बरौनी में 800 मेगावाट की नई थर्मल पावर यूनिट की तैयारी, अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन

बरौनी में 800 मेगावाट की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर यूनिट स्थापित करने की तैयारी चल रही है। परियोजना के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने की भी योजना है।

बरौनी में 800 मेगावाट क्षमता की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर यूनिट स्थापित करने की तैयारी चल रही है। परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और इसके साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने की भी योजना है।

पटना: बिहार में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से बरौनी में 800 मेगावाट की नई थर्मल पावर यूनिट स्थापित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित इस परियोजना के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जबकि पुराने बिजली संयंत्र की भूमि का उपयोग करने की योजना बनाई गई है।

बरौनी में नई बिजली परियोजना की तैयारी

राज्य में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए बरौनी थर्मल पावर स्टेशन परिसर में 800 मेगावाट क्षमता की नई यूनिट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। परियोजना को अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर विकसित करने की योजना है, जिसे पारंपरिक थर्मल यूनिट की तुलना में अधिक दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।

बरौनी में 800 मेगावाट की नई थर्मल पावर यूनिट की तैयारी, अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन

अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम जारी है। ऊर्जा मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। नई यूनिट के लिए अलग से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि बंद हो चुकी पुरानी थर्मल यूनिट की उपलब्ध जमीन का उपयोग किया जाएगा।

बैटरी स्टोरेज सिस्टम से मिलेगी अतिरिक्त सुविधा

नई बिजली उत्पादन इकाई के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) विकसित करने की भी योजना बनाई गई है। इस प्रणाली के माध्यम से कम मांग के समय उत्पादित बिजली को स्टोर किया जा सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर पीक आवर में ग्रिड को उपलब्ध कराया जाएगा।

बताया जा रहा है कि बिहार में एनटीपीसी पहली बार इस तरह की बैटरी स्टोरेज तकनीक का उपयोग करेगी। इससे बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने और मांग के अनुसार बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।

आधुनिक तकनीक से कम होगा कोयले का उपयोग

अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक वाली थर्मल यूनिट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बेहतर ईंधन दक्षता है। इस तकनीक में प्रति यूनिट बिजली उत्पादन के लिए पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में लगभग 10 से 15 प्रतिशत कम कोयले की आवश्यकता होती है।

कम कोयले की खपत के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक गैसों का उत्सर्जन भी घटता है। साथ ही पानी की खपत कम होने से यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अधिक उपयोगी मानी जाती है।

अन्य थर्मल प्लांटों पर भी चल रहा विचार

एनटीपीसी के सूत्रों के अनुसार, भविष्य में कहलगांव और कांटी स्थित थर्मल पावर स्टेशन परिसरों में भी 800 मेगावाट क्षमता की अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इन परियोजनाओं की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। कहलगांव में तीसरे चरण की प्रस्तावित यूनिट के लिए साइट सर्वे का कार्य पूरा किया जा चुका है।

वर्तमान में बिहार में एनटीपीसी की छह थर्मल पावर यूनिट संचालित हैं, जिनकी कुल वाणिज्यिक उत्पादन क्षमता लगभग 9,500 मेगावाट है। नई परियोजना के शुरू होने से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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