मानसून में 43% बारिश की कमी, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में सूखे की आशंका बढ़ी

देशभर में मानसून की बारिश 43% कम दर्ज हुई। IMD ने यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा की आशंका जताई, जिससे सूखे और खेती को लेकर चिंता बढ़ी।

देशभर में मानसून की बारिश सामान्य से 43 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने एल नीनो और तटस्थ IOD के प्रभाव के बीच इस सीजन में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, जिससे कई राज्यों में चिंता बढ़ गई है।

नई दिल्ली: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल उम्मीद से धीमी बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, जून के अंत तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। एल नीनो और तटस्थ भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) की स्थिति के चलते इस मानसून सीजन में कई राज्यों में वर्षा की कमी बनी रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

मानसून की रफ्तार धीमी, कई राज्यों में बारिश का बड़ा घाटा

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 27 जून तक देशभर में सामान्य की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। विभाग का अनुमान है कि जुलाई में मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा, लेकिन पूरे सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा रहने की संभावना बनी हुई है।

मानसून में 43% बारिश की कमी, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में सूखे की आशंका बढ़ी

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार एल नीनो का प्रभाव सक्रिय है, जबकि भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) फिलहाल तटस्थ स्थिति में है। सामान्य परिस्थितियों में सकारात्मक IOD, एल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित कर देता है, लेकिन इस बार ऐसा होने के संकेत फिलहाल नहीं मिल रहे हैं। इसी वजह से मानसून कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है।

दिल्ली में उमस ने बढ़ाई परेशानी

बारिश की कमी के बीच राजधानी दिल्ली में लोगों को भीषण उमस का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार दोपहर 'फील्स लाइक' तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक स्तर बताया गया। हालांकि वास्तविक अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन हवा में अधिक नमी होने के कारण लोगों को अत्यधिक गर्मी का एहसास हुआ।

मौसम विभाग के अनुसार, अधिक आर्द्रता और कमजोर हवाओं के कारण गर्मी का प्रभाव सामान्य तापमान से कहीं अधिक महसूस किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त बारिश होने तक ऐसी स्थिति बनी रह सकती है।

यूपी, बिहार समेत कई राज्यों में चिंता

मानसून की कमी का असर कई राज्यों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मेघालय, गुजरात, मणिपुर, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में भी वर्षा का बड़ा घाटा चिंता का विषय माना जा रहा है।

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी अपेक्षित बारिश नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में मानसून की गतिविधियां तेज नहीं होती हैं तो कृषि, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

IMD ने जताई कम बारिश की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही जून से सितंबर तक के मानसून सीजन के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान जारी कर चुका है। विभाग के अनुसार, इस बार पूरे सीजन में सामान्य से 10 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी रहने की आशंका है। हालांकि अंतिम स्थिति जुलाई और अगस्त के दौरान मानसून की सक्रियता पर निर्भर करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और राज्य सरकारों के लिए अहम रहेंगे। यदि मानसून की रफ्तार में सुधार होता है तो वर्षा घाटे की भरपाई कुछ हद तक संभव हो सकती है, लेकिन फिलहाल कई राज्यों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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