अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अयोध्या में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG के रीजनल हब की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मिल्कीपुर तहसील के ग्राम पूरे लालखां में स्थित 26 हेक्टेयर यानी करीब 65 एकड़ बंजर भूमि को केंद्रीय गृह मंत्रालय के पक्ष में निशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस जमीन पर NSG का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले को अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजनों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और विशिष्ट अतिथियों की आवाजाही के कारण शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में अयोध्या में NSG के स्थायी क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की योजना को आगे बढ़ाया गया है।
मिल्कीपुर तहसील के पूरे लालखां गांव में दी जाने वाली जमीन करीब 26 हेक्टेयर है, जिसे लगभग 65 एकड़ के बराबर बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस सरकारी भूमि का बाजार मूल्य करीब 16.90 करोड़ रुपये है, लेकिन इसे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को निशुल्क हस्तांतरित किया जाएगा। जमीन का इस्तेमाल NSG के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के लिए किया जाना है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब जमीन के हस्तांतरण से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार की ओर से यह भूमि गृह मंत्रालय के पक्ष में दी जाएगी, जिसके बाद प्रस्तावित NSG केंद्र के निर्माण और अन्य जरूरी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। यानी कैबिनेट की मंजूरी इस परियोजना की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम है, जबकि केंद्र की ओर से आगे की निर्माण संबंधी प्रक्रिया इसके बाद आगे बढ़ेगी।
अयोध्या में NSG का क्षेत्रीय हब बनने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय कम करना है। किसी गंभीर सुरक्षा चुनौती या आतंकवाद से जुड़ी घटना की स्थिति में विशेष रूप से प्रशिक्षित NSG कमांडो की जरूरत पड़ सकती है। क्षेत्रीय केंद्र की मौजूदगी से ऐसी परिस्थितियों में बल को अपेक्षाकृत कम समय में संबंधित क्षेत्र तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। सरकार के अनुसार, इससे अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया जा सकेगा।
अयोध्या में पहले से भी NSG से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक कैंट क्षेत्र के मीरनघाट में करीब आठ एकड़ नजूल भूमि NSG सेंटर के लिए पहले दी जा चुकी है और वहां निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। अब मिल्कीपुर में 65 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित क्षेत्रीय हब इस सुरक्षा ढांचे को और विस्तार देगा।
राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर कई स्तरों पर काम किया गया है। मंदिर परिसर के अलावा शहर में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या, प्रमुख धार्मिक स्थलों, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था लगातार बढ़ाई जा रही है। NSG के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना इसी व्यापक सुरक्षा ढांचे का हिस्सा होगी।
इस फैसले का असर केवल अयोध्या तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। क्षेत्रीय हब होने के कारण आसपास के संवेदनशील इलाकों में भी आवश्यकता पड़ने पर NSG की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी विशेष परिस्थिति में NSG की तैनाती और ऑपरेशन की प्रक्रिया संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल और सक्षम एजेंसियों के निर्णय के अनुसार ही होगी।
सरकार की ओर से भूमि के इस्तेमाल को लेकर भी शर्तें तय की गई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जमीन का इस्तेमाल प्रस्तावित NSG क्षेत्रीय केंद्र के उद्देश्य के लिए ही किया जाना है। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि निर्धारित अवधि में भूमि का उपयोग नहीं होने या भविष्य में इसकी जरूरत समाप्त होने की स्थिति में जमीन राज्य सरकार को वापस किए जाने की शर्त रखी गई है।
अयोध्या में NSG का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होने के बाद यहां विशेष सुरक्षा बल की आधारभूत सुविधाएं विकसित किए जाने की योजना है। हालांकि केंद्र के निर्माण, वहां तैनात होने वाले कर्मियों की संख्या, परिचालन क्षमता और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम विस्तृत जानकारी परियोजना के आगे बढ़ने के साथ सामने आएगी। इसलिए फिलहाल कैबिनेट द्वारा स्वीकृत जमीन और क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना को ही इस परियोजना का प्रमुख स्वीकृत चरण माना जा सकता है।
अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कई एजेंसियों के बीच समन्वय पर आधारित है। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारियां संभालती हैं। NSG के क्षेत्रीय हब की स्थापना होने के बाद विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्तर के आतंकवाद-रोधी बल की पहुंच को भी बेहतर आधार मिल सकेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले से अयोध्या के सुरक्षा ढांचे में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ने जा रही है। 65 एकड़ भूमि का निशुल्क हस्तांतरण केवल जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय नहीं है, बल्कि इसके पीछे अयोध्या में एक स्थायी क्षेत्रीय सुरक्षा क्षमता विकसित करने की योजना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब अगला चरण जमीन के औपचारिक हस्तांतरण और परियोजना से जुड़े निर्माण एवं प्रशासनिक कामों का होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मिल्कीपुर के पूरे लालखां गांव में करीब 26 हेक्टेयर यानी 65 एकड़ बंजर जमीन केंद्रीय गृह मंत्रालय को बिना किसी कीमत के दी जाएगी और इसका निर्धारित उद्देश्य NSG के रीजनल हब की स्थापना है। जमीन का बाजार मूल्य करीब 16.90 करोड़ रुपये बताया गया है। कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद अयोध्या में NSG की क्षेत्रीय मौजूदगी को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है।












