शिल्पा शेट्टी ने 32 साल बाद फिल्म बाजीगर के आइकॉनिक सीन का राज खोला। उन्होंने बताया कि शाहरुख खान के धक्का देने वाले सीन की शूटिंग चार दिन और कई टेक में हुई थी और यह स्ट्रिंग वर्क से शूट किया गया था।
बॉलीवुड: शाहरुख खान, काजोल और शिल्पा शेट्टी स्टारर फिल्म ‘बाजीगर’ (1993) का एक सीन आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस सीन में शाहरुख खान का किरदार शिल्पा शेट्टी के किरदार को छत से धक्का देता है। लेकिन दर्शकों का ध्यान हमेशा इस बात पर गया कि गिरते समय शिल्पा शेट्टी के चेहरे पर मुस्कान दिखाई देती है।
अब इस रहस्य से पर्दा खुद शिल्पा शेट्टी ने 32 साल बाद पहली बार उठाया है, जिसमें उन्होंने उस सीन की शूटिंग के पीछे की असली कहानी बताई है।
शिल्पा शेट्टी ने बताया क्यों मुस्कुराईं थीं उस सीन में
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में शिल्पा शेट्टी से इस वायरल सीन को लेकर सवाल पूछा गया कि आखिर गिरते समय वह मुस्कुरा क्यों रही थीं। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय फिल्म निर्माण तकनीक आज की तरह विकसित नहीं थी।
उन्होंने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में VFX (विजुअल इफेक्ट्स) या CGI (कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी) जैसी आधुनिक तकनीकें उपलब्ध नहीं थीं। इसलिए इस पूरे सीन को वास्तविक स्टंट और स्ट्रिंग वर्क की मदद से शूट किया गया था।
शिल्पा के अनुसार, वह वास्तव में एक सपोर्टिंग स्ट्रिंग से लटकी हुई थीं और उसी के सहारे उन्हें नीचे गिरने का प्रभाव दिया गया था। इसी वजह से उनके चेहरे पर अनजाने में एक हल्की मुस्कान आ गई, जो बाद में फिल्म का एक आइकॉनिक विजुअल बन गई।
4 दिन तक चला था सिर्फ एक सीन का शूट
शिल्पा शेट्टी ने बताया कि यह सीन जितना छोटा दिखता है, उसे शूट करना उतना ही कठिन था। इस एक दृश्य को पूरा करने में लगभग चार दिन लग गए थे। उन्होंने बताया कि इस सीन के लिए उन्हें 15 से 20 बार टेक देना पड़ा। हर बार अलग-अलग एंगल और सुरक्षा व्यवस्था के साथ शूटिंग की गई ताकि सीन यथार्थवादी लगे।
आज की तकनीक के बारे में बात करते हुए शिल्पा ने कहा कि यदि यह सीन आज शूट किया जाता तो VFX की मदद से स्ट्रिंग्स को आसानी से हटा दिया जाता, लेकिन उस समय ऐसा संभव नहीं था, इसलिए तकनीकी सीमाओं के बीच ही शूट पूरा किया गया।
‘बाजीगर’ ने बदल दी थी बॉलीवुड की थ्रिलर फिल्मों की दिशा
‘बाजीगर’ को भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली क्राइम थ्रिलर फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर जोड़ी अब्बास-मुस्तान ने किया था। फिल्म में शाहरुख खान ने एक एंटी-हीरो की भूमिका निभाई थी, जिसने उस दौर में हिंदी सिनेमा में नकारात्मक किरदारों को लेकर एक नया दृष्टिकोण दिया।
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काजोल और शिल्पा शेट्टी की मौजूदगी ने फिल्म की कहानी को और भी मजबूत बनाया। शिल्पा शेट्टी ने इस फिल्म में ‘सीमा चोपड़ा’ का सपोर्टिंग किरदार निभाया था। यह उनकी डेब्यू फिल्म भी थी, जिसने उनके करियर की शुरुआत को एक मजबूत पहचान दी।
18 साल की उम्र में किया था डेब्यू
‘बाजीगर’ 12 नवंबर 1993 को रिलीज हुई थी। उस समय शिल्पा शेट्टी की उम्र केवल 18 साल थी। अपनी पहली ही फिल्म में दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस कैटेगरी में नामांकित किया गया था। यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जाती है, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
शाहरुख-काजोल और शिल्पा की केमिस्ट्री बनी फिल्म की ताकत
फिल्म में शाहरुख खान और काजोल की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के साथ-साथ शिल्पा शेट्टी का सपोर्टिंग रोल भी काफी प्रभावशाली रहा। फिल्म के गाने ‘ऐ मेरे हमसफर’ और ‘किताबें बहुत सी’ आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं और 90 के दशक की याद दिलाते हैं।
कम बजट में बड़ी सफलता
‘बाजीगर’ लगभग 4 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर 32 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी। यह फिल्म उस वर्ष की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी और इसने शाहरुख खान को सुपरस्टार बनने की दिशा में एक बड़ा कदम दिया।
तकनीकी सीमाओं के बीच बनी यादगार फिल्म
शिल्पा शेट्टी के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि 90 के दशक की फिल्मों की शूटिंग कितनी चुनौतीपूर्ण होती थी। सीमित तकनीक, वास्तविक स्टंट और लंबे शूटिंग शेड्यूल के बावजूद उस दौर की फिल्मों ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। ‘बाजीगर’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां रचनात्मकता और अभिनय ने तकनीकी सीमाओं को पीछे छोड़ दिया।










