E20 पेट्रोल के खिलाफ अरविंद केजरीवाल का पीएम आवास मार्च, दिल्ली पुलिस ने अनुमति से किया इनकार

E20 पेट्रोल के विरोध में अरविंद केजरीवाल ने पीएम आवास तक मार्च का ऐलान किया। दिल्ली पुलिस ने अनुमति से इनकार किया, जबकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

E20 पेट्रोल नीति के विरोध में अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च का ऐलान किया है। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी, जबकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। E20 नीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है।

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल नीति के विरोध में प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम वाहन चालकों और उपभोक्ताओं से जुड़ा जनहित का विषय है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित मार्च के लिए अनुमति नहीं दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।

E20 पेट्रोल के खिलाफ पीएम आवास तक मार्च का ऐलान

अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे 4 अगस्त को दोपहर 12 बजे प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उनके अनुसार, इस दौरान लगभग 100 प्रतिनिधियों का एक समूह उनके साथ रहेगा, जो नागरिकों की ओर से तैयार की गई जनहित याचिकाएं प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सरकार का ध्यान उन शिकायतों की ओर आकर्षित करना है, जो वाहन मालिक E20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर सामने रख रहे हैं।

E20 नीति पर सरकार से सवाल

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार E20 ईंधन को तेजी से बढ़ावा दे रही है, जबकि कई उपभोक्ता इसके उपयोग को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ वाहन मालिकों ने इंजन के प्रदर्शन, माइलेज और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार को इस नीति पर अधिक पारदर्शिता दिखानी चाहिए और आम लोगों की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए।

अमेरिका से इथेनॉल आयात को लेकर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भारत पर अमेरिका से इथेनॉल खरीदने का दबाव बनाया गया है और इसी कारण E20 ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दो लाख हस्ताक्षरों वाली याचिका सौंपने का दावा

केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए समय मांगा था। उनका कहना है कि पत्र का जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री आवास जाकर जनता की मांग पहुंचाने का फैसला किया है।

उन्होंने दावा किया कि लगभग दो लाख नागरिकों के हस्ताक्षरों वाली याचिका प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी। इस याचिका में मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं तथा E20 पेट्रोल की कीमतों पर भी पुनर्विचार किया जाए।

दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा को देखते हुए प्रस्तावित मार्च की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने कहा कि बिना पूर्व अनुमति किसी भी जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की है।

बीजेपी ने लगाया राजनीतिक नाटक का आरोप

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने केजरीवाल के प्रदर्शन को राजनीतिक स्टंट बताया। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करना केवल सुर्खियां बटोरने का प्रयास है।

मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल एक-दूसरे से आगे निकलने की राजनीति कर रहे हैं और कानून-व्यवस्था की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस सुरक्षा कारणों से मार्च रोकती है तो इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं होगा।

E20 पेट्रोल क्या है?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत सरकार ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, कच्चे तेल के आयात में कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के उद्देश्य से E20 मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति अपनाई है।

सरकार का मानना है कि इससे किसानों को गन्ना और अन्य फसलों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने का लाभ मिलेगा तथा ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

E20 को लेकर अलग-अलग राय

E20 पेट्रोल को लेकर विशेषज्ञों और वाहन उद्योग में अलग-अलग मत हैं। कई वाहन निर्माता नई पीढ़ी के वाहनों को E20 के अनुकूल बता चुके हैं, जबकि पुराने मॉडलों के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने इंजनों में लंबे समय तक E20 के उपयोग से प्रदर्शन और ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से वाहनों और ईंधन प्रणाली को इसके अनुरूप बनाया जा रहा है।

राजनीतिक और नीतिगत बहस जारी

E20 पेट्रोल को लेकर अब राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष उपभोक्ताओं की चिंताओं और नीति की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद, सार्वजनिक मंचों और नीति संबंधी चर्चाओं में प्रमुख विषय बना रह सकता है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस की अनुमति न मिलने के कारण यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित मार्च किस रूप में आगे बढ़ता है और सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

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