रुप-1 परीक्षाओं में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। विधानसभा में बोलते हुए नायडू ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को दी गई, जिनकी योग्यता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। मुख्यमंत्री के आरोपों ने राज्य की वरिष्ठ प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती की प्रक्रिया और आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी APPSC की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज कर दी है। नायडू ने कहा कि सरकार पूरे मामले का विस्तृत विश्लेषण कराएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

APPSC में व्यापक सुधार का ऐलान

नायडू ने कहा कि APPSC जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आयोग की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की बात कही। प्रस्तावित सुधारों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, परीक्षा सामग्री की सुरक्षा मजबूत करना और भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना शामिल है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों से सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में ऐसे बदलाव किए जाने चाहिए, जिनसे अभ्यर्थियों को निष्पक्ष और भरोसेमंद चयन प्रक्रिया मिल सके।

2018 की ग्रुप-1 भर्ती का मामला

नायडू ने विधानसभा में 2018 में जारी ग्रुप-1 भर्ती अधिसूचना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें करीब 1.14 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इनमें से 325 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रुप-1 जैसी महत्वपूर्ण सरकारी सेवा में चयन के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने कड़ी मेहनत की थी। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने उम्मीदवारों के हितों और भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए।

उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा संचालन के दौरान निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई और ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे चयन प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी।

मैनुअल और डिजिटल मूल्यांकन को लेकर विवाद

नायडू ने कहा कि ग्रुप-1 परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा था। उनके अनुसार, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने डिजिटल मूल्यांकन के बजाय मैनुअल मूल्यांकन कराने का निर्देश दिया था।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अदालत के समक्ष दायर कुछ हलफनामों में ऐसी स्थिति पैदा हुई, जिससे न्यायालय को कथित तौर पर पूरी जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अदालत के आदेश लागू रहने के दौरान ही इंटरव्यू कराए गए और नियुक्तियां की गईं।

इन आरोपों को लेकर अदालत की कार्यवाही और जांच की प्रक्रिया इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। हाईकोर्ट ने बाद में पूरे मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

मूल्यांकन करने वालों की योग्यता पर सवाल

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और विभागाध्यक्षों जैसे अनुभवी एवं निर्धारित योग्यता वाले विशेषज्ञों से कराया जाना चाहिए था, उनकी जगह कुछ अन्य शिक्षकों, व्याख्याताओं और कथित तौर पर अयोग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी गई।

नायडू ने विधानसभा में आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और सुरक्षा गार्ड जैसे लोगों के नाम भी सामने आए। हालांकि, ये मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोप हैं और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच तथा संबंधित आधिकारिक निष्कर्षों से स्पष्ट होगी।

उन्होंने कहा कि परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी। इसलिए चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

158 लोगों का पैनल, 72 को मूल्यांकन की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री के अनुसार, परीक्षा मूल्यांकन के लिए कुल 158 लोगों का पैनल तैयार किया गया था। इनमें से 72 लोगों को मूल्यांकन का काम सौंपा गया।

नायडू ने आरोप लगाया कि इसके अलावा 25 लोगों को कथित तौर पर अनौपचारिक तरीके से मूल्यांकन की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य 66 मूल्यांकनकर्ताओं ने भी अनौपचारिक तरीके से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया।

इन आरोपों के कारण परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। सरकार अब इस पूरे मामले का विस्तृत परीक्षण करने की बात कह रही है।

पूर्व सरकार पर नायडू का राजनीतिक हमला

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को लेकर पिछली सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान सत्ता में बैठे लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया और APPSC जैसी महत्वपूर्ण संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया।

नायडू ने यह भी कहा कि इस मामले में जिन लोगों से जवाब मांगा जाना चाहिए, वे विधानसभा में मौजूद नहीं थे। उनके बयान के बाद परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है।

हालांकि, पिछली सरकार और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में शामिल सामग्री में उपलब्ध नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक जांच या सक्षम प्राधिकारी की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता।

अभ्यर्थियों की चिंता और निष्पक्ष जांच की जरूरत

ग्रुप-1 जैसी प्रतियोगी परीक्षा राज्य प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसमें चयनित उम्मीदवार भविष्य में प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे में परीक्षा की प्रक्रिया में किसी भी कथित अनियमितता का असर सिर्फ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

इस मामले में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती तथ्यों को स्पष्ट करना और यह सुनिश्चित करना होगी कि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही उन उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण होगा, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा में हिस्सा लिया था।

APPSC सुधारों पर रहेगी नजर

नायडू ने स्पष्ट किया है कि सरकार APPSC में व्यापक सुधार करना चाहती है। इसमें मूल्यांकन व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना, परीक्षाओं में तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा बढ़ाना तथा चयन प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना शामिल हो सकता है।

अब इस मामले में आगे होने वाली जांच, हाईकोर्ट से जुड़े घटनाक्रम और सरकार की प्रस्तावित सुधार प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि जांच में अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकार के सामने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों को सुरक्षित करने की चुनौती भी होगी।

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